गांव वासियों के प्रयास से लुप्त होते कैंडूल मेले को आज विशाल आयोजन किया ग्राम वासियों ने

जगमोहन डांगी सतपुली। देवभूमि उत्तराखंड में हमेशा ही बारामास मेला -खेला कौथिग आयोजन होते रहते है। लेकिन जब कोई सदियां पुराना पौराणिक मेला लुप्त हो गया और उस मेले की इतिहास की जानकारी प्राप्त कर धार्मिक मेले की खोती पहचान को ग्रामीणों ने दी सजीवनी कैंड्डल ग्रामीणों के प्रयास से क़ई वर्षों बाद आयोजन कर विशाल व भब्य बनाया गया यह लुप्त हो रही हमारी संस्कृति को बचाने का प्रयास बहुत सहरानीय एवं अच्छी पहल है। सतपुली से 12 किलोमीटर राज्य राजमार्ग बाड़ीयू के पास मानियारस्यू एवं लंगूर पट्टी के कैंडूल गांव की भूमि पर नयार नदी की छोर पर प्राचीन प्रसिद्ध मांता सावेत्री का मंदिर है। बेशक मंदिर का विशाल सरूप नही बदला हो लेकिन मन्दिर के प्रति क्षेत्र की जनता की अट्टू आस्था है। मान्यताओं में कहा गया की यह पर माता सावेत्री ने यमराज से अपने पति सत्यावान के प्राण वापस ले लिए थे। जानकार बताते है। की यह पर आमस्वा की रात स्वयं द्वीप प्रज्वलित होता है। इस दो दिवसीय दिन और रात के मेला रविबार को मंडाण भजन -क्रीतन आदि आयोजन के साथ सोमबार को कैंडुल गांव ग्रामीण वाद्य यंत्र ढोल दमाऊ के साथ माता का निशान लेकर मन्दिर स्थल पहुंचे गांव के ग्रामीण धनपाल सिंह,दिनेश रावत,संदीप रावत ने बताया की उन्होंने पहली बार इस मेले के लिए गांव की सभी विवाहिता दिशा- ध्याणीयों को भी आमंत्रित किया जिनको क़ई वर्षों बाद मायका आने का अवसर मिला सभी मायके आई बहिनों को पहाड़ी पकवान आरसो के साथ विदाई की उन्होंने बताया यह मेला अगले वर्ष से भब्य आयोजन किया जाएगा जिसमें क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाएगा मेले में श्रद्धालुओ द्वारा मन्दिर में विशाल भण्डारा का आयोजन किया गया मेले में आए सभी श्रद्धालुओं खासकर छोटे -छोटे बच्चों ने गर्मी से राहत पाने नयार नदी में डुबकी लगाकर कर जमकर मेला का आनंद लिया इस अवसर पर क्षेत्र की भारी संख्या में जनता मेले में पहुंचे इस अवसर पर कैंडूल के किंकेश्वर मंन्दिर के महंत आशुतोष महाराज ने मेले में आए सभी श्रद्धालुओं को आशिर्बाद दिया दिखिए हमारे संवाददाता जगमोहन डांगी की ज़ीरो ग्राउंड की यह विशेष रिपोर्ट तो देवभूमि उत्तराखंड में हमेशा ही बारामास मेला खेला कौथिग होते रहते है। लेकिन जब कोई सदियां पुराना पौराणिक मेला लुप्त हो गया और उस मेले की इतिहास की जानकारी प्राप्त कर ग्रामीणों के प्रयास से क़ई वर्षों बाद आयोजन कर विशाल एवं भब्य बनाया जाए तो यह लुप्त हो रही हमारी संस्कृति को बचाने का प्रयास बहुत सहरानीय एवं अच्छी पहल है। सतपुली से 12 किलोमीटर राज्य राजमार्ग बाड़ीयू के पास मानियारस्यू एवं लंगूर पट्टी के कैंडूल गांव की भूमि पर नयार नदी की छोर पर प्राचीन प्रसिद्ध मांता सावेत्री का मंदिर है। बेशक मंदिर का विशाल सरूप नही बदला हो लेकिन मन्दिर के प्रति क्षेत्र की जनता की अट्टू आस्था है। मान्यताओं में कहा गया की यह पर माता सावेत्री ने यमराज से अपने पति सत्यावान के प्राण वापस ले लिए थे। जानकार बताते है। की यह पर आमस्वा की रात स्वयं द्वीप प्रज्वलित होता है। इस दो दिवसीय दिन और रात के मेला रविबार को मंडाण भजन -क्रीतन आदि आयोजन के साथ सोमबार को कैंडुल गांव ग्रामीण वाद्य यंत्र ढोल दमाऊ के साथ माता का निशान लेकर मन्दिर स्थल पहुंचे गांव के ग्रामीण धनपाल सिंह,दिनेश रावत,संदीप रावत ने बताया की उन्होंने पहली बार इस मेले के लिए गांव की सभी विवाहिता दिशा- ध्याणीयों को भी आमंत्रित किया जिनको क़ई वर्षों बाद मायका आने का अवसर मिला सभी मायके आई बहिनों को पहाड़ी पकवान आरसो के साथ विदाई की उन्होंने बताया यह मेला अगले वर्ष से भब्य आयोजन किया जाएगा जिसमें क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का भी सहयोग लिया जाएगा मेले में श्रद्धालुओ द्वारा मन्दिर में विशाल भण्डारा का आयोजन किया गया मेले में आए सभी श्रद्धालुओं खासकर छोटे -छोटे बच्चों ने गर्मी से राहत पाने नयार नदी में डुबकी लगाकर कर जमकर मेला का आनंद लिया इस अवसर पर क्षेत्र की भारी संख्या में जनता मेले में पहुंचे इस अवसर पर कैंडूल के किंकेश्वर मंन्दिर के महंत आशुतोष महाराज ने मेले में आए सभी श्रद्धालुओं को आशिर्बाद दिया दिखिए हमारे संवाददाता जगमोहन डांगी की ज़ीरो ग्राउंड की यह विशेष रिपोर्ट

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