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भारत वैश्विक पुनर्बीमा केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर: डीएफएस सचिव एम. नागराजू
Amar sandesh दिल्ली/मुंबई। वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम.नागराजू ने आज मुंबई में आयोजित आईएफएस,आईआरडीएआई जीआईएफटी सिटी वैश्विक पुनर्बीमा शिखर सम्मेलन के तीसरे संस्करण को संबोधित किया। अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए उन्होंने आईएफएस जीआईएफटी सिटी के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की और कहा कि भारत अपने पुनर्बीमा क्षेत्र में परिवर्तनकारी विकास के मुहाने पर खड़ा है।
सचिव ने कहा कि शिखर सम्मेलन का विषय “आज के भारत को जोड़ना, कल के भारत का बीमा करना: भारत विकास रोडमैप” पूरी तरह से “2047 तक सभी के लिए बीमा” के विजन के अनुरूप है। उन्होंने इस सम्मेलन को वित्तीय सेवा क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों को एक मंच पर लाने वाला एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म बताया।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बीमा और पुनर्बीमा भारत को उसके आर्थिक लक्ष्यों की ओर अग्रसर करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, विशेषकर ऐसे समय में जब देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ कर रहा है। उन्होंने कहा कि 1.46 अरब से अधिक आबादी वाला भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत 2026 में अनुमानित 6.6 प्रतिशत वृद्धि के साथ विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
वैश्विक बीमा परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने स्विस री सिग्मा रिपोर्ट (संख्या 02/2025) का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 2024 में मजबूत प्रदर्शन के बाद वैश्विक आर्थिक मंदी और नीतिगत अस्थिरता के कारण वैश्विक बीमा उद्योग में जीवन और गैर-जीवन दोनों खंडों में प्रीमियम वृद्धि की गति धीमी हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2024 में नाममात्र प्रीमियम मात्रा के आधार पर वैश्विक स्तर पर 10वां सबसे बड़ा बीमा बाजार रहा, जिसकी बाजार हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत थी। बीमा पैठ 3.7 प्रतिशत रही, जिसमें जीवन बीमा 2.7 प्रतिशत और गैर-जीवन बीमा 1 प्रतिशत शामिल है, जबकि बीमा घनत्व बढ़कर 97 अमेरिकी डॉलर हो गया, जो भारत में विशाल अप्रयुक्त बाजार क्षमता को दर्शाता है।
सचिव ने कहा कि भारतीय बीमा क्षेत्र, जो वित्तीय प्रणाली का एक अभिन्न अंग है, मृत्यु, संपत्ति और दुर्घटना जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करने के साथ-साथ बचत को प्रोत्साहित करता है तथा अवसंरचना और अन्य दीर्घकालिक परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक पूंजी उपलब्ध कराता है। वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान बीमा क्षेत्र ने 41.84 करोड़ पॉलिसियां जारी कीं, 11.93 लाख करोड़ रुपये का प्रीमियम एकत्र किया, 8.36 लाख करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया और 31 मार्च 2025 तक 74.44 लाख करोड़ रुपये की प्रबंधित संपत्ति दर्ज की। उन्होंने बताया कि भारत का कुल पुनर्बीमा बाजार 2024–25 में 1.12 लाख करोड़ रुपये का रहा।
उन्होंने कहा कि सरकार और बीमा विनियामक ने बीमा की पहुंच और विकास को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत ढांचे और संरचनात्मक सुधारों को सक्षम बनाया है। बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है, पिछले वर्ष एक नए पुनर्बीमाकर्ता का पंजीकरण किया गया है और सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत पॉलिसीधारक शिक्षा एवं संरक्षण कोष के गठन का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही डेटा संरक्षण को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अनुरूप बनाया गया है और आईआरडीएआई की विनियामक शक्तियों को सुदृढ़ किया गया है।
अपने संबोधन के समापन में सचिव ने भारत को वैश्विक पुनर्बीमा केंद्र बनाने की दिशा में आईएफएससीए की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आईएफएससीए अधिनियम, 2019 के तहत जीआईएफटी सिटी आईएफएससी वैश्विक मानकों के अनुरूप कार्य कर रहा है, आईएफएससी बीमा कार्यालयों को विनियमित करता है, विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं को शाखाएं स्थापित करने में सक्षम बनाता है और विनियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप करता है। इसके माध्यम से आईएफएससी, विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड), घरेलू शुल्क क्षेत्र और विदेशी बाजारों में पुनर्बीमा को सुगम बनाया जा रहा है।
सचिव श्री नागराजू ने कहा कि भारत का बीमा और पुनर्बीमा क्षेत्र निरंतर प्रगति के पथ पर है। उन्होंने भारतीय बीमाकर्ताओं और पुनर्बीमाकर्ताओं से जीआईएफटी सिटी के माध्यम से वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने और “2047 तक सभी के लिए बीमा” के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु सभी हितधारकों के साथ मिलकर कार्य करने का आह्वान किया।
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