सतत विकास के साथ औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की जरूरत है—प्रधान

दिल्ली।इस्पात और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज भारतीय धातु संस्थान की “मेटलर्जिकल इंडस्ट्रीज के संबंध में पूर्वी भारत को एक विनिर्माण केंद्र बनाना” विषय पर आयोजित वेबीनार को संबोधित किया। इस वेबीनार में धातु क्षेत्र के विशेषज्ञों, इस्पात मंत्रालय के अधिकारियों और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस अवसर पर श्री प्रधान ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी पूर्वी भारत को देश के अन्य विकसित क्षेत्रों के समकक्ष लाने के मिशन पर काम कर रहे हैं। एक कुशल मानव पूंजी, प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता और एक आकांक्षी आबादी के साथ पूर्वी भारत एक तकनीकी-सक्षम विनिर्माण वातावरण बनाने के लिए तैयार है। उन्होंने आगे कहा कि बहुत कम राष्ट्र ऐसे हैं, जो पूर्वी भारत की तरह प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता से धन्य हैं। उन्होंने इस्पात क्षेत्र में भी शुरू किए गए मिशन पूर्वोदय और पूर्वी भारत में विकास के एक नए युग को प्रेरित करने की इसकी क्षमता के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने अंतर्देशीय जलमार्ग सहित पूर्वी भारत में लॉजिस्टिक अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के प्रयासों के बारे में भी बताया। श्री प्रधान ने पूर्वी भारत में वास्तुकला, समुद्री अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास की समृद्ध विरासत के बारे में बताया और उन्होंने कहा कि उस गौरव को फिर से हासिल करने का समय आ गया है।
सतत विकास के बारे में श्री प्रधान ने कहा कि विकास और इकलॉजी एक साथ अस्तित्व में रह सकते हैं। उन्होंने विश्व के लिए एक हरित भविष्य की ओर बढ़ने को लेकर श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व प्रदान करने के बारे में भी बताया। उन्होंने आगे कहा कि सरकारों को सतत विकास के साथ औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की जरूरत है और नीतियां लोगों, व्यापार और पर्यावरण के अधिक अनुकूल होनी चाहिए। उन्होंने भारतीय धातु संस्थान से ‘हरित इस्पात’ के आसपास हरित, स्वच्छ और अधिक टिकाऊ उत्पाद बनाने में सहायता करने का आह्वान किया।
औद्योगिक क्रांति 4.0 के बारे में उन्होंने कहा कि हमें अवसर का लाभ उठाना चाहिए और नए, अभिनव और टिकाऊ व्यापार मॉडल बनाना चाहिए।

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