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₹84,084 करोड़ की राष्ट्रीय योजना को कैबिनेट की मंजूरी, 2031 तक गहरे समुद्र में 60 कुओं की खुदाई; ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया आधार
Amar sandesh नई दिल्ली । भारत ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐसा ऐतिहासिक कदम उठाया है, जिसे आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक और रणनीतिक शक्ति का नया आधार माना जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना “समुद्र मंथन” को मंजूरी देकर स्पष्ट संकेत दे दिया है कि अब भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए केवल वैश्विक बाजारों पर निर्भर रहने वाला देश नहीं, बल्कि अपने समुद्री संसाधनों की ताकत से भविष्य गढ़ने वाला राष्ट्र बनेगा।
₹84,084 करोड़ की यह महत्वाकांक्षी योजना केवल सरकारी निवेश नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्वावलंबन और रणनीतिक क्षमता का दीर्घकालिक रोडमैप है। वर्ष 2031 तक चलने वाले इस मिशन के तहत गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक के माध्यम से बड़े पैमाने पर तेल एवं प्राकृतिक गैस की खोज की जाएगी।
आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल उपभोक्ता है और हर वर्ष लगभग 13 लाख करोड़ रुपये का कच्चा तेल आयात करता है। बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक हालात ने यह साबित कर दिया है कि ऊर्जा संसाधनों पर आत्मनिर्भरता अब केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण प्रश्न है।
इसी सोच को मूर्त रूप देने के लिए मोदी सरकार ने वर्ष 2014 के बाद ऊर्जा क्षेत्र में व्यापक सुधार किए। पहले जहां भारत के अधिकांश अपतटीय क्षेत्र अन्वेषण से बाहर थे, वहीं अब देश के लगभग 99 प्रतिशत विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) को अन्वेषण के लिए खोल दिया गया है। नई संविदा व्यवस्था, आधुनिक कानून, पारदर्शी नीतियां और निवेश-अनुकूल वातावरण ने इस क्षेत्र में नए अवसरों के द्वार खोल दिए हैं।
‘समुद्र मंथन’ योजना के अंतर्गत सरकार 60 गहरे समुद्री अन्वेषण कुओं की खुदाई को प्रोत्साहित करेगी तथा प्रत्येक पात्र परियोजना को लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम ₹675 करोड़ प्रति कुआं तक वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। इससे जोखिम कम होगा और निजी तथा सार्वजनिक निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद है।
इस राष्ट्रीय मिशन का केंद्र कृष्णा-गोदावरी, कावेरी, महानदी और अंडमान जैसे गहरे समुद्री बेसिन होंगे, जहां भविष्य के विशाल हाइड्रोकार्बन भंडार मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है। सरकार का मानना है कि बेहतर भूकंपीय आंकड़ों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण, साझा अपतटीय अवसंरचना और स्वदेशी तकनीकी विकास के माध्यम से भारत वैश्विक स्तर पर गहरे समुद्री अन्वेषण में नई पहचान स्थापित करेगा।
योजना के तहत ₹28,534 करोड़ आधुनिक भूकंपीय सर्वेक्षण एवं डेटा संकलन पर, ₹43,200 करोड़ गहरे समुद्री अन्वेषण पर, ₹10,000 करोड़ साझा अपतटीय अवसंरचना के विकास पर तथा ₹2,000 करोड़ तेल एवं गैस उपकरणों के स्वदेशी विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के विकास पर खर्च किए जाएंगे।
सरकार का अनुमान है कि इस मिशन की सफलता के बाद भारत का घरेलू तेल एवं गैस उत्पादन 62 एमएमटीओई से बढ़कर 80 एमएमटीओई प्रति वर्ष तक पहुंच सकता है। इससे हर वर्ष कच्चे तेल के आयात पर होने वाले खर्च में लगभग ₹1 लाख करोड़ तक की कमी आने की संभावना है।यह उपलब्धि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार, ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास तीनों को नई मजबूती प्रदान करेगी।
अमर संदेश विश्लेषण
‘समुद्र मंथन’ केवल एक योजना नहीं, बल्कि भारत के ऊर्जा इतिहास में एक निर्णायक मोड़ है। यह मिशन उस नए भारत की परिकल्पना को साकार करता है, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के समाधान स्वयं खोजने का सामर्थ्य रखता है। यदि यह अभियान अपने निर्धारित लक्ष्यों तक पहुंचता है तो आने वाले दशक में भारत न केवल ऊर्जा आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा मानचित्र पर एक अधिक सशक्त, आत्मनिर्भर और निर्णायक राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा।
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