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भरतनाट्यम की एकल प्रस्तुति से देवभूमि का बढ़ाया मान
Amar sandesh हल्द्वानी। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त 52वें खजुराहो नृत्य महोत्सव (राष्ट्रीय बाल नृत्य महोत्सव) में उत्तराखंड की बाल नृत्यांगना स्वस्तिका जोशी ने भरतनाट्यम की प्रभावशाली एकल प्रस्तुति देकर देवभूमि का गौरव बढ़ाया। मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रतिष्ठित मंच पर प्रस्तुति हेतु आमंत्रित स्वस्तिका ने ‘भो शंभो’ रचना पर अपनी मनमोहक अभिव्यक्ति से दर्शकों और कला समीक्षकों की सराहना प्राप्त की।
दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम को उत्तराखंड में नई पहचान दिलाने वाली स्वस्तिका ने मात्र 12 वर्ष की आयु में देश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। खजुराहो जैसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के मंच पर प्रस्तुति देना उनके लिए “स्वप्न के साकार होने” जैसा रहा।
‘भो शंभो’ की इस प्रस्तुति का संगीत संयोजन स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा किया गया, नृत्य निर्देशन गुरु शुभम् खोवाल का रहा तथा संगीत मार्गदर्शन भरतनाट्यम के प्रसिद्ध गुरु दीपक मजूमदार से प्राप्त हुआ।
प्रस्तुति के उपरांत स्वस्तिका को उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत कला अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर, उपनिदेशक शेखर कलावतकर तथा भरतनाट्यम नृत्यांगना मंजू मणि हटवाने द्वारा पुष्पगुच्छ एवं प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
उल्लेखनीय है कि स्वस्तिका पिछले छह वर्षों से गुरु शुभम् खोवाल से भरतनाट्यम की विधिवत शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। वह हल्द्वानी स्थित सेंट थेरेसा स्कूल की कक्षा 7 की छात्रा हैं।
छह दिनों तक चले इस राष्ट्रीय बाल नृत्य महोत्सव में महाराष्ट्र, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु, दिल्ली, केरल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मणिपुर, उत्तराखंड, हरियाणा, गोवा और पांडिचेरी सहित विभिन्न राज्यों के 31 बाल नृत्यांगनाओं ने कथक, भरतनाट्यम, ओडिसी, कुचिपुड़ी, मोहिनीअट्टम, मणिपुरी आदि शास्त्रीय नृत्यों की एकल प्रस्तुतियां दीं।
इस उपलब्धि पर सेंट थेरेसा स्कूल के प्रिंसिपल फादर राजेश, फादर रॉयल एंथनी, अकादमी के निदेशक प्रकाश सिंह ठाकुर, उपनिदेशक शेखर कलावतकर, मंजू मणि हटवाने सहित अजय गुप्ता, जहूर आलम, एल.डी. जोशी, गोपाल जोशी, जगमोहन परगाई, किरण पंत, दीपा काण्डपाल, रेनू नेगी, अमृत कुमार और पंकज आर्या समेत अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने स्वस्तिका को शुभकामनाएं एवं बधाई दी।
स्वस्तिका की इस उपलब्धि ने न केवल हल्द्वानी बल्कि समूचे उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।
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