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भतरौंजखान (उत्तराखंड)। नैनीताल और अल्मोड़ा जिलों के सीमान्त कस्बे भतरौंज स्थित स्वामी हीरानंद बाबा मंदिर में विगत 2 सितंबर से 9 सितंबर तक चतुर्थ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन मंदिर समिति द्वारा स्थानीय स्तर पर सुप्रसिद्ध व्यास नंदा बल्लभ पंत के सानिध्य व श्रीमती जानकी देवी पत्नी गोपाल सिंह असवाल मुख्य यजमान की प्रभावी उपस्थिति में आयोजित किया गया। 
मंदिर समिति अध्यक्ष पूरन करगेती, संरक्षक व स्थानीय व्यापार संघ अध्यक्ष प्रदीप पंत, उपाध्यक्ष हरीश भट्ट तथा कोषाध्यक्ष डॉ रघुवीर पंत की प्रभावी सोच तथा सहयोग, स्थानीय व्यापार संघ व इर्दगिर्द के दर्जनों गांवों के सैकड़ों श्रद्धालुओं व प्रबुद्धजनों में प्रमुख महेंद्र पाल सिंह बिष्ट, देवेंद्र छिम्वाल, भगवत वर्मा, जगदीश शर्मा, हरीश खुल्बे, बिष्णु दत्त पंत, गोपाल नैनवाल इत्यादि इत्यादि की अपार श्रद्धा से अति वर्षा बरसने के बावजूद बड़ी संख्या में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में पहुंचे श्रद्धालुओं की उपस्थित में सात दिनी आयोजन कथा, हवन, आरती प्रसाद वितरण व भव्य भंडारा आयोजन के साथ संपन्न हुआ।
आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के इस अवसर पर 2 सितंबर को स्थानीय ग्रामीण महिलाओं द्वारा कलश यात्रा, 4 सितंबर जन्माष्टमी के दिन श्रीकृष्ण की झांकी व 6 सितंबर को स्थानीय बाजार में धूमधाम के साथ डोला उठाया गया। प्रति दिन बड़ी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालुओं द्वारा श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ व कीर्तनों में शामिल होकर तथा कथा समाप्ति पर चनाम्रत व प्रसाद ग्रहण किया गया। 9 सितंबर को आयोजित इर्द-गिर्द बसे दर्जनों गांवों के श्रद्धालु भक्तों व स्थानीय स्कूलों बच्चों द्वारा बड़ी संख्या में मंदिर परिसर भंडारे में पहुंच प्रसाद ग्रहण किया गया। 
मंदिर समिति अध्यक्ष पूरन करगेती, उपाध्यक्ष हरीश भट्ट, संरक्षक प्रदीप पंत व कोषाध्यक्ष रघुवीर पंत द्वारा चतुर्थ भागवत कथा कराने के मुख्य उद्देश्य अंचल व स्थानीय ग्रामीण क्षेत्र की सुख शांति व लोगों के आत्मज्ञान की वृद्धि बताया गया। आयोजन को भव्य और सफल बनाने हेतु सभी दानदाताओं, सहयोगियों व श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया गया। भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में दूर-दूर से पहुंचे सभी साधु संतों की उपस्थिति के प्रति भी आभार व्यक्त किया गया।
कथा वाचक व्यास नंदा बल्लभ पंत द्वारा आयोजित भागवत कथा वाचन के दौरान श्रद्धालुओं को अवगत कराया गया, भागवत कथा का आयोजन कराने से घर व क्षेत्र में सकारात्मक ऊर्जा आती है, पितरों को शांति व सद्गति मिलती है तथा परिवार व समाज के लोगों में सौहार्द बढ़ता है। नई पीढ़ी को धार्मिक परंपराओं, संयम, और सत्कर्मों की प्रेरणा मिलती है। जन्म-जन्मांतर के पापों और नकारात्मकता मिटती है। मानसिक शांति और परिवार में सुख-समृद्धि:, घर-परिवार में आ रही अशांति, रोग, शोक, दरिद्रता और दुर्भाग्य को दूर करने के लिए भागवत कथा कराई जाती है। साथ ही धर्म और अध्यात्म का प्रसार: समाज में धार्मिकता, सदाचार, ज्ञान और वैराग्य की भावना का विकास होता है।
कथा वाचक व्यास नंदा बल्लभ पंत द्वारा श्रद्धालुओं को बड़े ही मनोभाव से अवगत कराया गया, भागवत कथा का महत्व बहुत गहरा और जीवन से जुड़ा हुआ होता है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, लीलाओं और उपदेशों के माध्यम से धर्म, भक्ति और कर्म का सही मार्ग का ज्ञान अर्जित होता है।
