हम चुनाव आयोग का सम्मान करते है: शर्मा

आनंद शर्मा ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि देश के अंदर आगामी लोकसभा के लिए चुनाव प्रचार तेजी पकड़ रहा है, प्रथम चरण का मतदान पूर्ण हो चुका है और दूसरे चरण के मतदान के लिए कुछ दिन बाकी हैं। इस चुनाव प्रचार के अंदर भारतीय जनता पार्टी व स्वंय प्रधानमंत्री की तरफ से गैर जिम्मेदाराना बयान निरंतर जारी हैं। प्रधानमंत्री ने पहले दिन से शपथ ग्रहण करने के बाद कभी अपने पद की मर्यादा और गरिमा को न समझा और न उसको बनाकर रखा है। प्रधानमंत्री जी सत्य बोलने से परहेज करते हैं और सच्चा वायदा करना, वायदा निभाना, पद की गरिमा रखना, शालीनता से बात करना, इससे उनको कष्ट है। उनका निरंतर प्रयास है कि विरोधी पक्ष को बदनाम किया जाए, अपमानित किया जाए, ये उनकी मानसिकता है और उनकी कार्यशैली भी, जिसको पूरे देश ने देखा है। पांच साल के उनके शासन काल में, शासन तंत्र का दुरुपयोग हुआ है, राजनैतिक विरोधियों पर निशाना लगाने के लिए, यहाँ तक कि मौजूदा चुनाव में भी निरंतर विपक्षी दलों के चाहे वो नेता हैं, और दूसरे प्रतिनिधि हैं, विपक्षी दलों से उत्तर प्रदेश से लेकर बंगाल तक, कर्नाटक तक सरकारी तंत्र का और खासतौर पर इंकम टैक्स का दुरुपयोग किया जा रहा है। पहले कभी भारत के अंदर चुनाव में ऐसी चीज देखने को नहीं मिली कि भारत के चुनाव आयोग को, जो एक संवैधानिक संस्था है, उसे सरकार के राजस्व सचिव को और सीबीडीटी को बुलाकर, तलब करके ये कहना पड़े कि निष्पक्षता होनी चाहिए। अधिकारी उल्टा चुनाव आयोग को डांटते हैं, ये सब चीज पहली बार ही रही हैं। ये स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री, जिनकी महारथ है, लोगों को भ्रमित करना, एक मायाजाल फैलाना, गलत प्रचार करना जैसे उनका अधिकार क्षेत्र है। लेकिन झूठा प्रचार करना, खोखले दावे करना, कई बातों में वो बेजोड़ हैं। उनका व्यक्तित्व ऐसा है, चाहे वो 2014 के बड़े वायदे हों, जिनके कारण एक बड़ी लहर उनके पक्ष में गई, लोगों को गुमराह किया और वायदाखिलाफी के बाद बिना किसी लज्जा के, जवाब नहीं देना, विषय से भटकना और ध्यान भटकाना। क्या कारण है, हमारा प्रश्न है प्रधानमंत्री जी से, कि जो सरकार होती है, उसके पाचं साल का लेखाजोखा देना होता है, पांच साल का हिसाब देना होता है, देश का नौजवान, देश का किसान, देश का गरीब, देश का दलित प्रधानमंत्री जी से ये गुहार कर रहा है, कृपया जो आपने कहा था उसका हमें जवाब दीजिए, आपने क्या किया और क्या नहीं किया और क्यों नहीं किया? आज जयंती है, बाबा साहेब अंबेडकर की, हम उनको जहाँ सम्मान से स्मरण करते है, प्रधानमंत्री को उनकी प्रतिज्ञा के बारे में भी याद दिलाना चाहते हैं। पिछले पांच साल में इस देश के अंदर दलित, शोषित वर्ग के साथ कितना अन्याय हुआ है। प्रधानमंत्री जी हर बात को हल्के तरीके से ले रहे हैं। वो कांग्रेस के न्याय अभियान को भी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उसका भी मजाक उड़ाते हैं। उनके शासनकाल में जो अन्याय हुआ है,जो पूरे देश और दुनिया ने देखा है, जिससे भारत का माथा पूरी दुनिया के सामने झुका है, जो तस्वीरें भारत के बाहर गई हैं, जहाँ लोगो को दिन-दहाड़े मारा गया है, अपमानित किया गया है, मोब लिंचिंग की घटनाएं पूरी दुनिया में विदित हैं। जितना दलितों के अधिकारों पर चोट पहुँची है, कमजोर वर्ग के अधिकारों पर उसका जवाब कौन देगा? प्रधानमंत्री बहस से भाग रहे हैं, हम बड़ी जिम्मेवारी से बात कहना चाहते हैं, कि केवल इश्तिहार लगाने से दमदार नहीं होते, जवाबदेही से ही सच्चाई और दमदारी प्रधानमंत्री की सामने आती है। ऊँची आवाज और शब्दों से नहीं, उनके कर्मों से, उनकी कथनी और करनी