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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद कोरोना संकट पर आयोजित पहली बैठक के बाद भारत सचेत

सी एम पपनैं

भतरोज (नैनीताल)। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पंद्रह सदस्यीय सदस्यों द्वारा 10 अप्रैल को कोविड-19 महामारी से उत्पन्न संकट पर चर्चा के लिए डोमोनिकन गणराज्य की अध्यक्षता मे आयोजित पहली वीडियो कांफ्रेंसिंग बैठक के सत्र में परिषद महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कोरोना संकट को पहला और सबसे बड़ा स्वास्थय संकट कहा है। इसके परिणामो को दूरगामी बता, अवगत कराया है, इस महामारी के कारण सामने आई कमजोरियों और तैयारियों का अभाव इस बात का संकेत देता है कि एक जैव-आतंकवादी हमले के क्या परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने इस महामारी को अंतरराष्ट्रीय शान्ति एवं सुरक्षा बनाए रखने के लिए बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने व्यक्त किया, इससे सामाजिक अशांति और हिंसा बढ़ने की आशंका है, जिससे इस बीमारी से लड़ने की परिषद की क्षमता कमजोर होगी।

परिषद महासचिव गुतारेस ने इस महामारी से निपटने हेतु इसे वर्तमान पीढ़ी की लड़ाई और इस तरह की समस्या को संयुक्त राष्ट्र का उद्देश्य करार दे, सचेत कर व्यक्त किया, राज्येतर समूह कोविड-19 जैसे खतरनाक विषाणुओं तक पहुच सकते हैं। जिसके द्वारा संपूर्ण विश्व मे महामारी फैला कर तबाही मचाई जा सकती है।

महामारी संकट से उबरने के लिए सचेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शनिवार को देश के विभिन्न राज्यो के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कांफ्रैंनसिंग के माध्यम से संवाद किया गया। जिसमे ज्यादातर राज्य प्रमुखों ने राष्ट्रव्यापी पूर्णबंदी की अवधि कम से कम 30 अप्रैल तक बढ़ाने पर सहमति दी है, साथ ही महामारी का मुकाबला करने के लिए वित्तीय मदद की मांग भी की है। प्रधानमंत्री ने कहा है, इस चुनोती का सामना करने के लिए टीम वर्क जरूरी है। हम सबका ध्यान अब जान भी, जहान भी पर होना चाहिए। भारत के उज्जवल भविष्य, स्मृद्धि व स्वस्थ भारत के लिए यह जरूरी है। प्रधान मंत्री ने कृषि और सम्बंधित क्षेत्रो के लिए कृषि बाजार कानून मे बदलाव समेत कुछ खास उपायों पर भी बल दिया है, जिनमे कृषि उपज की बिक्री हो सके।

इससे पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने भी शुक्रवार को राज्यो के साथ तालमेल कर सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि गेहूं जैसी रवि मौसम की उपज की खरीद मे देरी न हो।

भारत का जनमानस सचेत रह तथा प्रशासनिक दिशा निर्देशो का पालन कर इस महामारी से आशान्वित होकर पार पाने हेतु जूझ रहा है। संक्रमितो की पहचान मे आ रही जटिलता, संसाधनों की कमी के चलते संक्रमितो के उपचार की बढ़ती चुनोतियों तथा भीड़भाड़ वाले महानगरों व नगरों में कोरोना विषाणु संक्रमण का खतरा दिन प्रतिदिन बढ़ने से जनमानस की चिंता मे इजाफा हो रहा है। गरीब व वंचित तबके की मुश्किले बढ़ गई हैं। आवश्यक घरेलू सामान और सेवाओं की आपूर्ति को बनाए रखने तथा जमाखोरों व बढ़ती महंगाई पर काबू पाने में प्रशासन के सम्मुख चुनोती खड़ी हो रही है। पूर्णबंदी के कारणवश प्रसव पीड़ा से परेशान महिलाओं को अस्पताल पहुचाने मे दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

लाखों लोगों को रोजगार से हाथ धोने पर भूख के संकट का सामना करना पड़ रहा है। अपने घरों से बाहर विभिन्न राज्यो मे फसे परिवार व लोग पूर्णबंदी के कारणवश बेहाल हैं। किसानों की फसले खेतो मे खड़ी है या उनके भंडारण मे समस्या आ रही है, नई फसलों की बुआई किसानों के सामने खड़ी है। लम्बे समय तक उक्त समस्याओं की स्थिति यथावत बने रहने पर बड़े पैमाने पर विभिन्न प्रकार की विषम परिस्थितियों का सामना जनमानस को करना पड़ सकता है।

