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अमर चंद्र
नई दिल्ली।उत्तराखंड के मान सम्मान, सामाजिक चेतना और संघर्ष की पहचान रहा गढ़वाल हितैषिणी सभा (पंजी.) दिल्ली का लगभग सौ वर्ष पुराना गढ़वाल भवन हमेशा से उत्तराखंड की सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। राज्य निर्माण आंदोलन से लेकर आज तक, यह भवन उत्तराखंड की समस्याओं को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने में एक सेतु की भूमिका निभाता रहा है।
इसी संघर्षशील परंपरा के तहत उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने और मामले की सीबीआई जांच की मांग को प्रबल रूप से उठाने के लिए गढ़वाल हितैषिणी सभा द्वारा आगामी
रविवार, 11 जनवरी को सायंकाल 6:00 बजेगढ़वाल भवन, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली चौक, पंचकुइयाँ रोड, नई दिल्लीमें कैंडल मार्च का आयोजन किया जा रहा है।
सभा के अध्यक्ष सूरत सिंह रावत एवं महासचिव पवन मैठानी ने संयुक्त रूप से बताया कि अंकिता भंडारी प्रकरण केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के स्वाभिमान और बेटियों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। उन्होंने कहा कि घटना के इतने समय बाद भी न्याय न मिलना और जांच को लेकर सरकार की चुप्पी समाज की अंतरात्मा को झकझोर रही है।
उन्होंने कहा कि गढ़वाल भवन हमेशा से अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का केंद्र रहा है और आगे भी रहेगा। यह कैंडल मार्च एक शांतिपूर्ण लेकिन सशक्त संदेश होगा कि उत्तराखंड की बेटी के साथ हुए अन्याय को किसी भी कीमत पर भुलाया नहीं जाएगा।
गढ़वाल हितैषिणी सभा की पूरी कार्यकारिणी ने दिल्ली-एनसीआर में निवास कर रहे उत्तराखंड मूल के सभी लोगों, सामाजिक संगठनों, युवाओं, महिलाओं एवं बुद्धिजीवियों से इस कैंडल मार्च में शामिल होकर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की अपील की है। सभा का कहना है कि जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा
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