दिल्लीराष्ट्रीय

मोल्यार रिसोर्स फाउंडेशन ने ‘हिमालय गौरव सम्मान’ से प्रतिष्ठित विभूतियों को किया सम्मानित

संस्था के संस्थापक दुर्गा भंडारी के नेतृत्व में हिमालय के सतत विकास पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन

Amar sandesh नई दिल्ली | नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में मोल्यार रिसोर्स फाउंडेशन द्वारा एक भव्य अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का मुख्य विषय “हिमालय में सतत विकास: एक जन-केंद्रित दृष्टिकोण” रहा, जिसमें देश-विदेश से आए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और पर्यावरणविदों ने सहभागिता की।

कार्यक्रम का आयोजन संस्था के संस्थापक दुर्गा भंडारी के मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि हिमालय केवल भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की संस्कृति, आजीविका और पहचान का आधार है। इसके संरक्षण और विकास के लिए स्थानीय समुदायों की भागीदारी अनिवार्य है।

सेमिनार के दौरान वक्ताओं ने हिमालयी क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों, आजीविका के नए अवसरों और सतत विकास की रणनीतियों पर विस्तार से विचार साझा किए।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘हिमालय गौरव सम्मान’ समारोह रहा, जिसमें समाज, शिक्षा, पर्यावरण और पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया प्रो. प्रकाश चंद कंडपाल (यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्प्टन, यूके) को अकादमिक क्षेत्र में उनके दूरदर्शी नेतृत्व और वैश्विक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

प्रो. साबू पद्मदास (यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्प्टन, यूके) को ग्लोबल हेल्थ और शोध के क्षेत्र में उनके अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यों के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।

डॉ. हरपाल सिंह नेगी, वरिष्ठ पर्यावरणविद्, को गढ़वाल हिमालय में सामाजिक परिवर्तन और सतत विकास के लिए किए गए जीवनपर्यंत कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। अशीत कुणाल, एडिटर-इन-चीफ, इंडिया वॉयस, को पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उनकी अनुपस्थिति में यह सम्मान अजय चौहान ने ग्रहण किया। चंदन सिंह नयाल को नैनीताल जनपद में वृक्षारोपण, जल संरक्षण एवं वनाग्नि रोकथाम के लिए किए जा रहे उनके जमीनी प्रयासों के लिए सम्मान प्रदान किया गया।

कार्यक्रम के समापन पर मोल्यार रिसोर्स फाउंडेशन ने यह संकल्प दोहराया कि संस्था भविष्य में भी हिमालयी क्षेत्रों के पर्यावरण, संस्कृति और समाज के संरक्षण हेतु निरंतर कार्य करती रहेगी तथा जन-केंद्रित विकास मॉडल को बढ़ावा देगी।

Share This Post:-

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *