


फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद निर्देशक शंखजीत दे ने दर्शकों के साथ एक संवाद सत्र का नेतृत्व किया। उन्होंने फिल्म निर्माण के दौरान के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि ओडिशा में रामलीला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक गहरा अनुष्ठान है जो कलाकारों और दर्शकों को सामूहिक स्मृतियों और आध्यात्मिक आकांक्षाओं से जोड़ता है। उपस्थित दर्शकों और विद्वानों ने फिल्म की सराहना करते हुए इसे भारतीय प्रदर्शन कला परंपराओं के अन्वेषण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।