भाजपा सरकार ने बेरोजगारी भ्रष्टाचार महंगाई को बढ़ावा दिया —–प्रियंका गांधी

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव श्रीमती गांधी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि
देखिए चुनाव चल रहा है। आपके सामने आकर अनेक नेता, अनेक राजनीतिक दलों के प्रत्याशी भाषण देने आते हैं, आपसे चर्चा करने आते हैं। आज यहाँ खड़े होकर मैं भी आपसे कुछ बातें करने आई हूं।

लेकिन सबसे पहले मैं जानना चाहती हूं कि आपमें से नौजवान कितने हैं, जरा हाथ ऊपर करिए (जनसभा से पूछते हुए श्रीमती प्रियंका गांधी ने कहा) बहुत सारे हैं। अब आपमें से वो हाथ ऊपर करिए जिनको पिछले पांच सालों में रोजगार मिला है? एक भी नहीं, एक भी नहीं है। आपके प्रदेश की समस्याएं क्या हैं, क्या समस्याएं हैं – जब राजनीतिक दल के नेता आपके सामने आकर कहते हैं कि किसी की गर्मी निकालेंगे, क्या ये आपकी समस्या है? जब कहते हैं कि किसी की चर्बी निकालेंगे, क्या ये आपकी समस्या है?  मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि भर्तियां क्यों नहीं निकाल रहे हैं? रोजगार क्यों नहीं दे रहे हैं?
पांच सालों से सरकार में रहे हैं, आप जैसे तमाम बेरोजगार नौजवान इस पूरे प्रदेश में फैले हुए हैं।

आपको समझना चाहिए, सोचिए, ध्यान से सुनिए कि नेता आपके सामने क्या कह रहा है, क्या आपके विकास की बात कर रहा है या अपने विकास की बात कर रहा है? क्या आपकी भलाई की बात कर रहा है या अपनी भलाई की बात कर रहा है? क्या आपको आगे बढ़ाने की बात कर रहा है या अपने आपको आगे बढ़ाने की बात कर रहा है? यहाँ बेरोजगारी चरम पर है। सरकार ने क्या किया – जितने भी पीएसयू थे, तकरीबन सारे के सारे कुछ अपने दोस्तों को सौंप दिए। रोजगार कहाँ से आते हैं –  वहीं से आते हैं। जितने भी छोटे दुकानदार हैं, छोटे व्यापारी हैं, मध्यम व्यापारी हैं, जिनमें से मैं जानती हूं कि आप भी हैं, वहीं से रोजगार बनते हैं। आप रोजगार बनाते हैं। आपके छोटे मैन्युफैक्चरिंग की यूनिट, आपके छोटी दुकान, कुलचे वाले, जो मैन्युफैक्चरिंग करके यूनिट बनवाकर जो एक्सपोर्टर को सामान दिलवाते हैं, जो दुकानों में आप बेचते हैं, वहाँ से रोजगार पैदा होता है। इसके लिए सरकार ने क्या किया? आपको मजबूत बनाने के लिए सरकार ने क्या किया? आपको कमजोर बनाया है।
सबसे पहले नोटबंदी लाए, ठीक है, पुरानी बात है। लेकिन पुरानी बात को समझिए, उससे किसको नुकसान हुआ? जिनके पास कालाधन था, क्या उनका नुकसान हुआ? वो तो फूल रहे हैं, फल रहे हैं। कहाँ आया कालाधन? मैं इस बात को अब फिर से क्यों दोहरा रही हूं क्योंकि ये शुरुआत थी, नोटबंदी शुरुआत थी। आप जैसे लाखों छोटे दुकानदार, जो छोटे-छोटे कारोबार करते हैं, जो छोटे-छोटे यूनिट जलाते हैं, लाखों लोगों की बर्बादी वहाँ से शुरु हुई। नोटबंदी हुई, उसके बाद आप पर गलत जीएसटी थोपा गया। तमाम संकट पैदा किए आपके लिए। फिर कोरोना आया, कोरोना में लॉकडाउन हुआ, किसका नुकसान हुआ – सबसे ज्यादा नुकसान स्मॉल एंड मीडियम बिजनेस, छोटे और मध्यम जो कारोबार थे, उनका हुआ। इससे क्या हुआ देश को, इसी से देश की अर्थव्यवस्था ठप्प हो रही है। इसीलिए रोजगार कम बन रहे हैं। लेकिन भाजपा की सरकार केंद्र में भी है, प्रदेश में भी है, इन्होंने क्या किया आपकी मदद करने के लिए – कुछ नहीं किया। आपको मजबूत बनाने के लिए इतनी भीषण परिस्थितियों से आप गुजर रहे थे, कोरोना आया, लॉकडाउन हुआ। प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी ने मुफ्त में टिकट दिया घर जाने के लिए तमाम श्रमिकों को, तो हम ही ने कोरोना फैलाया।
आप सोच-समझिए, पूरी दुनिया देख रही थी, लाखों श्रमिक बड़े-बड़े शहरों से पैदल चल रहे थे अपने घर तक। कोई बच्ची अपने पिता जी को साइकिल पर बैठा कर 600 किलोमीटर तक बिहार तक गई। एक माँ अपनी गोद में अपने बच्चे को उठाकर 500 किलोमीटर चली। एक माँ का देहांत बिहार के एक रेलवे स्टेशन पर हुआ, बच्चे सामने खड़े थे। माँ को उठाने की कोशिश कर रहे थे, क्या हम सब भूल गए हैं और हमारे प्रधानमंत्री कहते हैं कि हमने उनको मदद करके गलती की। हम पर आरोप लगाते हैं, जब वो अपने घर में बैठे रहे, कभी निकले अपने घर से उस समय, मदद की उन्होंने, ट्रेनों की व्यवस्था की, बसों की व्यवस्था की, किसी एक गरीब की मदद की- नहीं की, क्यों नहीं की? बहनों और भाइयों समझ लीजिए कि क्यों नहीं की, क्योंकि इनकी सरकार किसी गरीब की सरकार नहीं है।
किसानों ने आंदोलन किया। आप सब उसमें शामिल भी हुए होंगे। यहाँ का एक बच्चा शहीद हुआ, मैं उस समय आई थी। कितने किसान शहीद हुए। सरकार क्या कहती है कि शहीदों की सूची ही नहीं है हमारे पास। आप आंदोलन कर रहे थे, आपको बाहर बैठे रहने दिया, सर्दी में आप बैठे, गर्मी में आप बैठे, कुछ भी हुआ, कोरोना हुआ, फिर भी आप बैठे रहे। आप अपने हक को मांग रहे थे, आप अपने हक के लिए आंदोलन कर रहे थे। कोई आपके पास नहीं आया। किसी ने आपकी मदद नहीं की।
छुट्टा पशु चर रहे हैं आपके खेत, कोई मदद नहीं कर रहा है। आपको खाद नहीं मिलता, कोई मदद नहीं करता। गेहूं का दाम नहीं मिल रहा है, चुनाव आया, 50 रुपए बढ़ा दिया। चुनाव आया, डर गए, कानून वापस ले लिए। लेकिन उससे पहले जब चुनाव नहीं था, तब क्या नीयत थी इनकी और वो कानून क्या थे – वो कानून थे, वही कानून थे, जो आप जैसे मेहनती किसानों की जो मेहनत है, वो सब अपने बड़े-बड़े दोस्तों को सौंपने वाले थे। आपकी खेती, आपका खून – पसीना और किसी और को देना चाह रहे थे इसका फायदा और ये बार-बार हो रहा है, बार-बार हो रहा है। चाहे आप रोजगार के मामले में देखें, चाहे आप किसानों के मामले में देखें, चाहे आप किसी भी इशू को उठाकर देखिए, जब अत्याचार होता है महिलाओं पर, किसकी मदद होती है – क्या उस गरीब महिला की होती है? हम जाते हैं, वहाँ आंदोलन करते हैं कि एफआईआर तो लिख लीजिए। एफआईआर भी नहीं लिखी जाती उस महिला के लिए, क्योंकि वो गरीब है और अत्याचार करने वाला सत्ता पक्ष में है। अत्याचार करने वाले के पास पैसे हैं, सत्ता है। ये है सरकार, जो महिलाओं की भी मदद नहीं करते, जब वो गरीब होती हैं। ये पूरी सरकार इसकी नीयत सिर्फ और सिर्फ अमीरों के लिए है।
इनके मंत्री के पुत्र ने 6 किसानों को कुचला, क्या उसने अपना इस्तीफा दिया? हमारे प्रधानमंत्री जी बहुत नेक हैं, सब कहते हैं, बहुत अच्छे हैं, बहुत नेक हैं, तो उन्होंने इस्तीफा क्यों नहीं मांगा? इस्तीफा क्यों नहीं मांगा अपने मंत्री से? क्या देश के प्रति कोई नैतिक जिम्मेदारी नहीं थी उनकी? आज उस लड़के को जमानत मिली है। थोड़े ही दिनों में खुलकर घूमेगा फिर से, जिसने आपको कुचल डाला। इस सरकार ने किसको बचाया, उन किसानों के परिवारों को बचाया? उनकी जो पुलिस थी, प्रशासन था, कहाँ थी वो जब उनको कुचला- कहीं नहीं थी। मैं बताती हूं कहाँ थी – जब हम जैसे लोग वहाँ उनके परिवारों से मिलने जा रहे थे, तो हमें रोकने में लगी थी। तमाम प्रशासन, सारी पुलिस सड़क पर खड़ी थी। बीच रात तक, सुबह 4-4 बजे तक, हम किसका नुकसान करने जा रहे थे? जिसका नुकसान हुआ, उसको तुमने बचाया नहीं। जिसने नुकसान किया, उसका बाप तुम्हारे साथ स्टेज पर खड़ा होता है अब भी।