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सेवा, संवेदना और संकल्प का जीवंत उदाहरण है ‘क्षमा नीरा फाउंडेशन

Amar sandesh दिल्ली।आज के समय में जब स्वार्थ और आत्मकेंद्रित सोच समाज में गहराई तक पैठ बना रही है, ऐसे दौर में क्षमा नीरा फाउंडेशन जैसी संस्था मानवता के लिए आशा की किरण बनकर सामने आई है। यह एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो समाज के वंचित, उपेक्षित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में निरंतर समर्पित भाव से कार्य कर रही है।

इस संस्था की अध्यक्ष एवं संस्थापिका श्रीमती नीरा कुमारी (झा) हैं, जो दिल्ली में रहकर पिछले तीन वर्षों से पूरी निष्ठा, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा के साथ समाजसेवा में सक्रिय हैं। वे केवल सेवा की बात नहीं करतीं, बल्कि स्वयं ज़मीनी स्तर पर जाकर पीड़ित, जरूरतमंद और उपेक्षित लोगों के दुख-दर्द को समझती हैं और उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयासरत रहती हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि “शायद एक व्यक्ति के प्रयास से बड़ा परिवर्तन न दिखे, लेकिन जब एक-एक व्यक्ति जुड़ता है, तो बदलाव अवश्य आता है।”

क्षमा नीरा फाउंडेशन छोटे-छोटे कस्बों, बस्तियों और झुग्गियों में जाकर अत्यंत दयनीय परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे परिवारों की सहायता करती है। संस्था द्वारा समय-समय पर जरूरतमंदों को आवश्यक सामग्री का वितरण किया जाता है। हाल ही में संस्था ने 500 से अधिक जरूरतमंद महिलाओं को सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए, जिससे न केवल उनके स्वास्थ्य की रक्षा हुई, बल्कि सामाजिक जागरूकता को भी बल मिला।

ठंड के मौसम में जब सड़कों और झुग्गियों में रहने वाले बुजुर्ग ठिठुरते हैं, जिनके अपने ही बच्चे उन्हें बोझ समझकर त्याग देते हैं, ऐसे असहाय वृद्ध माता-पिता के लिए संस्था द्वारा कंबल और भोजन की व्यवस्था की जाती है। यह कार्य केवल सहायता नहीं, बल्कि मानवता और करुणा का जीवंत उदाहरण है।

क्षमा नीरा फाउंडेशन का एक सक्रिय यूट्यूब चैनल भी है, जिसके माध्यम से संस्था अपने द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की तस्वीरें और वीडियो साझा करती है, ताकि अधिक से अधिक लोग इस सेवा यात्रा से जुड़ सकें और समाज में सकारात्मक संदेश प्रसारित हो।

संस्था का एक प्रमुख उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना भी है। इसके अंतर्गत विभिन्न वर्गों के बच्चों को नाट्य कला के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, बुजुर्गों का सम्मान, मानवता, नैतिक मूल्य और सामाजिक जिम्मेदारियों का पाठ पढ़ाया जाता है। इन नाटिकाओं के माध्यम से बच्चों में भावनात्मक अभिव्यक्ति के साथ-साथ संयम, आत्मविश्वास, आत्मीयता, देशभक्ति और दयालुता जैसे मानवीय गुण विकसित किए जाते हैं।

छोटे कस्बों और साधारण पृष्ठभूमि से आए बच्चों को बड़े मंच के लिए तैयार करने का यह प्रयास भविष्य में राष्ट्र को संवेदनशील, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक प्रदान करेगा। यही बच्चे आगे चलकर देश के भविष्य निर्माता बनेंगे—इस विश्वास के साथ संस्था निरंतर कार्य कर रही है।

संस्थापिका नीरा झा का जीवन स्वयं सेवा, सादगी और समर्पण का उदाहरण है। वे अत्यंत सहज, कर्मठ और आम जनमानस के दुख-दर्द से जुड़ी हुई हैं। उनका मानना है कि संस्था का उद्देश्य उन स्थानों तक पहुंचना है, जहां सेवा और सहयोग की सबसे अधिक आवश्यकता है। वे समय-समय पर अन्य सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से भी अपने सेवा-संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास करती रहती हैं।

क्षमा नीरा फाउंडेशन का लक्ष्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और मानवता की सेवा करना है। संस्था समाज के प्रत्येक संवेदनशील नागरिक से अपील करती है कि वे इस पुण्य कार्य में सहयोग कर वंचितों के जीवन में आशा की एक किरण बनें। आपका छोटा-सा सहयोग किसी के लिए बड़ा सहारा बन सकता है।

सेवा, समर्पण और संवेदना के इसी संकल्प के साथ क्षमा नीरा फाउंडेशन निरंतर समाज-सेवा के मार्ग पर अग्रसर है और यह सिद्ध कर रही है कि यदि नीयत साफ हो, तो सीमित साधनों में भी असीम मानवता का कार्य किया जा सकता है।

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