उत्तराखंडी प्रवासी संस्थाओं द्वारा शास्त्रीय गायिका प.मीरा गैरोला को श्रद्धाजंलि

सी एम पपनैं
नई दिल्ली। उत्तराखंड की सु-विख्यात शास्त्रीय गायिका व संगीत स्व.मीरा गैरोला की पावन स्मृति मे सार्वभौमिक संस्था, गढ़वाल हितैषिणी सभा, गढ़वाल आध्यात्मिक प्रतिष्ठान तथा टिहरी उत्तरकाशी विकास परिषद द्वारा 15 नवंबर की सायं गढ़वाल भवन मे ‘श्रद्धाजंलि’ व ‘काव्यांजलि’ सभा का आयोजन किया गया।
आयोजक संस्था पदाधिकारियों मोहब्बत सिंह राणा, रमेश घिंडियाल, अजय सिंह बिष्ट तथा ब्रह्मानंद कबड़ियाल द्वारा दीप प्रज्वलन कर प.मीरा गैरोला के चित्र पर गुलाब की पंखुड़ियां अर्पित कर भावभीनि श्रद्धाजंलि अर्पित की गई।
इस अवसर पर दिल्ली प्रवास मे स्थापित अन्य प्रमुख संस्थाओं पर्वतीय कला केंद्र के दिवान सिंह बजेली, चंद्र मोहन पपनैं, डॉ पुष्पा बग्गा, देवभूमि उत्तराखंड कल्याण परिषद के सतीश शर्मा, उत्तराखंड फिल्म एवं नाट्य संस्थान की संयोगिता ध्यानी, महेंद्र रावत, विजय लक्ष्मी भट्ट, हरेंद्र सिंह रावत, पर्वतीय लोक कला मंच के कृपाल सिंह रावत, पुष्पा जोशी, लक्ष्मी रावत दि हाई हिलर्स ग्रुप की सुशीला रावत, खुशहाल सिंह बिष्ट, डॉ सतीश कालेश्वरी, रमेश ठंगरियाल इत्यादि के साथ-साथ सांस्कृतिक व सामाजिक संस्थाओं से जुड़े संस्था प्रतिनिधियों तथा उत्तराखंड के साहित्यकारो, पत्रकारो, रंगकर्मियों व समाज सेवी प्रबुद्ध जनो मे चारु तिवारी, सतेंद्र सिंह रावत, राजू बोरा, राकेश गौड, गिरधारी रावत, प्रेमा धोनी, अनिल पंत के साथ-साथ अन्य बड़ी संख्या मे प्रबुद्ध जनो ने श्रद्धाजंलि सभा मे पहुच कर भावभीनि श्रद्धाजंलि अर्पित की।
स्व.मीरा गैरोला की बेटी संस्कृति गैरोला ने अपनी माँ की राह पर चल कर धैर्य व विशाल ह्रदय रख श्रद्धाजंलि सभा मे वंदना व  भजन गायन कर माँ को सच्ची श्रद्धाजंलि अर्पित की-
ईश्वर तुम ही कृपा करो, तुम बिन हमारा कोन है।…जग को रचाने वाला तू, दुःख को मिटाने वाला तू। बिगड़ी बनाने वाला तू…माता तू ही पिता…बन्धु तू ही…।
दिल्ली प्रवास मे आयोजित अनेकों सांस्कृतिक आयोजनों के शुभारंभ मे गणेश व सरस्वती वंदना को शास्त्रीय गायन के द्वारा प्रभावशाली व कर्णप्रिय आवाज मे प्रस्तुत करने वाली तथा नजीबाबाद रेडियो स्टेशन से शास्त्रीय गायन करने वाली सु-विख्यात शास्त्रीय गायिका प.मीरा गैरोला का छब्बीस अक्टूबर को किडनी की बीमारी से मात्र पैंतालीस वर्ष की आयु मे निधन हो गया था। सात नवंबर को उनके गृह नगर कर्णप्रयाग मे परिजनों द्वारा उनकी तेरहवी सम्पन्न हुई थी।
श्रद्धाजंलि सभा मे स्व.मीरा गैरोला के निकट संबंधियों व परिचितों मे मंच से दुःख व्यक्त करने वाले प्रमुख वक्ता जनो मे रमेश घिंडियाल, महर्षि महाविद्यालय मे मीरा गैरोला की संगिनी अध्यापिका राधा जी, ब्रह्मानंद कबड़ियाल, मौसी (माँ) प्रभा किरण, राकेश भारद्वाज, मीना कंडवाल तथा स्व.मीरा गैरोला के पति सुरेन्द्र गैरोला मुख्य थे।
