अधिक से अधिक डिजिटलीकरण और डेटा मैपिंग टूल ने मौलिक रूप से ईएंडपी परिदृश्य को बदलने में सहायता की है-प्रधान

नई दिल्ली।पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज कहा कि ओपन एक्रेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (ओएएलपी) बाजार के अनुकूल एक नीति है जो ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता ला रही है। वह ओएएलपी बोली के पांचवें राउंड के तहत पेश किए गए 11 तेल और गैस ब्लॉक के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर के मौके पर बोल रहे थे।

श्री प्रधान ने कहा कि ओएएलपी ​बोली चरणों के बाद हेल्प (HELP) व्यवस्था के सफल क्रियान्वयन ने भारत में खोज के क्षेत्रफल में वृद्धि की है। पहले के शासनकाल में खोज का क्षेत्रफल करीब 80,000 वर्ग किलोमीटर था जो ओएएलपी राउंड पांच के तहत ब्लॉक आवंटित किए जाने के बाद अब करीब 2,37,000 वर्ग किमी है।
इसे परिवर्तनकारी नीति करार देते हुए, मंत्री ने कहा कि ओएएलपी ने लालफीताशाही को खत्म कर दिया है और खोज व उत्पादन क्षेत्र में एक लंबी छलांग लगायी है। उन्होंने व्यापार-से-सामान्य दृष्टिकोण से दूर जाने का आह्वान किया और घातांकीय वृद्धि व गति के लिए प्रयास करने को कहा। उन्होंने विजेताओं को नई तकनीक और नए व्यापार मॉडल अपनाने को कहा ताकि इन क्षेत्रों से तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में तेजी लाई जा सके।
प्रौद्योगिकी के बारे में बोलते हुए मंत्री श्री प्रधान ने कहा कि अधिक से अधिक डिजिटलीकरण और डेटा मैपिंग टूल ने मौलिक रूप से ईएंडपी परिदृश्य को बदलने में सहायता की है और प्रौद्योगिकी व अत्याधुनिक डेटा प्रबंधन प्रणालियों को अधिक से अधिक जान फूंकने वाला करार दिया।
श्री प्रधान ने ओएलएपी विजेताओं को केंद्रीय मंत्रालयों और राज्य सरकारों से प्रासंगिक अनुमोदन की सुविधा प्रदान करके उनकी गतिविधियों को पूरा करने के लिए सभी समर्थन की पेशकश की। श्री प्रधान ने कहा कि विजेताओं को इन क्षेत्रों में काम करना चाहिए ताकि अंतरराष्ट्रीय प्लेयर्स को जांच गतिविधियों में लाया जा सके और व्यावसायिक तरीके से व्यवसाय चलाया जा सके। श्री प्रधान ने यह भी सुझाव दिया कि डेटा एकत्र करने और डेटा प्रबंधन के लिए एक स्वतंत्र निकाय की स्थापना की जानी चाहिए ताकि सभी ​बोलीदाताओं को एक सूचित निवेश निर्णय लेने के लिए प्रासंगिक जानकारी तक पहुंच हो सके।
ओएएलपी बोली राउंड पांच के तहत 465 करोड़ रुपए के तत्काल जांच कार्य प्रतिबद्धता के साथ आठ तलछटी घाटियों में कुल 11 ब्लॉकों में 19,789.04 वर्ग किमी के कुल क्षेत्र को आवंटित किया गया। ओएनजीसी को 7 ब्लॉक दिए गए हैं जहां 4 ब्लॉक ऑयल इंडिया लिमिटेड (ओआईएल) को दिए गए हैं।

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