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अमर चंद्र
नई दिल्ली/देहरादून।उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग अब केवल राज्य तक सीमित नहीं रही, बल्कि देश की राजधानी दिल्ली से लेकर प्रदेश की राजधानी देहरादून तक एक सशक्त जनआंदोलन का रूप ले चुकी है। रविवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रवासी उत्तराखण्डियों, सामाजिक संगठनों, महिला शक्ति, युवाओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने एकजुट होकर अंकिता हत्याकांड के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के तत्काल इस्तीफे और सर्वोच्च न्यायालय के सिटिंग जज की निगरानी में CBI जांच की पुरजोर मांग की।
जंतर-मंतर पर आयोजित इस आंदोलन में कांग्रेस के पूर्व मंत्री धीरेन्द्र आंदोलनकारी पत्रकार, देव सिंह रावत, वरिष्ठ रंग कर्मी आंदोलनकारी कुशाल सिंह बिष्ट, पंचम सिंह रावत, वरिष्ठ पत्रकार सुनिल नेगी, ब्यामेशजुगराण, संयुक्ता ध्यानी, आंदोलनकारी अनिल पंत, पत्रकार कुशल जीना, गढ़वाल भवन के महासचिव पवन मैठानी , गढ़वाल भवन के पूर्व अध्यक्ष अजय बिष्ट, आंदोलनकारी उमेश रावत,उत्तराखंड क्रांति दल के अध्यक्ष बिहारी लाल जालंधरी शशि मोहन कोटनाला,दिगमोहन नेगी, पुरुषोत्तम शर्मा चारु तिवारी सुरेन्द्र हालसी,प्रताप थलवाल, समेत अनेक लोगों ने संबोधित किया, जन आक्रोश रैली की अध्यक्षता वरिष्ठ महिला नेत्री उमा जोशी ने की।
इस अवसर पर अनेक समाजसेवी जैसे सामाजिक कार्यकर्ता महेश चंद्रा, हरीश असवाल, कुंदन बसेड़ा सहित दिल्ली-एनसीआर में रह रहे सैकड़ों समाजसेवी और बड़ी संख्या में मातृ शक्ति की प्रभावशाली मौजूदगी रही। मंच से लेकर धरना स्थल तक महिलाओं और युवाओं की भागीदारी ने आंदोलन को और मजबूती दी।
धरने के दौरान वक्ताओं ने एक स्वर में आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड में प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास किया गया है और कथित वीआईपी एंगल को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। उनका कहना था कि जब तक मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच नहीं होगी, तब तक न्याय की उम्मीद अधूरी रहेगी। धरने के बाद भू-कानून संयुक्त संघर्ष समिति के एक शिष्टमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ज्ञापन सौंपते हुए CBI जांच की मांग दोहराई।
इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता धीरेन्द्र प्रताप ने केंद्र और उत्तराखंड सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि दस दिनों के भीतर दोषियों के खिलाफ ठोस और निर्णायक कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरा उत्तराखंड दिल्ली की सड़कों पर उतर आएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि न्याय का आंदोलन है।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि अंकिता हत्याकांड को लेकर जनआंदोलन को और व्यापक तथा मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर सभी विपक्षी दल एकजुट हैं और CBI जांच की मांग पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति मिश्र ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा सत्ता की सोच महिलाओं के प्रति संवेदनहीन है। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल अंकिता की नहीं, बल्कि हर बेटी की सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई है, जिसे समाज के हर वर्ग को मिलकर लड़ना होगा।
प्रसिद्ध समाजसेवी एवं बलात्कार विरोधी कार्यकर्ता योगिता भयाना ने अपने संबोधन में कहा कि वह बेटियों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ निरंतर संघर्ष करती रहेंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तराखंड सरकार इस अपराध में केवल मौन नहीं, बल्कि कहीं न कहीं लिप्त नजर आती है। उन्होंने कहा कि यदि असली अपराधियों के नाम पूरी तरह सामने आ गए, तो केंद्र और राज्य दोनों सरकारों के लिए स्थिति संभालना मुश्किल हो जाएगी।
समाजसेवी एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरिपाल रावत ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री इस पूरे मामले में अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। उन्होंने कहा कि राज्य के मुखिया होने के नाते उन्हें यह बताना चाहिए कि अब तक उन्होंने अंकिता को न्याय दिलाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए हैं। रावत ने आरोप लगाया कि सरकार कथित वीआईपी समेत सभी दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है, इसलिए मुख्यमंत्री को तत्काल प्रभाव से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि CBI जांच हो, लेकिन वह सर्वोच्च न्यायालय के सिटिंग जज की निगरानी में ही होनी चाहिए।
इधर, दिल्ली के बाद उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी जनआक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। विभिन्न सामाजिक, महिला और युवा संगठनों ने परेड ग्राउंड से मुख्यमंत्री आवास की ओर विशाल रैली निकाली, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से रैली को कुछ दूरी पहले रोक दिया, लेकिन प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। “अंकिता हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं”, “CBI जांच कराओ” और “धामी सरकार मुर्दाबाद” जैसे नारों से राजधानी गूंजती रही।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अंकिता हत्याकांड केवल एक परिवार का मामला नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की अस्मिता से जुड़ा सवाल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही निष्पक्ष जांच और दोषियों को सख्त सजा देने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई, तो यह आंदोलन दिल्ली से लेकर देहरादून और उत्तराखंड के हर जिले व गांव तक फैलाया जाएगा। जनता ने स्पष्ट संदेश दिया कि जब तक देश व उत्तराखंड की बेटी अंकिता को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह जनसंघर्ष थमेगा नहीं।
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