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ग्रीष्मकालीन अवकाश मे प्रवासी उत्तराखंडी नौनिहालों के लिए बाल-रंगमंच कार्यशाला का आयोजन

सी एम पपनैं

नई दिल्ली। ग्रीष्मकालीन स्कूली अवकाश के अवसर पर, प्रवासी उत्तराखंडी 8 से 16 वर्ष के नौनिहालों के लिए कुमांऊनी, गढ़वाली और जौनसारी अकादमी, दिल्ली सरकार द्वारा, अकादमी चेयरमैन व दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की पहल पर, दस जून से बाल-रंगमंच कार्यशाला का आयोजन दिल्ली के विभिन्न उत्तराखंडी प्रवासी बहुल, तेरह जगहो पर, सुवर्ण रावत, हिम्मत सिंह नेगी, भगवंत मनराल, राजेन्द्र तोमर इत्यादि के निर्देशन में किया जा रहा है।

3 से 9 जुलाई, एक हफ्ते तक, चुने हुए कुमांउनी, गढ़वाली व जौनसारी बोली-भाषा के लोकनाट्यो व लोक परंपराओ पर आधारित नाटक, आईटीओ स्थित, प्यारेलाल भवन में ‘बाल उत्सव’ के रूप मे मंचित किए जायैंगे।

गठित कुमांऊनी, गढ़वाली और जौनसारी अकादमी, दिल्ली सरकार द्वारा, उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों मे प्रवासरत प्रवासी बाल कलाकारों को, प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से, बाल-रंगमंच कार्यशाला के इस आयोजन को, उत्तराखंड के प्रवासी जनों द्वारा बडे स्तर पर सराहा जा रहा है। इस सराहना के तहत ही, ‘उत्तराखंड लोक मंच’ अध्यक्ष बिट्टू उप्रेती द्वारा, दिल्ली मे चल रही तेरह बाल-रंगमंच कार्यशालाओ के बाल कलाकारों के लिए, कार्यशाला के अंतिम चरण तक, जलपान व अन्य सुविधाओ की, व्यवस्था कर, बाल कलाकारों का उत्साहवर्धन किया गया है। प्राप्त सूचनानुसार, उक्त संस्था द्वारा, मुहैया कराई गई सुविधा, अभी तक पांच केंद्रों तक सीमित है, जो जल्दी ही अन्य सभी कार्यशालाओ तक उपलब्ध कराई जानी है।

प्राप्त सूचनानुसार गढवाली नाटक ‘जीतू बगड़वाल’ व ‘तीलू रौतेली’, कुमाउंनी नाटक ‘बारमासा’ तथा जौनसारी नाटक ‘महासू देवता’ मंचित होने वाले प्रमुख नाटक हैं, जिनका मंचन उत्तराखंड के सु-विख्यात नाट्य निर्देशकों द्वारा किया जाना है।

कुमांउनी, गढ़वाली व जौनसारी बोली-भाषा अकादमी, दिल्ली सरकार, सचिव डाॅ जीतराम भट्ट द्वारा, अवगत कराया गया है, उत्तराखंड की बोली-भाषाओ के प्रचार-प्रसार के लिए, विविध गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है, जिनमे आयोजित बाल-रंगमंच कार्यशाला भी एक है।
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