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार बढ़ते संक्रमण व पूर्णबंदी के कारणवश भारत की अर्थव्यवस्था लड़खड़ा सकती है। जीडीपी दर चालू वित्त वर्ष में 4.4 फीसद रह सकती है। इससे पहले संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने भारत में 40 करोड़ लोगों के गरीब होने की आशंका जताई थी। एशियाई विकास बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष जैसी एजेंसियां अपनी रिपोर्ट में भारत में बड़ी मंदी की आशंका जता चुकी हैं तथा अर्थव्यवस्था के कई दशक पीछे पिछड़ जाने की आशंका व्यक्त कर चुके हैं।

भारतीय रिजर्ब बैंक के आंकड़ो के मुताबिक देश का विदेशी मुद्रा भंडार तीन अप्रैल को समाप्त सप्ताह में 90.2 करोड़ डॉलर की गिरावट के साथ 474.66 अरब डॉलर रह गया है। गिरावट के कारणों में विदेशी मुद्रा आस्तियो का घटना माना गया है।

केन्द्र सरकार का भी अनुमान है कि कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई लंबी चलेगी। आर्थिक मंदी से भारी नुकसान होगा। फिर भी केंद्र सरकार द्वारा राज्यो व केंद्रशासित प्रदशो के लिए तीन चरणों का आपात पैकेज तैयार किया गया है। पहला चरण जनवरी से मार्च 2020, दूसरा जुलाई से मार्च 2021 तथा तीसरा चरण अप्रैल 2021 से मार्च 2024 तक लागू करने की योजना है। राज्यो को जारी किए जाने वाले पहले चरण के मद में 7774 करोड़ तथा बाकी रकम मध्यावधि सहायता 1 से 4 साल के लिए उपलब्ध कराए जाने का विचार है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव लव अग्रवाल के अनुसार कोरोना संकट की बढ़ती महामारी से कारगर रूप से निपटने हेतु स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा चिकित्सा कर्मियों हेतु मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा संचालित ‘दीक्षा पोर्टल’ का इस्तेमाल क्षमता निर्माण हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम चला कर किया जायेगा। उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम मे सभी स्वास्थ्यकर्म से जुड़े लोगों, तकनीशियनों, नर्सिंगकर्मियों, राज्य सरकार के अधिकारियों, पुलिस तथा सुरक्षा से जुड़े अन्य कर्मियों के साथ-साथ एनसीसी से जुड़े लोग प्रशिक्षण प्राप्त कर बढ़ती महामारी से जूझने मे सक्षम हो सकेंगे।

देश में कोरोना संक्रमण की बढ़ती चुनोती के बीच अभी तक डेढ़ लाख लोगों की ही जांच हो पाई है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा जनहित में निजी प्रयोगशालाओं को कोरोना वायरस की जांच मुफ्त में किए जाने के निर्देश के बाद देश के कई प्रयोगशालाओं के मालिकों ने साधनों की कमी बताकर मुफ्त जांच हेतु सरकार के सहयोग व लागत का भुगतान करने पर ही हामी की संभावना व्यक्त की है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

मानवीय परोपकार के नाते आज जरुरत है, वैश्विक संकट की घड़ी में अपने निजी लाभ व पूर्वाग्रहो को छोड़कर सभी चिकित्सक और चिकित्सा संगठन तथा पद्धतियां सामने आए और आपसी समन्वय से संक्रमित व मरते लोगों की निःस्वार्थ भाव रक्षा करे।

पूर्णबंदी पर गृह मंत्रालय द्वारा राज्य सरकारो व केंद्रशासित प्रदेशों को कड़ाई से लागू किए जाने वाले कदमो की जानकारी दी है। सामाजिक या धार्मिक जलसे एवं जुलूस की अनुमति हेतु कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। गृह मंत्रालय द्वारा राज्यो से सुझाव भी मांगे गए हैं, जिन पर विचार कर ज्यादा श्रेणीयों मे लोगों और सेवाओं को बंद से छूट दी जा सके। बिहार सहित कुछ अन्य राज्यो द्वारा गृहमंत्रालय को सुझाव पत्र प्रेषित कर दिए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण से जुडी गतिविधियों को अनुमति देने की मांग की गई है।

कोरोना विषाणु संक्रमण के बढ़ते दौर में एक सुखद खबर भी प्रकाश मे आई है। दिल्ली आईआईटी द्वारा 1.5 लाख रुपयों की लागत से विकसित कोरोना विषाणु रोधी मशीन का निर्माण हुआ है, जिसे दिल्ली आजादपुर साग-सब्जी व फल मंडी मे खरीदारी करने वालों को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए उनके शरीर का तापीय परीक्षण कर, उन पर विषाणु रोधी दवा सोडियम हाइपोक्लोराइड की 12 से 15 सैकिंड तक बौछार कर उक्त खरीदारों के पूर्ण शरीर को संक्रमण मुक्त किया जा रहा है।

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