में अगर अंतर न हो, तब वो ये तमाम दावे कर सकते हैं, कि एक सच्चा प्रधानमंत्री और ईमानदार प्रधानमंत्री भारतवर्ष में है। परन्तु वास्तविकता उसको नकारती है। जब प्रधानमंत्री तीन चीजों से घिरते हैं, तथ्य, तस्वीर और तारीख, ये तीन चीजें जब प्रधानमंत्री को घेरती हैं, तो प्रधानमंत्री उससे भागते हैं। चाहे वो राफेल का स्कैम देख लें, प्रधानमंत्री का मौन व्रत कब टूटेगा। हमारी चुनौती है उनको, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जी ने भी चुनौती दी है, जिसमें उनको आपत्ति नहीं होनी चाहिए, बहस कर लें। न संसद में प्रधानमंत्री इस विषय पर बोले हैं, क्यों नहीं बोले। जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद ने कहा था कि वन ऑन वन मीटिंग में भारत के प्रधानमंत्री ने मुझसे क्या कहा था, किस कंपनी को दसॉल्ट का पार्टनर बनाने को कहा था, एचएएल को निकालने का, उस मीटिंग के मिनट्स, दोनों सरकारें हैं, प्रधानमंत्री स्टेट विजिट पर थे, दोनों सरकारों के पास इस मीटिंग के मिनट्स हैं, पेरिस में फ्रांस की सरकार के पास और भारत में भारत की सरकार के पास। ये एक इस्टैबलिश्ड प्रोसीजर है, आज तक वो मिनट क्यों नहीं जारी किए? क्या बात थी वो उसके मिनट्स जारी करें। हम आज फिर इस बात को दोहरा रहे हैं, प्रधानमंत्री को कुछ नहीं छिपाना है। कल मिनट वो जारी कर दिए जाएं, फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति ओलांद और भारत के प्रधानमंत्री की बातचीत के क्योंकि आज तक इन्होंने खंडन नहीं किया कि इन्होंने ही पेशकश करी थी जो रिलायंस डिफेंस को, जो कंपनी दस दिन पहले बनी थी, जिस पर भारी कर्जे हैं, दसियों हजार करोड़ के भारत के बैंकों के थे और फ्रांस के अंदर भी एक बहुत बड़ा टैक्स का मसला था, जिसको मैं दोहराना नहीं चाहता। प्रधानमंत्री के पास शायद ये बड़ा काम उनको मिल सकता है, बड़ा प्रोजेक्ट जिसमें वो कामयाब होंगे और शायद दूसरा उनके सामने कोई और कंटेंडर नहीं होगा क्योंकि इसमें इनका कोई मुकाबला नहीं। प्रधानमंत्री जी सब जगह आरोप लगाते हैं, विपक्ष पर भारतीय जनता पार्टी के पास प्रचंड प्रचार तंत्र है और ऐसे साधन हैं, जो आज तक किसी ने नहीं देखे। 2014 के चुनाव में भी बीजेपी के पास बहुत पैसा था। भाजपा के पास आज जो पैसा है विश्व के किसी राजनैतिक दल ने एक नहीं, पांच-पांच चुनाव में भी शायद इतना पैसा खर्चा न किया हो, बड़े अमीर देशों की मैं बात करता हूँ। क्या भाजपा देश की जनता को ये बताएगी कि हजारों करोड़ रुपया, जो वो खर्च कर रहे हैं इस चुनाव में, वो कहाँ से आया? भाजपा को पिछले दो साल में कितने हजार करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड्स मिले और किससे मिले? भाजपा ने राज्यों के चुनाव में और इस चुनाव के अंदर कितने जहाज और हैलिकॉप्टर लिए हैं। 90 प्रतिशत से ज्यादा फिक्स्ड विंग प्लेन्स और हैलिकॉप्टर भाजपा के पास हैं। ये जानकारी सार्वजनिक है। डीजीसीए के पास पूरा रिकॉर्ड है कि कौन सा जहाज और कौन सा हैलिकॉप्टर, उसका कौन इस्तेमाल कर रहा है। हम कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं, क्योंकि ये पारदर्शिता की बात करते हैं, स्वच्छता की बात करते हैं, केवल वातावरण की नहीं, स्वच्छ भारत अभियान की नहीं, राजनैतिक जीवन के अंदर भी स्वच्छता की बात, सिद्धांतो की बात करते हैं, ये जरा खुलासा हो जाए तो बेहतर है। हम चुनाव आयोग का सम्मान करते है, प्रशंसा करते हैं कि उन्होंने अपनी संवैधानिक जिम्मेवारी को समझते हुए नरेन्द्र मोदी के प्रचार तंत्र से एक छोटा सा हिस्सा रोका, जो मोदी जी पर बायोपिक थी, नमो टीवी पर जो इन्हीं का प्रचार चल रहा है।

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