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शिवराज बोले 1966 का कानून मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप नहीं, करीब 18 हजार सुझावों के बाद किसान संगठनों से फिर शुरू हुआ व्यापक विमर्श
Amar sandesh नई दिल्ली, 10 सितंबर। नकली और घटिया बीजों की समस्या से किसानों को निजात दिलाने तथा बीज क्षेत्र को मौजूदा परिस्थितियों के अनुरूप मजबूत बनाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रस्तावित ‘सीड बिल’ पर किसानों और किसान संगठनों के साथ व्यापक विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को कृषि भवन, नई दिल्ली में देशभर के किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर प्रस्तावित कानून के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कृषि मंत्री ने कहा कि विकसित कृषि संकल्प अभियान के दौरान किसानों की ओर से लगातार यह सुझाव आया था कि 1966 में बने सीड एक्ट और उस समय की व्यवस्था को वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप बदला जाना चाहिए। नकली बीज और घटिया पेस्टिसाइड किसानों के लिए बड़ी समस्या हैं। इसी को देखते हुए नए कानून की आवश्यकता पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
श्री चौहान ने कहा कि वर्तमान बीज अधिनियम 1966 में बना था और बीज नियंत्रण आदेश 1983 में लागू हुआ था। समय के साथ कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव हुए हैं और नई चुनौतियां सामने आई हैं। मौजूदा व्यवस्था में खराब बीज के लिए जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया प्रभावी नहीं होने के कारण नकली और घटिया बीज बाजार में पहुंचने की समस्या बनी हुई है।
करीब 18 हजार सुझावों पर हुआ अध्ययन
कृषि मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित सीड बिल के मसौदे पर वर्ष 2025 में सार्वजनिक सुझाव मांगे गए थे। किसानों और किसान संगठनों की ओर से करीब 18 हजार सुझाव प्राप्त हुए। इन सुझावों का अध्ययन किया गया है, लेकिन सरकार ने किसान संगठनों के साथ प्रत्यक्ष संवाद का सिलसिला फिर शुरू किया है, ताकि जमीनी स्तर की समस्याओं और अनुभवों को कानून के अंतिम प्रारूप में समुचित स्थान दिया जा सके।
उन्होंने कहा कि गुरुवार की बैठक में करीब 20 किसान संगठनों ने अपने सुझाव दिए। यह प्रक्रिया यहीं समाप्त नहीं होगी। किसान या कोई भी किसान संगठन अपने सुझाव देना चाहे तो उनका स्वागत है। सभी सुझावों पर गंभीरता और गहराई से विचार करने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।
70 फीसदी बीज मौजूदा कानून के दायरे से बाहर
चौहान ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था की एक बड़ी चुनौती यह है कि करीब 70 प्रतिशत बीज मौजूदा बीज अधिनियम के दायरे से बाहर हैं। राज्यों में बीजों को लेकर अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं और मौजूदा दंड प्रावधान भी पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं। ऐसे में नए कानून में व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और नकली बीजों पर सख्ती से रोक लगाने पर जोर दिया जा रहा है।
किसानों के पारंपरिक बीजों पर नहीं लगेगी पाबंदी
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून का उद्देश्यवो किसानों के अधिकारों को सीमित करना नहीं है। किसानों को अपने पारंपरिक और कृषक किस्म के बीजों का उपयोग, आपस में आदान-प्रदान और बिक्री करने की स्वतंत्रता बनी रहेगी। पारंपरिक बीजों के लिए अनिवार्य पंजीकरण का प्रावधान नहीं होगा। किसान अपनी इच्छा से अपनी किस्म का पंजीकरण करा सकेंगे।
गलत बीज बेचने वालों पर प्रभावी कार्रवाई का प्रस्ताव
प्रस्तावित सीड बिल में अपराधों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर प्रभावी दंड व्यवस्था का प्रस्ताव किया गया है। छोटी चूक के मामलों में पहली बार चेतावनी और दोबारा गलती होने पर अधिक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिससे किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीज पहुंचें और नकली बीजों की बिक्री पर प्रभावी अंकुश लगे।
‘जल्दबाजी में नहीं होगा कोई फैसला’
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान संगठनों से मिले सुझाव अलग-अलग परिस्थितियों और अनुभवों पर आधारित हैं। इसलिए सरकार किसी भी तरह की जल्दबाजी में फैसला नहीं करेगी। विचार-विमर्श की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी और फिलहाल इसकी कोई अंतिम समय-सीमा तय नहीं की गई है। किसानों और अन्य संबंधित पक्षों से मिलने वाले सुझावों पर भी विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार की प्राथमिकता किसान हित है और कृषि से जुड़ी नीतियां किसानों के साथ संवाद और सहमति के आधार पर तय करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने जो अनुभव और सुझाव साझा किए हैं, उनका गंभीरता से अध्ययन किया जाएगा और जो सुझाव व्यावहारिक एवं किसान हित में होंगे, उन्हें अंतिम मसौदे में शामिल किया जाएगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों के अलावा अन्य संबंधित पक्षों से भी चर्चा की जा रही है, लेकिन खेती का आधार किसान है और उनकी बात को प्राथमिकता से सुना जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार होने वाला नया कानून किसानों को नकली बीजों की समस्या से राहत देने और उन्हें अधिक सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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