सात दिनी भागवत कथा के अंतर्गत कथा वाचक द्वारा अवगत कराया गया, नियमित रूप से भागवत कथा सुनने से आत्मिक शुद्धि होती है, अच्छे संस्कार विकसित होते हैं और व्यक्ति सही निर्णय लेने में सक्षम होता है। यही कारण है कि भागवत कथा को आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक शांति का माध्यम माना जाता है।
कथा वाचक व्यास नंदा बल्लभ पंत द्वारा कथा वाचन के दौरान हिंदी भाषा के साथ-साथ स्थानीय कुमाऊंनी बोली-भाषा में अवगत कराया, श्रीमद्द भागवत कथा हिन्दू धर्म के 18 पुराणों में से एक है, इसमें सभी वेदों का सार है। भागवत शब्द की व्याख्या करते हुए अवगत कराया गया, ये शब्द चार शब्दों से बना है। भा से भक्ति, ग से ज्ञान, वा से वैराग्य तथा त से त्याग। कहा गया, भागवत पुराण हिन्दू धर्म के आधारभूत ग्रंथों में से एक है और भगवान विष्णु के अवतारों की चरित्र कथाएं इसमें विस्तृत रूप से वर्णित हैं। भागवत पुराण के श्लोक और अध्यायों की संख्या के कारण इसे अष्टादश पुराणों में गिना जाता है। इस पुराण के स्कन्धों में विष्णु के अवतारों, जिनमें श्रीकृष्ण का जीवन विशेष रूप से विस्तार पूर्वक बताया गया है। यहां पर उनकी बाल लीलाएं, गोपियों के संग वन भ्रमण, रासलीला, कंस वध, गीता उपदेश, व्रजवासियों के साथ नीति-नियमों का पालन आदि का वर्णन मिलता है। सृष्टि के विस्तृत वर्णन के साथ-साथ वेदों का महत्त्व और धर्म का उपदेश दिया गया है। इसमें भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, और धर्म जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई है। इसमें राजा परीक्षित और शुकदेव जी की कथा भी शामिल है।
विगत 2 सितंबर से 9 सितंबर तक उत्तराखंड नैनीताल व अल्मोड़ा जिलों के सीमान्त कस्बे भतरौंजखान स्थित स्वामी हीरानंद बाबा मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का अवलोकन कर निष्कर्ष स्वरूप कहा जा सकता है, भागवत कथा सुनने से मन शांत होता है और नकारात्मक विचार कम होते हैं। जब कथा भजन और कीर्तन के साथ होती है, तो वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। इससे मन भगवान से जुड़ता है, आस्था मजबूत होती है। भागवत कथा हमें सिखाती है, जीवन में सच्चाई, करुणा, धैर्य और भक्ति कितनी जरूरी है।
भागवत पुराण में रस-भाव की अद्भुतता और भक्तिरस की अमृत धारा विद्यमान है। इसमें विभिन्न रसों के मधुर संगम से भरे गीत, विरह, मिलन, श्रृंगार, हास्य, भय, वीर, करुण आदि के अनेक विशेष उपाख्यान हैं, जो अध्यात्म तथा साहित्य के रंगों में भरे हुए हैं। भागवत पुराण के अद्भुत संग्रह में रासपंचाध्यायी अध्यात्म एवं साहित्य की एक अनूठी वस्तु मिलती है, जो अन्य पुराणों में इतनी मधुर भाषा और भक्तिरस से विस्तार से नहीं मिलती है। भागवत पुराण भक्ति और ज्ञान के साथ-साथ साहित्य का भी सुन्दर संगम और हिन्दी साहित्य में एक अनमोल रत्न माना जा सकता है।
आयोजित भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में कथा वाचक व्यास नंदा बल्लभ पंत द्वारा प्रस्तुत कर्णप्रिय गायन में जगदीश चंद्र पंत द्वारा ऑर्गन, मयंक उपाध्याय द्वारा पैड, शंकर दत्त जोशी द्वारा तबला तथा दिनेश, विशंभर दत्त जोशी व पीताम्बर दत्त जोशी द्वारा गायन में प्रभावी व प्रभावशाली संगत की गई।
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