दिल्लीराज्य

दिल्ली के स्कूलों के पाठ्यक्रम में होगा हैप्पीनेस एक विषय : मनीष सिसोदिया

नई दिल्ली, । भारतीय पर परा को बढ़ावा देते दिल्ली सरकार स्कूलों में हैप्पीनेस को विषय के तौर पर पाठ्यक्रम में शामिल करने जा रही है। दरअसल इसे मनोविज्ञानिक पहलू पर विचार करते हुए शुरू किया जा रहा है। दिल्ली के उपमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को शिक्षा विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम ‘शैक्षिक श्रेष्ठता पुरस्कार 2017’ मे छात्र-छात्राओं को त्यागराज स्टेडियम में सम्मानित किया। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री ने अकादमिक श्रेष्ठता स पन्न मेधावी विद्यार्थियों और विद्यालयों के 100 से ज्यादा ग्रुप को सम्मानित किया। मनीष सिसोदिया ने कार्यक्रम के जरिए शिक्षा में बदलाव की बात कही।

दिल्ली के शिक्षा मंत्री और उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आज इसकी घोषणा करते हुए बताया कि दिल्ली सरकार का शिक्षा विभाग जोर-शोर से इसकी तैयारियों में लगा हुआ है। इसके लिए प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों की एक टीम लगातार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस दिशा में हो रहे कार्यक्रमों पर रिसर्च कर रही है। दुनिया के कई ख्यातिप्राप्त अंतरर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों ने स्कूलों में हैप्पीनेस कैरिकुलम पर रिसर्च की है। कई विश्वविद्यालयों ने तो हैप्पीनेस कैरिकुलम को एक नये विभाग के रूप में भी शुरू किया है। दुनिया के कई देशों में स्कूलों में अलग-अलग तरह से ये पाठ्यक्रम लागू भी किया गया है। शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि दिल्ली सरकार विशेषज्ञों से, जिसमें दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षक भी शामिल हैं, इसका पूरा खाका तैयार करवा रही है। यह पाठ्यक्रम पूरी तरह गतिविधियों पर आधारित होगा और इसकी कोई औपचारिक लिखित परीक्षा नहीं होगी। लेकिन अन्य विषयों की तरह समय-समय पर इसका मूल्यांकन हर एक बच्चे की हैप्पीनेस इंडेक्स के माध्यम से किया जाएगा।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि जिस समय हमारे पड़ोसी देश भूटान में सरकार सभी नागरिकों की हैप्पीनेस इंडेक्स तैयार करती है तो ऐसे में स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों के मस्तिष्क को, विभिन्न शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से, लगातार 10 साल तक खुशनुमा बने रहने का अभ्यास कराकर, न सिर्फ विद्यार्थियों का अपना व्यक्तित्व बदला जा सकता है बल्कि पूरे समाज व देश की दशा और दिशा बदली जा सकती है।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि भारतीय परंपराओं में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार हासिल करना नहीं बल्कि छात्रों को खुशनुमा जिंदगी जीने के लिए तैयार करना रहा है। उन्होंने एक संदर्भ देते हुए बताया कि हजारों साल पुरानी भारतीय शिक्षा परंपरा में गुरुजन या बुजुर्गजन बच्चों को हमेशा ‘खुश रहो’ का ही आशीर्वाद देते आए हैं। यानी कि हर व्यक्ति के लिए ‘खुशनुमा जिंदगी’ जीने की शुभकामना देना हमारी परंपरा का हिस्सा रहा है। ऐसे में हम शिक्षा को तनाव या अवसाद देने वाला कैसे बना सकते हैं। उन्होंने इस पाठ्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि हम हैप्पीनेस के पाठ्यक्रम के माध्यम से बच्चे का मानसिक स्वास्थ्य विकसित करेंगे जो कि उसकी एकेडमिक उपलब्धियों जितना ही महत्वपूर्ण है।

पिछले तीन साल में दिल्ली सरकार द्वारा शिक्षा में किये गये सुधारों में दिल्ली सरकार का पहला महत्वपूर्ण कदम रहा है-सरकारी स्कूल में बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना। इस दिशा में दूसरा कदम रहा है- प्रधानाध्यापकों और अध्यापकों को विश्व की बेहतरीन प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध करना। इन्हीं सुधारों में तीसरा औऱ सबसे महत्वपूर्ण कदम होगा- स्कूलों में हैप्पीनेस कैरिकुलम का लागू होगा। यह एक तरह से शिक्षा के केंद्र बिंदु (न्यूक्लियस) में प्रवेश करने का काम है। यह इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आज दुनिया में जितने लोग ‘आर्थिक कमी’ या ‘आर्थिक असमानता’ के कारण परेशान हैं, उससे कहीं ज्यादा बड़ी संख्या में लोग अवसाद या तनावपूर्ण जीवन जीने के कारण परेशान हैं। इसी वजह से इतना अपराध, भ्रष्टाचार, भेदभाव, हिंसा, शोषण आदि समस्याएं हैं। एक तरफ जब हम दुनिया में आर्थिक समानता की बात कर रहे हैं तो उसी समय हमें खुशहाली की समानता की बात भी करनी पड़ेगी वरना आर्थिक समानता का प्रयास कभी सफल नहीं हो पायेगा।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि शिक्षा में हमने ‘सर्व शिक्षा अभियान’ – जैसे कई प्रयोग किये हैं जिनके माध्यम से हमने साक्षरता और कुछ हद तक रोजगार उपलब्ध कराने या गरीबी दूर करने में सफलता पाई है। लेकिन एक ऐसे समय में जब स्कूलों से हत्या, छेड़छाड़, हिंसा जैसी खबरें हमें चिंतित कर रही हैं तो शिक्षा का पूरा माहौल हैप्पीनेस की शिक्षा की ओर ले जाने की जरूरत है। ये शिक्षा किसी धार्मिक ज्ञान, गुरु ज्ञान या मंत्र पर आधारित नहीं होगी बल्कि विशुद्ध रूप से बच्चों के मनोविज्ञान को समझते हुए वैज्ञानिक तरीके से उनके विचारों, उनकी इच्छाओं, उनकी प्रतिक्रियाओं आदि के अवलोकन के जरिये विभिन्न गतिविधियों द्वारा संचालित होगी. इसके माध्यम से दिल्ली के स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों का एक हैप्पीनेस इंडेक्स स्वत: ही तैयार होता रहेगा। दिल्ली के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को ‘एक्सीलेंस इन एजुकेशन’ सम्मान समारोह में आज शिक्षा मंत्री ने आज ये घोषणा की। उन्होंने उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों से अपील भी की कि वे दिल्ली सरकार के इस नये लेकिन क्रांतिकारी कार्यक्रम में आकर वालेंटियर करें।

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