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सीडीएस जनरल स्व.बिपिन रावत की दूसरी पुण्यतिथि पर सैन्य अधिकारियों द्वारा दी गई श्रद्धांजलि


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सी एम पपनैं

नई दिल्ली। जीबीआर मेमोरियल फाउंडेशन ऑफ इंडिया द्वारा 8 दिसंबर को इंडिया इंटर नेशनल सेंटर में भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ स्व.जनरल बिपिन रावत की दूसरी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन मुख्य व विशिष्ट अतिथियों में प्रमुख क्रमश: भारतीय नौसेना अध्यक्ष एडमिरल आर हरि कुमार, पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया तथा भारतीय सेना के शहीद हुए कई उच्च अधिकारियों की पत्नियों में प्रमुख गीतिका लिड्डर व अग्नेस तथा जनरल बिपिन रावत की सुपुत्री तारिणी रावत की उपस्थिति में आयोजित किया गया।

आयोजित आयोजन का शुभारंभ मुख्य व विशिष्ट अतिथियों के कर कमलों दीप प्रज्ज्वलित कर व सीडीएस जनरल स्व.बिपिन रावत के चित्र पर श्रद्धांजलि स्वरूप गुलाब की पंखुड़ियां अर्पित कर की गई।

इस अवसर पर अन्य सैन्य अधिकारियों में वाइस चीफ ऑफ एयर स्टॉफ एयर मार्शल ए पी सिंह, डिप्टी चीफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, लेफ्टिनेंट जनरल विनोद जी खंडारे, लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह, एडमिरल एस एन घोरमडे, मेजर जनरल मुकेश अग्रवाल, एयर मार्शल वी पी एस राणा सहित कई अन्य अधिकारियों द्वारा जनरल बिपिन रावत के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई।

आयोजित पुण्य तिथि के इस अवसर पर जीबीआर मेमोरियल फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया अध्यक्ष एवं पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आर के एस भदौरिया द्वारा नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार का स्वागत अभिनंदन कर व्यक्त किया, जनरल बिपिन रावत का जीवन अति अनुभव युक्त और उनका मिशन इतना बड़ा था कि उन पर जितनी भी बात की जाए कम है। भारतीय सेना में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाता रहेगा। नौसेना प्रमुख एडमिरल आर हरि कुमार ने व्यक्त किया, जनरल बिपिन रावत ने अपना पूरा जीवन सेना को समर्पित कर दिया था। वे सैन्य रणनीति बनाने में माहिर थे उन्हें उत्तर पूर्व में घुसपैठ रोकने के सैन्य अभियानों का खासा अनुभव प्राप्त था। जनरल रावत ने साफ कर दिया था वे जरूरत पड़ने पर देश की सीमाएं लांघकर दुश्मन के इलाके में घुसकर उन्हें बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

आयोजन के इस अवसर पर एडमिरल आर हरि कुमार द्वारा सूचित किया गया, नौसेना ने उनके नाम पर दो ट्रॉफ़ी शुरू की हैं। इस अवसर पर जीबीआर मेमोरियल फ़ाउंडेशन ऑफ़ इंडिया द्वारा मुख्य व विशिष्ट अतिथियों को स्मृतिचिन्ह देकर सम्मानित किया गया। सी डी एस जनरल स्व.बिपिन रावत को श्रद्धांजलि स्वरूप उनके जीवन और उनके मिशन पर रोशनी डालती एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।

पत्रकारिता के क्षेत्र में दो दशक से भी ज़्यादा समय तक डिफ़ेंस मामलों पर गहरी पकड़ रखने वाले वरिष्ठ रक्षा पत्रकार, पौड़ी गढ़वाल मूल निवासी मनजीत नेगी द्वारा जनरल बिपिन रावत पर शोध परक अंग्रेजी पुस्तक ‘जनरल बिपिन रावत : द वार्रियर’ का लोकार्पण भी मुख्य व विशिष्ट अतिथियों के कर कमलों किया गया। उक्त पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है। अवगत कराया गया उक्त पुस्तक का हिन्दी संस्करण पहले ही प्रकाशित किया जा चुका है।

विगत दो वर्ष पूर्व 8 दिसम्बर 2021 को जनरल बिपिन रावत उनकी पत्नी मधुलिका रावत और बारह अन्य सैन्य वीर ऑफिसरों और जवानों में बिग्रेडियर एल एस लिड्डर, लेफ्टिनेंट कर्नल हरजिंदर सिंह, ग्रुप कैप्टन वरूण सिंह, विंग कमांडर पी एस चौहान, स्क्वाडन लीडर के सिंह, जेडब्लूओ राना प्रताप दास, जेडब्लूओ प्रदीप, हवलदार सतपाल राय, नायक गुरसेवल सिंह, नायक जितेंद्र कुमार, लांस नायक विवेक कुमार और लांस नायक वी साई तेजा हेलिकॉप्टर दुर्घटना में शहीद हो गये थे।

उत्तराखण्ड के पर्वतीय अंचल पौड़ी गढ़वाल में 16 मार्च 1958 को जन्मे जनरल बिपिन रावत का परिवार पीढ़ियों से सेना के ज़रिए देश सेवा करता रहा है। उनके पिता लेफ्टिनेंट जनरल लक्ष्मण सिंह रावत 1988 में डिप्टी चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ़ के पद से रिटायर हुए थे।

कार्यक्रम समापन से पूर्व आजतक के सीनियर एडीटर व वरिष्ठ रक्षा पत्रकार मनजीत नेगी द्वारा सभी अतिथियों का जनरल स्व.बिपिन रावत की पुण्य तिथि पर उपस्थित होने पर आभार व्यक्त कर धन्यवाद दिया गया।उन्होंने कहा, जनरल बिपिन रावत का जीवन भले ही छोटा रहा हो लेकिन उनका मिशन इतना बड़ा था कि उन पर जितनी भी बात की जाए कम है। भारतीय सेना में उनके योगदान को हमेशा याद किया जाता रहा है, आगे भी याद किया जाता रहेगा। कहा गया, स्व.जनरल बिपिन रावत की सोच को अक्षुण्ण रखने और आगे ले जाने के उद्देश्य से उनसे जुड़े हम सभी लोगों ने जीबीआर मेमोरियल फाउंडेशन ऑफ इंडिया का गठन किया है। संगठन से जुडे सभी लोगों का मानना है, जनरल बिपिन रावत सिर्फ़ एक व्यक्ति का नाम नहीं बल्कि देश सेवा में जुटी एक संस्था और विजन का नाम है। जिन्होंने पूरा जीवन देश की सेनाओं और युवाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने और देश के सैन्य मिशन को सम्रद्ध करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्हीं की सोच का प्रतिफल रहा है, आज हमारी तीनों सेनाएं आपसी तालमेल के साथ देश की रक्षा में तत्पर हैं।

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