एक समावेशी दृष्टिकोण के साथ जल जीवन मिशन से एक सामाजिक क्रांति की शुरुआत—रतन लाल कटारिया

दिल्ली।जल शक्ति राज्य मंत्री श्री रतन लाल कटारिया ने नागरिक संगठन ब्रिक्स इंटरनेशनल फोरम द्वारा आयोजित एक वेबिनार में बोलते हुए सुरक्षित पेयजल की कमी जैसी सामान्य समस्याओं के समाधान में ब्रिक्स राष्ट्रों की भूमिका पर प्रकाश डाला। श्री कटारिया ने आज दुनिया के सामने मौजूद जल संकट की गंभीरता को रेखांकित करते हुए केपटाउन, दक्षिण अफ्रीका का उदाहरण दिया, जो वर्ष 2017-18 में पहला बड़ा शहर बन गया था जहां पानी खत्म हो गया। उन्होंने ब्राजील का भी उल्लेख किया जहां लगभग 30 लाख की आबादी के पास अभी भी सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता नहीं है। दूसरी ओर रूस में दुनिया की ताजा सतह और भूजल संसाधनों का 1/4 वां हिस्सा है और जो घरेलू उपयोग के लिए अपने लोगों को को 248 एलपीसीडी (प्रति दिन प्रति व्यक्ति लीटर) पानी उपलब्ध कराता है।
श्री कटारिया ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने भूख और गरीबी एवं पानी की कमी जैसे अस्तित्व से जुड़े वैश्विक संकट को बढ़ा दिया है। उन्होंने जल संकट से निपटने के लिए एक-दूसरे के महत्वपूर्ण अनुभव से सीखने पर जोर दिया क्योंकि दुनिया भर में 2.2 अरब लोग अभी भी सुरक्षित पेयजल (डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार) की उपलब्धता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों को सुरक्षित पेयजल प्रदान करना किसी भी सरकार की वह जिम्मेदारी है जिससे वह बच नहीं सकती और सुरक्षित पेयजल का अधिकार संयुक्त राष्ट्र के संकल्प 64/292 में एक मानव अधिकार के रूप में भी निर्दिष्ट है।
उन्होंने उपस्थित गणमान्य लोगों को बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के गतिशील नेतृत्व में, भारत सरकार ने प्रत्येक ग्रामीण परिवार को, निश्चित और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के वास्तविक महत्व को समझते हुए, सभी ग्रामीण परिवारों को 2024 तक पाइप जल आपूर्ति की योजना के दायरे में लाने की महत्वाकांक्षी योजना शुरू की है। अगस्त 2019 में, भारत ने जल जीवन मिशन (जल ही जीवन है) योजना शुरू की, जिसका कुल परिव्यय 3.60 लाख करोड़ रुपये यानी करीब 48 अरब डॉलर है।

इस स्तर की एक योजना भारत के और शायद दुनिया के इतिहास में अभूतपूर्व है। श्री कटारिया ने बताया कि एक से डेढ़ साल की छोटी अवधि में, भारत ने ग्रामीण परिवारों को चार करोड़ से अधिक पाइप जल कनेक्शन प्रदान किए हैं। इस गति से, समय सीमा के भीतर सभी ग्रामीण परिवारों को योजना के दायरे में लाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य पूरा होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन का परिणाम घरों में पाइप जल कनेक्शन पहुंचाने तक सीमित नहीं रह सकता क्योंकि एक समावेशी दृष्टिकोण के साथ हर परिवार को चाहे वह किसी भी जाति, नस्ल, रंग या धर्म का हो, को 55 एलपीसीडी पानी प्रदान कर यह एक सामाजिक क्रांति की शुरुआत कर रहा है। यह महिलाओं के संघर्ष को कम कर रहा है जिन्हें अपने परिवारों के लिए पानी लाने की खातिर लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। वास्तव में गांवों में जल की आपूर्ति बढ़ाने की खातिर योजना बनाने के लिए हर गांव में ग्राम स्तर की समितियों का गठन किया गया। इन समितियों में महिलाओं की 50% भागीदारी सुनिश्चित की गयी। इस कदम से जल प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेने में महिलाएं सशक्त होंगी।
इस मिशन के तहत पाइप, नल, वॉटर पम्प, स्टोरेज टैंक आदि जैसे पानी से जुड़े बुनियादी ढांचे में बड़ा निवेश करना शामिल है। इससे पाइप फिटर्स, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, पम्प ऑपरेटर आदि जैसे दक्ष/अर्ध दक्ष कार्यबल के लिए बड़ी मांग का सृजन होगी। इसलिए इस मिशन में ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण का अवयव शामिल है ताकि वे आजीविका कमा सकें।
श्री कटारिया ने जल जीवन मिशन को सफल बताते हुए कहा कि भारत अपने अनुभव दूसरे विकासशील देशों के साथ बांटने को तैयार है। उन्होंने ब्रिक्स राष्ट्रों से जल क्षेत्र में सरकारी स्तर पर और साथ ही नागरिक संगठनों के स्तर पर आजमाए जा रहे नवोन्मेषी एवं सर्वश्रेष्ठ तरीके साझा करने का आह्वान किया। इससे लोग पानी के उचित इस्तेमाल और जल प्रबंधन के प्रभावी तरीके विकसित करने के लिए जागरुक होंगे। आखिर में, उन्होंने ब्रिक्स को अहम क्षेत्रीय प्रभाव वाला, उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह बताया जो समानता, विश्वास, आपसी समझ के सिद्धांतों पर बना है।
इस वेबिनार में कांगो के माननीय मंत्री प्रोफेसर प्रिंस विलियम मिशिकी, द इंटरनेशनल बिजनेस एक्सेलेरेशन सेंटर, रूस की सह-हसंस्थापक यूलिया बर्ग, ब्रिक्स इंटरनेशनल फोरम की अध्यक्ष पूर्णिमा आनंद, इंटरनेशनल फेडरेशन फोर इंडो-रशियन यूथ क्लब के अध्यक्ष, फेडरल एसोसियेशन फोर इकोनॉमिक डेवलपमेंट एंड फॉरेन ट्रेड, ग्लोबल इकोनॉमिक ट्रेड (जर्मनी) के सलाहकार वोल्कर शाप्के सहित अन्य शामिल हुए। यह जानकारी दी गयी कि वर्तमान में ब्रिक्स मिशनों की पंद्रहवीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। भारत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के 13 वें सम्मेलन का अध्यक्ष देश है और ब्रिक्स देशों को एकजुट करने वाले सामान्य लक्ष्यों के लिए प्रतिबद्ध है।

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