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सी एम पपनै
उत्तराखंड। देवभूमि उत्तराखंड पर्वतीय अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी तादात में हो रहे पलायन पर अंकुश लगाने हेतु उत्तराखंड सरकार द्वारा 2 सितंबर 2023 को अंचल के पर्यटन विकास, स्थानीय लोगों के व्यवसाय में उन्नति तथा रोजगार की निरंतर बढ़ोत्तरी हेतु मानस खंड मंदिर माला मिशन की सोच को प्राथमिकता देकर राज्य के पौराणिक और धार्मिक मंदिरों का विकास करने की एक महत्वकांक्षी योजना बनाई गई थी। कुमाऊं अंचल के पुराणों में वर्णित पौराणिक मंदिरों के पुनरुद्धार के नीति नियोजन की रूपरेखा को धरातल पर उतारने का प्रयास किया गया था। 
उक्त मिशन के आरंभिक चरण में कुमाऊं मंडल अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ व चंपावत के 16 पौराणिक मंदिरों को चुना गया था, जिनमें जागेश्वर धाम, गोलू देवता मंदिर, कटारमल सूर्य मंदिर, कैंची धाम, हाट कालिका, पाताल भुवनेश्वर गुफा, बालेश्वर मंदिर, नंदा देवी मंदिर, पाताल रुद्रेश्वर गुफा मंदिर इत्यादि इत्यादि प्रमुख रहे। बाद के चरण में कुमाऊं अंचल के कुछ अन्य प्रसिद्ध और प्राचीन मंदिरों को भी मिशन के अंतर्गत जोड़ा गया, जिनकी संख्या करीब 48 तक पहुंच।
उक्त 48 चुने गए पौराणिक मंदिरों में अल्मोड़ा जिले के अभ्यंतर में रानीखेत के उत्तर-पश्चिम में मात्र 25-30 कि.मी. की दूरी पर नयनाभिराम प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर, समुद्रतल से लगभग 6000 फुट की ऊंचाई पर बसा आस्था और अध्यात्म का प्रतीक नौबाड़ा ग्रामसभा के अंतर्गत नैथना के पर्वत शिखर पर ‘श्री नैथना देवी मंदिर’ को भी उक्त मिशन के अंतर्गत पर्यटन विकास हेतु चुना गया।
अपनी दिव्यता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध श्री नैथना देवी मंदिर की धार्मिक मान्यता पुराणों में वर्णित दक्षयज्ञ की कथा से जुड़ी हुई है। उक्त पौराणिक मंदिर की मान्यता है, दक्षयज्ञ में पिता के व्यवहार से कुपित मां सती द्वारा आत्मदाह किए जाने से अत्यंत क्रोधित सती के मृत शरीर को लेकर ब्रह्मांड में विचरण करते हुए भगवान शंकर के उग्र रूप को देखकर, देवताओं व ऋषि-मुनियों की प्रार्थना पर भगवान विष्णु द्वारा छोड़े गए सुदर्शन चक्र ने सती के शरीर को कई टुकड़ों में विभाजित किया। वे अंग और आभूषण इत्यादि जहां-जहां बिखरे वे शक्तिपीठ कहलाए गए। इनमें से एक श्री नैथना देवी (मां भगवती) को भी शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता रहा है।
अंचल के लोकपर्व घी संक्रांति के अवसर पर उक्त मंदिर में बड़ा मेला लगता है, दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आशीर्वाद पाने आते हैं। मंदिर तक पहुंचने के दौरान भक्तों को जो प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण और आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होता है, वह इस स्थान को एक विशिष्ट तीर्थस्थल के रूप में स्थापित करता है। उक्त पौराणिक मंदिर के इर्द-गिर्द की दिव्यता और भव्यता हर श्रद्धालु को देवी मां के चरणों में शीश नवाने के लिए प्रेरित करती नजर आती है।
मानस खंड मंदिर माला मिशन के अंतर्गत जिस दिव्य पौराणिक श्री नैथना देवी (मां भगवती) के मंदिर का विकास होना है उक्त मंदिर के प्रबंधन से जुड़े पदाधिकारियों के मध्य छिड़े विवाद के कारण विकास कार्य लंबित पड़ा हुआ है। जिसका मुख्य कारण उक्त मंदिर समिति के संविधान के मुताबिक एक तय राशि प्रदान किए स्थानीय दान दाताओं को सदस्यता न देना रहा है। विगत दिनों उक्त मंदिर के प्रबंधन द्वारा की गई बेईमानी के खिलाफ प्रबंधन से जुड़े निवर्तमान अध्यक्ष गणेश दत्त गौड़ द्वारा आरटीआई के माध्यम से सूचना प्राप्त कर बीस वर्ष बाद विगत माह दिनांक 19.08.2026 को मात्र तीस सदस्यों के स्थान पर 382 आजीवन सदस्यों की प्रमाणित सूची जारी करवाने का कार्य किया गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष के निष्कासन में 15 में से 8 पदाधिकारियों तथा खुद को कार्यवाहक अध्यक्ष बताने वाले विवादित सज्जन का नाम उक्त जारी 382 की सूची से ही गायब पाया गया है।
उल्लेखनीय है कि अपने को कार्यवाहक अध्यक्ष बताने वाले तथाकथित पदाधिकारी का नाम खुद डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय अल्मोड़ा द्वारा विगत दिनांक 19.08.2026 को आरटीआई एक्ट के तहत जारी 382 आजीवन सदस्यों की प्रमाणित सूची से गायब है। अर्थात जो व्यक्ति विधि द्वारा निर्वाचित अध्यक्ष को सदस्यता से निकालने का दावा कर रहा था उसकी स्वयं की आजीवन सदस्यता ही उक्त प्रमाणित सूची में दर्ज नहीं है।
विगत 8 सितंबर 2026 को मुख्य सूचना आयुक्त, देहरादून में धारा 19(3) के अंतर्गत द्वितीय अपील भी निवर्तमान अध्यक्ष गणेश दत्त गौड़ द्वारा दायर की गई ताकि स्थानीय वंचित अन्य दानदाताओं को बायलॉज 5(1) के तहत आजीवन सदस्यता दिलवाई जा सके। निवर्तमान अध्यक्ष द्वारा अवगत कराया गया, सोसाइटी एक्ट 1860 की धारा 12 व बायलॉज 12(2) व डिप्टी रजिस्ट्रार के पत्र दिनांक 24.03.2026 के तहत अक्टूबर प्रथम सप्ताह में एजीएम व चुनाव पंजीकृत कार्यालय नौबाड़ा या मंदिर परिसर में अनिवार्य है।
उक्त विवाद के कारण पौराणिक श्री नैथना देवी (मां भगवती) मंदिर का विकास कार्य जो मंदिर माला मिशन के अंतर्गत होना है, लंबित है। ऐसे में अंचल के उक्त मंदिर के आसपास के कस्बों व ग्रामीण क्षेत्र के पर्यटन विकास, विभिन्न व्यवसायों से जुड़े लोगों की आर्थिक उन्नति व रोजगार की क्या स्थिति होगी समझा जा सकता है।
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