Post Views: 0
वैश्विक ऊर्जा बदलाव का केंद्र बना भारत: इंडिया एनर्जी वीक 2026 में LNG, गैस और बिजली पर निर्णायक मंथन
Amar sandesh दिल्ली/गोवा | इंडिया एनर्जी वीक 2026 के दूसरे दिन भारत के ऊर्जा भविष्य को आकार देने वाले अहम स्तंभोंएलएनजी की वहनीयता, सुदृढ़ सिटी गैस वितरण (सीजीडी) नेटवर्क, व्यापक विद्युतिकरण तथा दीर्घकालिक ऊर्जा मांग पर गहन मंथन हुआ। उच्चस्तरीय नेतृत्व पैनलों और चर्चाओं में उद्योग जगत के अग्रणी नेताओं और नीति-निर्माताओं ने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करते हुए समन्वित नीति, निवेश और तकनीकी नवाचार की आवश्यकता पर बल दिया।
“वैश्विक एलएनजी आपूर्ति एवं मांग गतिशीलता प्रबंधन” विषयक नेतृत्व पैनल में पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अक्षय कुमार सिंह ने कहा कि भारत में प्राकृतिक गैस के व्यापक उपयोग के लिए वहनीयता सबसे अहम कारक है। उन्होंने बताया कि परिवहन, विद्युत उत्पादन और सिटी गैस वितरण क्षेत्रों में नए उपभोक्ताओं को जोड़ने तथा स्थिर दीर्घकालिक मांग सुनिश्चित करने के लिए एलएनजी की कीमतें 6–7 अमेरिकी डॉलर प्रति एमएमबीटीयू के दायरे में होना आवश्यक है।
दिन के दूसरे सत्र में “सिटी गैस वितरण नेटवर्क के वैश्विक मॉडल” विषयक नेतृत्व पैनल में गेल गैस लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी गौतम चक्रवर्ती ने पाइपलाइन कनेक्टिविटी, नेटवर्क के विस्तार तथा ट्रंक और शहर-स्तरीय योजनाओं के समन्वय को परिचालन दक्षता, विश्वसनीयता और वहनीयता के लिए अनिवार्य बताया।
इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिलेश गुप्ता ने परिपक्व सीजीडी बाजारों के अनुभव साझा करते हुए पीएनजी और सीएनजी के विस्तार, उच्च सुरक्षा मानकों और उपभोक्ता विश्वास को सतत अपनाने का आधार बताया। वहीं अडानी टोटल गैस लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेश मंगलानी ने नीति-निर्माताओं और उद्योग के बीच समन्वित संदेश की आवश्यकता पर जोर देते हुए “प्रज्ज्वला मॉडल” की तर्ज पर स्वच्छ ईंधन तक पहुंच से आगे बढ़कर उसके निरंतर उपयोग को प्रोत्साहित करने का सुझाव दिया।
ओपेक के अनुसंधान प्रभाग के ऊर्जा अध्ययन विभाग प्रमुख डॉ. अब्देरेज्जाक बेनयूसुफ ने “वर्ल्ड ऑयल आउटलुक 2025” पर प्रस्तुति देते हुए भारत को 2050 तक वैश्विक ऊर्जा मांग वृद्धि का सबसे बड़ा योगदानकर्ता बताया। रिपोर्ट के अनुसार भारत 2050 तक प्रतिदिन 8.2 मिलियन बैरल तेल मांग जोड़ेगा, जो परिवहन, औद्योगिक गतिविधियों और पेट्रोकेमिकल्स से प्रेरित होगी। प्राथमिक ऊर्जा मांग लगभग दोगुनी होने का अनुमान है, जिसमें तेल, गैस और नवीकरणीय ऊर्जा एक संतुलित ऊर्जा मिश्रण के रूप में एक-दूसरे की पूरक होंगी।
रिपोर्ट में वैश्विक आर्थिक वृद्धि, जनसांख्यिकीय रुझानों और ऊर्जा खपत में भारत की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए अपस्ट्रीम, मिडस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम अवसंरचना में सतत निवेश की आवश्यकता बताई गई।
“इलेक्ट्रोस्टेट की ओर संक्रमण” विषयक नेतृत्व पैनल में बिजली को भारत की आर्थिक वृद्धि, ऊर्जा सुरक्षा और डीकार्बोनाइजेशन प्रयासों का केंद्र बताया गया। पैनल में संयुक्त अरब अमीरात के महामहिम अहमद अल काबी, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के नवीन श्रीवास्तव, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के घनश्याम प्रसाद, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की सुश्री सुमन चंद्रा तथा आरईसी लिमिटेड के श्री प्रिंस धवन शामिल रहे।
चर्चा में विद्युतिकरण, ग्रिड विस्तार और डिजिटलाइजेशन को स्वच्छ और लचीली ऊर्जा प्रणाली के लिए महत्वपूर्ण सक्षमकर्ता बताया गया।
महामहिम अहमद अल काबी ने साझेदारी, नवाचार और विकेंद्रीकृत ऊर्जा प्रणालियों के माध्यम से ग्रिड लचीलापन बढ़ाने पर जोर दिया। वहीं श्री प्रिंस धवन ने पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत वितरण क्षेत्र में हो रहे परिवर्तन का उल्लेख करते हुए बताया कि परिणाम-आधारित निवेश, स्मार्ट मीटरिंग और शासन सुधार डिस्कॉम की परिचालन एवं वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ कर रहे हैं, जिससे स्मार्ट और अधिक resilient ग्रिड का निर्माण संभव हो रहा है।
इंडिया एनर्जी वीक देश का प्रमुख वैश्विक ऊर्जा मंच है, जो सुरक्षित, सतत और वहनीय ऊर्जा भविष्य की दिशा में प्रगति को तेज करने के लिए सरकार, उद्योग और नवाचार जगत को एक साथ लाता है। एक तटस्थ अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में यह निवेश, नीति समन्वय और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देते हुए वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Like this:
Like Loading...
Related