उत्तराखण्ड से युवा चेहरा अनिल बलूनी पहुॅचे राज्यसभा

उत्तराखण्ड की राज्यसभा सीट से निर्विरोध सांसद चुने गये अनिल बलूनी ने आज के युवाओं को यहा प्ररेणा दी है कि जीवन में सफलता के लिए साधन सम्पन्नता पहली शर्त नही है, बल्कि अपने काम के प्रति समर्पण तथा ईमानदारी इसके लिए प्राथमिक है।
हालांकि अनेक दिग्गज भाजपा नेता यह आस लगाये बैठे थे कि उत्तराखण्ड से राज्यसभा के लिए उन्हें मौका मिलेगा। परन्तु भाजपा आलाकमान ने कई दिग्गजों को दरकिनार कर युवा तुर्क को तरजीह दी और अनिल बलूनी निर्विरोध संसद के उच्च सदन पहुचे। गौरतलब है कि अनिल बलूनी मूल रूप से उत्तराखण्ड के जनपद पौड़ी के विकास खण्ड कोट के अन्तर्गत स्थित नकोट गॉव के निवासी हैं। वह बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गये थे। युवा होने पर वह कैरियर को लेकर पत्रकारिता के प्रति आकर्षित हुए। उसी दौरान वह वरिष्ठ भाजपा नेता सुंदर सिंह भण्डारी के सम्पर्क में आये। उनकी प्रतिभा तथा संघ के प्रति समर्पण एंव काम के प्रति लगन को देखकर श्री भण्डारी काफी प्रभावित हुए। सुन्दर सिंह भण्डारी जब बिहार के राज्यपाल बनाये गये तो उन्होंने अपने ओएसडी के रूप में अनिल बलूनी को नियुक्त किया गया। जब वे गुजरात के राज्यपाल बने तो अनिल बलूनी को भी अपने साथ गुजरात ले गए। उसी दौरान मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे और उनका मुख्यमंत्री का दौर अपने आरोह पर था।
श्री बलूनी गुजरात में ही तत्कालीन मुख्यमंत्री और अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा गुजरात भाजपा संगठन में मजबूत पकड़ रखने वाले अमित ‘शाह के सम्पर्क में आये। वहीं पर उन्होंने अपने कार्यो की जिम्मेदारी को निर्वहन करते हुए श्री मोदी और शाह को काफी प्रभावित किया।
सन् 2002 में अनिल बलूनी चुनावी राजनीति में प्रवेश किया तथा उत्तराखण्ड में आयोजित पहले विधान सभा चुनाव में कोटद्वार से विधान सभा चुनाव लड़ा। उस विधान सभा चुनाव में वे किसी राष्टीय पार्टी के सबसे कम उम्र के विधान सभा उम्मीदवार थे। बाद में श्री बलूनी राजधनी आकर राष्टीय राजनीति से जुड़ गये और उन्हें पार्टी के राष्टीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी सौंपी गयी। उत्तराखण्ड व उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले भाजपा के राष्टीय प्रवक्ता अनिल बलूनी को एक और जिम्मेदारी राष्टीय मीडिया प्रभारी के रूप में दी गयी। जिसे श्री बलूनी की सांगठनिक राजनीति योग्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2014 के आम लोक सभा चुनावों में जब अमित शाह  उत्तर प्रदेश के प्रभारी थे और श्री मोदी बनारस से चुनाव लड़ रहें थे, तब मीडिया और प्रचार-प्रसार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गयी। नतीजा सबके सामने है। इसके बाद वह पार्टी हाईकमान की नजरों में ओर भी महत्वपूर्ण हो गये और उन्हें नेशनल मीडिया कोआॅर्डिनेटर एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता के पदों की जिम्मेदारियां सौपी गयी। उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन किया और पार्टी ने उत्तर दक्षिण से लेकर पूर्वोत्तर तक अपना परचम फहराने में कामयाबी हासिल की।
राज्यसभा के लिए उनका चयन उनकी इन्हीं जिम्मेदारियों के सफलता पूर्वक निर्वहन के चलते किया गया। साथ ही भाजपा ने यह संदेश भी दे दिया है कि संगठन में दूसरी पंक्ति को मजबूत करने की तैयारी ‘ाुरू कर दी गयी है। उनकी सफलता से पार्टी के अन्य युवा नेता भी काफी प्रभावित होंगे तथा उनमें उत्साह बढ़ेगा। अनिल बलूनी की विजय ने अरूण ‘ाौरी, एम जे अकबर, हरिवंश, राजीव ‘ाुक्ला आदि की भॉति पत्रकरिता से राजनीति में प्रवेश करते हुए इस परंपरा को भी आगे बढ़ाने का काम किया है। वह उत्तराखण्ड के ऐसे पहले पत्रकार हैं जो वर्तमान में किसी पार्टी राज्यसभा सांसद, केंद्रीय मीडिया प्रभारी की जिम्मेदारियों को बखूबी से निभा रहे हैं।

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