व्यक्त किया गया, स्व.मीरा गैरोला अनेकों प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजी गई थी। शास्त्रीय गायन मे ग्वालियर घराने से सबद्ध रही। पौड़ी गढ़वाल के मैठाणी परिवार मे 9अगस्त 1974 को जन्मी मीरा गैरोला की माँ का साया उनकी छोटी उम्र मे ही उठ गया था। माँ के निधन के पश्चात मौसी प्रभा किरन ने उनकी माँ का दायित्व निभाया। विनम्र व सरल व्यक्तित्व की धनी यह गायिका वर्तमान मे महर्षि महाविद्यालय नोएडा मे संगीत अध्यापिका थी। उन्होने दो पुस्तको ‘एक कलाकार की दास्तान’ तथा ‘मीरा’ की रचना की थी।
व्यक्त किया गया, स्व.मीरा गैरोला जीवन की कठिनाइयों को पहचान कर भी संगीत के लिए जीना चाहती थी। जटिलताओं को इस सु-विख्यात गायिका ने अपने ऊपर कभी हावी नही होने दिया। सदैव संघर्ष किया, पर टूटी नही। उनके गीतों मे दर्द झलकता था। वक्ताओ ने कहा, उनके व्यक्तित्व व कृतित्व का अवलोकन कर, उससे प्रेरणा ले, कहा जा सकता है, राग-द्वैष से मुक्त मीरा गैरोला एक दिव्य आत्मा थी।
अवगत कराया गया, स्व.मीरा गैरोला द्वारा संस्कृत मे गाई नंदा राजजात की रिकार्डिंग चंद दिनों पहले ही समाप्त हुई थी। विमोचन होना बाकी था।
श्रद्धाजंलि सभा के इस अवसर पर ‘पहाड़ी सूल’ के संगीत निर्देशक राकेश भारद्वाज द्वारा स्व.मीरा गैरोला के जीवन आधारित निर्मित यादगार स्क्रीन शो ‘म्यारा मन को पंछी आज’ नामक गीत के बोलो मे प्रदर्शित किया गया।
उत्तराखंड के भाषायी कवियों द्वारा ‘काव्यांजलि’ मे भाव विभोर होकर स्व.मीरा गैरोला को काव्य वाचन कर श्रद्धाजंलि अर्पित की गई-
दिनेश ध्यानी-
सुन्दर छा त्यारा गीत, त्यारा भजन। त्यारी बोली स्वर संगीत…।
विजय लक्ष्मी भट्ट-
शब्दो के जाल बुनती रही, अर्थों के भाव जान न पाई।
…मन से मन की बात होती,खुद ही हंसती, खुद ही रोती।
…खट्टे-मीठे अनुभव मेरे सारे,
फिर भी कुछ कह न पाई।
रमेश घिंडियाल-
…फिर कभे एबे फिर…मेरा मन तू बथेली…छो विवश मै हर तरफ से क्ये तू मन की थाह लेली…प्रेम को संदेश देगी…तू मिथे अपनों बडैली..।
धनेश्वरी नैथानी-
मै तो चली अपने साजन की नगरी, कहा रो, डोली सजाऊ…कहा रो, डोली उठाऊ…चुन-चुन कर कलियों से डोली सजा दो, चंपा चमेली की लड़िया लगा दो…रावण की दुनिया से मैं बच न पायी…कहा रो, डोली उठाऊ।
पुरन चन्द्र कांडपाल-
1-तुम राह दिखाते हो, तुम ज्योत जगाते हो।…देर नही की आकर तुमने, ज्ञान का दीप जलाया।
2-चित मे जब… शेरुआ..मनखिया जिंदगी ले कसि छी…सांस उठते ही मनुष्य लै उठि जा, चार घंट बाद मुर्द खाक बन जा…
चंद घंट पैली लाखोंक छी, चंद घंट बाद राख बन जा…।
श्रद्धाजंलि सभा का समापन सार्वभौमिक संस्था के गायक कलाकारों संस्कृति गैरोला, नीमा गुसाई, मधु बेरिया के गाए भजनों व राकेश गुसाई की हारमोनियम तथा आनंद सिंह के तबला वादन की संगत मे गाए भजनों के साथ हुआ।
गाए गए भजनों के बोल थे-
1-दूर चली ग्या मीरा जी तुम…
रातभर तुम्हरा गीत सुणो हम..।
2-जीवन सागर मे जो लेता गहरा गोता है…ये मोती ये फूल, ये सुबह का प्रकाश..।
3-जानकी नाथ सहाय करे जग…।
स्व.मीरा गैरोला के परिजनो द्वारा मासिक ब्रह्मभोज आगामी पच्चीस नवंबर को उनके गृहनगर कर्णप्रयाग मे  सुनिश्चित किया गया है, जिसमे सभी पारिवारिक मित्रो, सहयोगी व प्रशंसको को आमंत्रित किया गया है।
श्रद्धाजंलि सभा का मंच संचालन सार्वभौमिक संस्था संस्थापक अध्यक्ष अजय सिंह बिष्ट द्वारा बखूबी निभाया गया।
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