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“डॉ. दीपक कुमार अरोड़ा ने लौटाई बलवीरी देवी की मुस्कान: सालों पुराने घुटनों के दर्द से मिली राहत, टोटल नी रिप्लेसमेंट के तीसरे दिन ही अपने पैरों पर चलने लगीं मरीज”

डॉ. अरोड़ा ने सिर्फ घुटना नहीं, मेरा आत्मविश्वास भी लौटाया’– बलवीरी देवी

Amar sandesh नई दिल्ली। घुटनों का दर्द केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि व्यक्ति के आत्मविश्वास और रोजमर्रा के जीवन को भी प्रभावित करता है। लंबे समय तक असहनीय घुटनों के दर्द से जूझ रहीं बलवीरी देवी के लिए भी स्थिति ऐसी ही हो गई थी। सामान्य घरेलू काम, चलना-फिरना, सीढ़ियां चढ़ना और रात में आराम से सोना तक मुश्किल हो गया था। लेकिन मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज में एसोसिएट डायरेक्टर (ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट) डॉ. दीपक कुमार अरोड़ा द्वारा किए गए सफल टोटल नी रिप्लेसमेंट के बाद उनकी जिंदगी ने नई दिशा ले ली।

बलवीरी देवी ने बताया कि शुरुआत में घुटनों में केवल काम करने या अधिक चलने पर दर्द होता था, लेकिन समय के साथ दर्द इतना बढ़ गया कि दैनिक जीवन की सामान्य गतिविधियां भी चुनौती बन गईं। परिवार उन्हें इलाज के लिए मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल लेकर पहुंचा, जहां जांच और एक्स-रे में पता चला कि उनके घुटनों का कार्टिलेज लगभग पूरी तरह घिस चुका है। ऐसे में दवाइयों से राहत संभव नहीं थी और टोटल नी रिप्लेसमेंट ही सबसे उपयुक्त उपचार था।

हालांकि, बलवीरी देवी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बीमारी नहीं, बल्कि सर्जरी का डर था। उन्हें आशंका थी कि ऑपरेशन के बाद शायद वे दोबारा सामान्य रूप से चल भी पाएंगी या नहीं।

इस बारे में डॉ. दीपक कुमार अरोड़ा ने कहा कि अधिकांश मरीज सर्जरी से अधिक उसके बाद के जीवन को लेकर चिंतित रहते हैं। इसलिए इलाज की शुरुआत केवल ऑपरेशन की योजना से नहीं, बल्कि मरीज का विश्वास जीतने से होती है। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक और सही पुनर्वास (रीहैबिलिटेशन) की मदद से अधिकांश मरीज अपेक्षाकृत जल्दी सामान्य जीवन की ओर लौट सकते हैं।

परिवार के अनुसार, अस्पताल में पहले से ऑपरेशन करा चुके मरीजों से बातचीत और डॉ. अरोड़ा के भरोसे ने बलवीरी देवी का डर दूर किया। इसके बाद उनका सफल टोटल नी रिप्लेसमेंट किया गया।

सर्जरी के बाद उनकी रिकवरी उम्मीद से बेहतर रही। ऑपरेशन के तीसरे दिन ही उन्होंने अपने पैरों पर चलना शुरू कर दिया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद उन्होंने अपने घर की तीसरी मंजिल तक सीढ़ियां भी सफलतापूर्वक चढ़ीं।

बलवीरी देवी भावुक होकर कहती हैं, “डॉ. दीपक अरोड़ा ने सिर्फ मेरा घुटना नहीं बदला, बल्कि मेरा आत्मविश्वास भी वापस लौटा दिया। आज मैं बिना सहारे घर के अधिकांश काम कर लेती हूं और पहले की तरह सामान्य जीवन जी रही हूं।”

डॉ. दीपक कुमार अरोड़ा का कहना है कि यदि घुटनों का दर्द लंबे समय तक बना रहे, चलने-फिरने में कठिनाई हो और दवाइयों से राहत न मिले, तो विशेषज्ञ से समय पर परामर्श लेना चाहिए। सही समय पर किया गया उपचार मरीज को फिर से सक्रिय, आत्मनिर्भर और बेहतर जीवन दे सकता है।

बलवीरी देवी की यह कहानी आधुनिक जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी की सफलता का उदाहरण है, जहां चिकित्सा विशेषज्ञता, आधुनिक तकनीक और मरीज के विश्वास ने मिलकर उन्हें दर्द से मुक्ति के साथ नया आत्मविश्वास और नई जिंदगी दी।

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