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कुमांऊनी, गढ़वाली एवं जौनसारी भाषा अकादमी द्वारा आयोजित पहला राष्ट्रीय कवि सम्मेलन सम्पन्न

सी एम पपनैं

नई दिल्ली। देश के 71वे गणतंत्र दिवस के उपलक्ष मे, दिल्ली सरकार द्वारा 2019 मे स्थापित कुमांऊनी, गढ़वाली एवं जौनसारी भाषा अकादमी के सौजन्य से, 20 जनवरी को, आईटीओ स्थित हिंदी भवन मे, उत्तराखंड की बोली-भाषा के पहले राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। दिल्ली सरकार के उप-मुख्यमंत्री व भाषा अकादमी अध्यक्ष मनीष सिसोदिया, अकादमी सचिव डा.जीतराम भट्ट व भाषा अकादमी उपाध्यक्ष, मनवर सिंह रावत की उपस्थिति मे, आयोजित कवि सम्मेलन सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ।

दिल्ली मे प्रवासरत उत्तराखंड के प्रबुद्ध अधिकारियों, साहित्यकारों, पत्रकारों, रंगकर्मियो, समाज सेवियो व सांस्कृतिक संस्थाओ से जुडे प्रबुद्ध जनो मे, रि.ले.जनरल ए एस रावत, वी एन शर्मा, पवन मैठाणी, वासवानंद ढोंडियाल, संदीप शर्मा दरमोडा, नरेंद्र रोथाण, संयोगिता ध्यानी, पूजा बडोला, कुसुम चौहान, मधु बेरिया, बृज मोहन उप्रेती ‘बिट्टू’, नरेंद्र सिंह नेगी, निगम पार्षद गीता रावत, रमेश घिन्डियाल, सुशीला रावत, खुशाल सिंह बिष्ट, इत्यादि आयोजन मे मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

कवि सम्मेलन का श्रीगणेश अकादमी पदाधिकारियों व आमन्त्रित कवियों डा.पृथ्वीसिंह केदारखंडी, डा.दमयन्ती शर्मा, पूरन चंद्र कांडपाल, दिनेश ध्यानी, खजान चंद्र शर्मा, मदन डुकलान व रमेश हितैषी के कर कमलो दीप प्रज्वलन की रश्म अदायगी तथा वृन्दगान का प्रस्तुतिकरण कर, किया गया।

उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा सभी आमन्त्रित कवियों को सम्मान स्वरूप पुष्पगुच्छ भेट कर, व्यक्त किया गया, उत्तराखंड की लोक बोली-भाषा के कवि, मध्य हिमालय उत्तराखण्ड की लोकसंस्कृति के ध्वज वाहक हैं। कोरोना विषाणु संक्रमण ने बडी दुविधा उत्पन्न की है। मेरी आशा है, अगला कवि सम्मेलन, लालकिले की प्राचीर से हो। अकादमी उसी गौरव से लालकिला जाए, जैसे हिंदी, उर्दू कवि सम्मेलन होता है। कवियों के माध्यम से उत्तराखंड की अभावग्रस्त महिलाओ की विपदाओ, समस्याओं व चुनौतियों को राष्ट्रीय फलक पर उठाया जाना चाहिए। नेताओ को सच सुनने की आदत होनी चाहिए। किसानो को लगना चाहिए, उनकी आवाज को लालकिले की प्राचीर तक ले जाया गया। यही सब, सही मायनो मे, गणतंत्र की सच्ची शुभकामनाऐ होंगी।

आमन्त्रित कवियो द्वारा, उत्तराखंड की बोली-भाषा के पहले राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के आयोजन होने व मिले आमन्त्रण पर, दिल्ली सरकार का आभार व्यक्त किया गया। आमन्त्रित कवियों ने व्यक्त किया, पहली बार उत्तराखंड की लोकसंस्कृति व बोली-भाषा का संरक्षण व संवर्धन करने के लिए कोई तो आगे आया। कवियों द्वारा देश के जवानो की बहादुरी का जिक्र कर व्यक्त किया गया, भारत के सैनिकों ने दुनिया को शांति का पैगाम दिया है।

कवि सम्मेलन मे कवियों द्वारा मुख्य रूप से, देशप्रेम, शहीद स्मरण व समसामयिक पृष्ठभूमि से जुडी रचनाओ को, मुखर होकर, प्रस्तुत किया गया। प्रस्तुत रचनाओ ने श्रोताओ को न सिर्फ मंत्रमुग्ध व भाव विभोर किया, मनमोहक मनोरंजन कर, खूब हसाया भी। श्रोताओ द्वारा कवियों की रचनाओ पर तालियो की गड़गड़ाहट कर, प्रसंशा की गई। आयोजित कवि सम्मेलन की सफलता पर गर्व महसूस किया गया।

कुमांऊनी, गढ़वाली एवं जौनसारी भाषा अकादमी सचिव डा.जीतराम भट्ट व अकादमी उपाध्यक्ष एम एस रावत द्वारा अपने सम्बोधन मे, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का सम्मेलन मे उपस्थिति होने व सभी कवियों, अकादमी सदस्यों अन्य साहित्यकारो, पत्रकारों व उत्तराखंड के समाज सेवियो का सम्मेलन मे उपस्थिति होने पर आभार व्यक्त किया गया। आयोजित कवि सम्मेलन का कुशल मंच संचालन डा.एस डी पांडे द्वारा किया गया।

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