Amar sandesh कोलकाता। हिंदी साहित्य के समकालीन परिदृश्य में नई पीढ़ी के रचनाकारों की सशक्त उपस्थिति निरंतर दर्ज की जा रही है।इन्हीं उभरते हुए नामों में निधि कुमारी सिंह एक उल्लेखनीय साहित्यकार के रूप में सामने आई हैं, जिन्होंने अपनी सृजनात्मक लेखनी से समाज, संवेदना और यथार्थ को प्रभावशाली अभिव्यक्ति दी है।
1 जनवरी 1999 को बिहार में जन्मी निधि कुमारी सिंह, श्री जलंधर सिंह की सुपुत्री हैं। वर्तमान में वे पश्चिम बंगाल के पनिहाटी, सोदपुर (कोलकाता) में निवास कर रही हैं। प्रारंभ से ही साहित्य के प्रति उनकी गहरी रुचि रही, जिसने उन्हें हिंदी साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय रूप से स्थापित किया।
शैक्षणिक रूप से भी वे अत्यंत सजग और प्रगतिशील हैं। उन्होंने बी.ए., एम.ए. एवं पी.जी.डी.टी. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं तथा वर्तमान में बी.एड. की पढ़ाई कर रही हैं। एक संवेदनशील लेखिका होने के साथ-साथ वे निरंतर अध्ययनशील भी हैं। वे बंगीय हिंदी परिषद, कोलकाता की साधारण सदस्य हैं और नियमित रूप से मासिक कवि गोष्ठियों में भाग लेकर अपनी रचनात्मक उपस्थिति दर्ज कराती हैं।
निधि कुमारी सिंह कविता, कहानी और लघुकथा जैसी विभिन्न विधाओं में सृजन कर रही हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार, मानवीय संवेदनाएँ और समकालीन समस्याओं का सशक्त चित्रण देखने को मिलता है। हिंदी दैनिक ‘छपते छपते’ (कोलकाता) में उनकी 20 से अधिक कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं, वहीं ‘मानस’ पत्रांक में अब तक 9 कविताएँ प्रकाशित हुई हैं। ‘राष्ट्रस्वर’ पत्रिका (पश्चिम बंगाल) में उनकी कविता “एक दलित की पीड़ा” (2023) प्रकाशित हुई, जो सामाजिक विषमता पर गहरी चोट करती है।
‘हिंदी वर्तमान’ पत्रिका में मार्च 2026 तक उनकी 21 लघुकथाएँ एवं कहानियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं। ‘सदीनामा’ पत्रिका के ई-संस्करण में उनकी कविता की समीक्षा प्रकाशित हुई है, साथ ही वे अब तक 92 साहित्यिक समीक्षाएँ भी लिख चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उनकी पहचान बनी है जापान से प्रकाशित पत्रिका “हिंदी की गूंज” में उनकी कविता प्रकाशित हो चुकी है। उनकी 10 कविताएँ विभिन्न कविता संग्रहों में प्रकाशन हेतु स्वीकृत हैं।
संपादन क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय है। वे “माँ जगदम्बे की महिमा” पुस्तक की संपादिका हैं तथा ‘World Record Anthology’ में कविता एवं कहानी के साथ-साथ कंपाइलर के रूप में भी अपनी भूमिका निभा रही हैं।
निधि कुमारी सिंह हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वे ऑनलाइन सेमिनार, काव्य पाठ एवं विभिन्न साहित्यिक मंचों के माध्यम से हिंदी को जन-जन तक पहुँचाने का कार्य कर रही हैं। उनकी सरल और प्रभावशाली भाषा विशेष रूप से युवा वर्ग और ग्रामीण समाज को आकर्षित करती है।
उनकी साहित्यिक यात्रा को विभिन्न पुरस्कारों और सम्मानों से भी मान्यता मिली है। वर्ष 2022 में दुर्गापुर हिंदी भाषा मंच की समन्वय पत्रिका में प्रकाशित कविताओं के लिए प्रोत्साहन पुरस्कार प्राप्त हुआ। वर्ष 2024 एवं 2025 में लघुकथा के लिए तृतीय पुरस्कार से सम्मानित हुईं। आईआईटी खड़गपुर द्वारा आयोजित प्रतियोगिता (2022) में विजेता रहीं तथा 2023 में राष्ट्रीय ऑनलाइन कहानी प्रतियोगिता (सनातन धर्म महिला महाविद्यालय, जींद) में तृतीय स्थान प्राप्त किया।
वर्ष 2024 में पश्चिम बंग साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित लघुकथा उत्सव में उन्हें युवा लघुकथाकार के रूप में आमंत्रित किया गया, वहीं ‘लिटिल थेसपियन’, कोलकाता में वक्ता के रूप में उन्होंने साहित्य और रचनात्मकता पर अपने विचार साझा किए।
निधि कुमारी सिंह एक ऐसी उभरती हुई साहित्यिक प्रतिभा हैं, जो अपनी शिक्षा के साथ-साथ साहित्य साधना में निरंतर संलग्न हैं। उनकी लेखनी में समाज को दिशा देने की क्षमता है और वे हिंदी भाषा के विकास एवं प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। आने वाले समय में वे हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक सशक्त और प्रेरणादायक पहचान स्थापित करेंगी ऐसा विश्वास साहित्य जगत में व्यक्त किया जा रहा है।