राजीव गांधी की वो उपलब्धियां जिन्हे देश कभी नहीं भुला सकेगा -अशोक शर्मा

नई दिल्ली।आज सम्पूर्ण राष्ट्र भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी का 76 वां जन्मदिवस मना रहा है।
कांग्रेस पार्टी राजीव जी काक्ष जन्मदिन उनके कार्यकाल में देश के द्वारा हासिल की गई उपलब्धियों को याद करते हुए मनाती है।
भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी जी कार्यकाल देशहित में कुछ ऐतिहासिक कार्य हुए जिन्हे देश कभी नहीं भुला सकता साथ ही उन योजनाओं का आज भी भारत की जनता न सिर्फ लाभ उठा रही है बल्कि उन कार्यों की वजह से मिलने वाली सुविधाओं का आज देशवासियों के जीवन में विशेष महत्व है।
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस मानवाधिकार विभाग के चीफ मीडिया कोऑर्डिनेटर अशोक शर्मा ने कहा कि पूर्व पीएम राजीव गांधी को 21वीं सदी के भारत का निर्माता भी कहा जाता है। 40 साल में प्रधानमंत्री बनने वाले राजीव गांधी ने आधुनिक भारत की नींव रखने की दिशा में काम किया। अशोक शर्मा ने पार्टी कार्यकाल में देश ने हासिल की कुछ उपलब्धियों के बारे में विस्तार से बताया।
कंप्यूटर क्रांति: राजीव गांधी ने देश में कंप्यूटर क्रांति लाने की दिशा में काम किया। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का मानना था कि विज्ञान और तकनीक की मदद के बिना उद्योगों का विकास नहीं हो सकता। उन्होंने ना सिर्फ कंप्यूटर को भारतीय घर तक लाने का काम किया बल्कि भारत में इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी को आगे ले जाने में अहम रोल निभाया। उनका मानना था कि युवा पीढ़ी कंप्यूटर और विज्ञान के जरिए ही आगे जा सकती है. राजीव गांधी जब पीएम थे तो उन्होंने विज्ञान और टेक्नालॉजी के लिए सरकारी बजट को बढ़ाया और यह पहल की गई कि हर देशवासी कंप्यूटर का प्रयोग कर सके. दुनिया को पहला कंप्यूटर 1940 के आखिर में मिला और भारत ने पहली बार कंप्यूटर 1956 में खरीदा था।

दूररसंचार क्रांति: राजीव गांधी ने ही देश में दूरसंचार क्रांति लाई। आज जिस डिजिटल इंडिया की चर्चा है, उसकी संकल्पना राजीव गांधी जी अपने जमाने में कर चुके थे। उन्हें डिजिटल इंडिया का आर्किटेक्ट और सूचना तकनीक और दूरसंचार क्रांति का जनक कहा जाता है। राजीव गांधी की पहल पर अगस्त 1984 में भारतीय दूरसंचार नेटवर्क की स्थापना के लिए सेंटर पार डिवेलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स(C-DOT)की स्थापना हुई। 1986 में राजीव की पहल से ही एमटीएनएल की स्थापना हुई, जिससे दूरसंचार क्षेत्र में और प्रगति हुई।
पंचायती राज: पंचायती राज से जुड़ी संस्थाएं मजबूती से विकास कार्य कर सकें, इसके लिए उन्होंने देश में पंचायतीराज व्यवस्था को सशक्त किया। उनकी हमेशा से यही कहना था कि अगर निचले स्तर तक लोकतंत्र को पहुंचना है तो पंचायती राज व्यवस्था सबल करना होगा। राजीव गांधी की सरकार की ओर से तैयार 64 वें संविधान संशोधन विधेयक के आधार पर नरसिम्हा राव सरकार ने 73 वां संविधान संशोधन विधेयक पारित कराया और 24 अप्रैल 1993 से पूरे देश में पंचायती राज व्यवस्था लागू हुई। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी मानते थे कि राष्ट्र के विकास में महिलाएं अहम कड़ी होती हैं। पंचायतीराज और नगर पालिका अधिनियमों के जरिए उन्होंने ये सुनिश्चित किया कि नीति निर्माण और स्थानीय एवं राष्ट्रीय राजनीति में महिलाओं की आवाज़ को मजबूती मिले।

पंचायत राज की स्थापना के पीछे यह मंशा थी कि सत्ता एक व्यक्ति के हाथ में न होकर असंख्य लोगों के हाथ में हो और कांग्रेस ने इसी नीति के अनुरूप काम किया है।
वोट देने की उम्र: पहले देश में वोट देने की उम्र सीमा 21 साल थी। लेकिन युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी की नजर में यह उम्र सीमा गलत थी। उन्होंने 18 वर्ष की उम्र के युवाओं को मताधिकार देकर उन्हें देश के प्रति और जिम्मेदार बनाने की पहल की। 1989 में संविधान के 61 वें संशोधन के जरिए वोट देने की उम्रसीमा 21 से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई।
राष्ट्रीय एकीकरण: राजीव गांधी की दूरदर्शिता की वजह से देश को एकजुट करने का काम किया। जब देश अलगाववाद और उग्रवाद से ग्रस्त था तब उन्होंने देश को एकजुट करने का काम किया। मिजोरम, पंजाब और असम समझौते में विचारशील बातचीत के माध्यम से उन्होंने देश में राष्ट्रीय एकता, शांति और सुरक्षा के लिए मानक निर्धारित किए।
सती आयोग: 1987 में राजीव गांधी ने सती आयोग (रोकथाम अधिनियम) के तहत सती प्रथा को अपराध घोषित किया।
उच्च शिक्षा: 40 लाख विधार्थियों ने 1985 में स्थापित इग्नू के माध्यम से उच्च शिक्षा प्राप्त की।

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