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गांवों के युवाओं के भविष्य पर ध्यान देने की जरूरत: उपराष्ट्रपति नायडू

नयी दिल्ली, । उप-राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि भारत को गांवों के युवाओं के लिये आजीविका सृजन पर ध्यान देने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने आत्म सम्मान, स्व-रोजगार और विकास अवसरों के महत्व को रेखांकित किया। नायडू ने यह भी सुझाव दिया कि बड़ी कंपनियों को गोद लेने के लिये एक-एक जिला दिया जाना चाहिए और उन्हें लोगों को प्रशिक्षण उपलब्ध कराना चाहिए

उद्योग मंडल सीआईआई और नीति आयोग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने कहा, ‘हमें ग्रामीण युवाओं के लिये आजीविका सृजन पर ध्यान देने की जरूरत है। भारत के लिये इस समय आत्म-सम्मान, स्व-रोजगार तथा विकास महत्वपूर्ण है।’ उन्होंने कहा, ‘गांवों से तब तक पलायन नहीं रोक सकते जब तक शहर जैसी सुविधाएं गांवों में नहीं देते।’ नायडू ने कहा कि शिक्षा सशक्तिकरण के साथ ज्ञानोदय के लिये सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व है।

उन्होंने कहा, ‘हमें भारत की बढ़ती आबादी, रोजगार और आजीविका जरूरतों के हिसाब से नीतियों एवं कार्यक्रमों को अनुकूल बनाना है।’ इस मौके पर ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि रोजगार सृजन सरकार के साथ-साथ उद्योग की सामूहिक जिम्मेदारी होनी चाहिए। सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि भारत को बढ़ती युवा आबादी के उपयोग की जरूरत है। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने कहा कि युवाओं की आकांक्षाएं जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाती।

उन्होंने कहा, ‘हम विभिन्न देशों से मॉडल को ‘कापी-पेस्ट’ नहीं कर सकते। नीति आयोग ऐसे मॉडल पर काम कर रहा है जो भारत के लिये अनूठा होगा और यह सुनिश्चित करेगा कि देश का अंतिम युवा व्यक्ति वह नौकरी प्राप्त करे जिसकी वह आकांक्षा करता है।’

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