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नवा नीलाचल’ में उमड़ा आस्था का महासैलाब: 630वें वर्ष में प्रविष्ट हुई महेश की ऐतिहासिक रथ यात्रा

  लेखक  -डॉ. झिलिक सोम

 

पुरी के बाद देश की दूसरी सबसे पुरानी रथ यात्रा का आगाज |

लोहे के 50 फीट ऊंचे ऐतिहासिक रथ पर सवार होकर मौसी के घर पहुंचे भगवान जगन्नाथ

श्रीरामपुर (हुगली) । शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के श्रीरामपुर स्थित ऐतिहासिक क्षेत्र महेश में गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक उल्लास के साथ ऐतिहासिक महेश रथ यात्रा का शुभारंभ हुआ। पुरी की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के बाद देश की दूसरी तथा बंगाल की सबसे प्राचीन मानी जाने वाली यह धार्मिक परंपरा इस वर्ष अपने ६३०वें (630वें) वर्ष में प्रवेश कर गई है। राज्य के कोने-कोने से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं के जयघोष से पूरा महेश क्षेत्र दिनभर भक्तिमय माहौल में सराबोर रहा।

वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गर्भगृह से बाहर लाए गए विग्रह

सालभर महेश मंदिर के गर्भगृह में विराजमान रहने वाले भगवान जगन्नाथ, बलराम और देवी सुभद्रा के विग्रहों को गुरुवार सुबह विशेष अनुष्ठान और वैदिक विधि-विधान के साथ मुख्य द्वार पर लाया गया। श्रद्धालुओं ने पुष्प, बेलपत्र और चंदन अर्पित कर भगवान का आशीर्वाद लिया। इसके पश्चात, जय जगन्नाथ के गगनभेदी नारों के बीच तीनों विग्रहों को विशाल रथ पर विराजमान कराकर मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) के लिए रवाना किया गया।

आकर्षण का केंद्र रहा 140 साल पुराना लोहे का रथ

महेश जगन्नाथ मंदिर के सामने जीटी रोड के किनारे सालभर सुरक्षित रखा जाने वाला ऐतिहासिक रथ इस बार भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा।

पूर्व काल में यह यात्रा लकड़ी के रथ से निकाली जाती थी, लेकिन बीते 140 वर्षों से मार्टिन बर्न कंपनी द्वारा निर्मित लोहे के विशालकाय रथ का ही उपयोग किया जा रहा है।

14वीं शताब्दी का इतिहास और ‘नवा नीलाचल’ की मान्यता

धार्मिक इतिहास के अनुसार, 14वीं शताब्दी में संत ध्रुबानंद ब्रह्मचारी को पुरी में जगन्नाथ जी को भोग लगाने से रोक दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने अनशन शुरू कर दिया। तीसरे दिन भगवान की आकाशवाणी हुई कि वे बंगाल के हुगली तट स्थित ‘महेश’ जाएं, जहां उन्हें नीम का एक विशाल तना मिलेगा। ध्रुबानंद ने उसी नीम के तने से विग्रह तैयार कर सन 1396 में मंदिर की स्थापना की। कालांतर में वैष्णव संत श्री चैतन्य महाप्रभु ने इस पावन स्थल को ‘नवा नीलाचल’ (नया पुरी) की संज्ञा दी थी।

15 दिनों तक चलेगा मेला, सरकारी अनुदान से बढ़ी भव्यता

स्नानपिड़ी मैदान का मेला: यात्रा के उपलक्ष्य में मंदिर से सटे स्नानपिड़ी मैदान में एक विशाल सांस्कृतिक व व्यापारिक मेला शुरू हो गया है, जो देवताओं की वापसी (पुनर्यात्रा) तक अगले दो सप्ताह चलेगा।

राज्य सरकार का अनुदान: इस वर्ष पहली बार राज्य सरकार की ओर से महेश जगन्नाथ मंदिर समिति को विशेष वित्तीय अनुदान प्रदान किया गया, जिससे मंदिर परिसर और उत्सव आयोजनों को भव्य रूप से सजाया गया।

सुरक्षा एवं व्यवस्था: लाखों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा यातायात नियंत्रण, सीसीटीवी निगरानी और चिकित्सा शिविरों के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार, महेश की यह रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि बंगाल की जीवंत और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का अनूठा प्रतीक है।

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