सरकार की एक नैतिक जिम्मेदारी होती है अपने देश के प्रति। उस जिम्मेदारी को निभाना उसका धर्म होता है। हर धर्म से ऊपर होता है वो धर्म और जो नेता, जो प्रधानमंत्री, जो सरकार उस धर्म को निभाना नहीं जानती, उस सरकार को नकारो। समझ लो कि आपके सामने क्या खेल खेला जा रहा है, समझ लो। बहुत समझदार हैं आप, बहुत विवेक है आपमें। उत्तर प्रदेश की जनता से मैंने बहुत सीखा है। सबसे पहले ये सीखा है कि आप जानते हैं कि आपके लिए, आपके हित में कौन काम करता है। तो बहक क्यों रहे हैं? तो जातिवाद और सांप्रदायिकता के भाषणों को सुन-सुन कर, वॉट्सअप को देख-देख कर आप बहक रहे हैं, क्यों बहक रहे हैं? समझ में नहीं आ रहा है आपको कि इससे आपका विकास नहीं हो रहा है, इससे नेताओं का विकास हो रहा है। इससे आप आगे नहीं बढ़ रहे हैं, इससे गिनी-चुनी पार्टियां आगे बढ़ रही हैं और वो पार्टियां क्या कर रही हैं, आपकी सारी संपत्ति अपने दोस्तों को दे रही हैं। समझ लीजिए, ध्यान से सुनिए लोगों के भाषण। पूछिए उनसे कि आपके लिए क्या कर रहे हैं, कोई जवाब नहीं मिल पाएगा उनसे। जो आपको बांट कर, आपका बंटवारा करके आगे बढ़ेंगे, वो कभी आपका विकास नहीं कर सकते, समझ लीजिए इस बात को। सोचिए इनकी क्या-क्या नीतियां हैं।
आपको राशन देते हैं ना, राशन मिलता है, ये परिस्थितियां आ गई हैं कि आज देश में गरीब आदमी को राशन के एक बोरे पर निर्भर कर दिया है। क्या हमेशा ऐसा होता था? जिन 70 सालों की बात करते हैं, क्या 70 सालों में ये हुआ कि आप एक राशन के बोरे पर निर्भर थे या आपके लिए रोजगार बनाए गए, आपको गरीबी रेखा से ऊपर उठाया गया। आपके लिए संस्थाएं बनाई गई, आईआईटी बनीं, आईआईएम बने आपको पढ़ाने के लिए, आपकी शिक्षा के लिए, एम्स बने आपकी सेहत के लिए, सुविधा देने के लिए, विकास हुआ। आज सात साल हो गए हैं इनके राज में, अभी भी 70 सालों की बात कर रहे हैं, क्यों, क्योंकि कुछ कहने का नहीं है, सिर्फ लड़ाने की बात करते हैं, सिर्फ नकारात्मक बातें करते हैं। आपके सामने बताएं तो सही कि किया क्या है इन्होंने?
आपने खुद मुझे दिखाया, एक रोजगार पैदा नहीं किया, रोजगार घटे हैं इनके राज में। क्या आप सबने, मेहनत से, अपने खून पसीने से अपने बच्चों को इसलिए पढ़ाया कि वो बेरोजगार टहलें? क्या इसलिए पढ़ाया आपने? क्या ये बच्चे जब परीक्षाएं देते हैं भर्ती के लिए, तो क्या सालों इंतजार करते रहें? क्या इसलिए परीक्षा देते हैं कि रद्द हो जाए परीक्षा? इसलिए परीक्षा देते हैं कि बाद में कट ऑफ चेंज हो गया, फिर से करिए। क्या इसलिए परीक्षा देते हैं कि माफिया ने उसका पेपर लीक कर दिया? इसलिए फीस भरते हैं आप, इसलिए पढ़ाया करते हैं अपने बच्चों कि बड़े होकर क्या करेंगे, एक-दूसरे से लड़ेंगे क्या, इससे पेट भरेगा क्या? सोचिए, खासतौर से मेरे नौजवान भाइयों और बहनों, सोचिए, आपको गुमराह किया जा रहा है।
कांग्रेस पार्टी आज आपके सामने खड़ी है चुनाव में। 400 जगहों पहली बार 30 सालो में हम 400 के 400 विधानसभा लड़ रहे हैं। हम क्या कह रहे हैं – हम कह रहे हैं नौजवान हो, तुम्हारे लिए हमने ये ‘भर्ती विधान’ बनाया है। हम कैसे रोजगार देंगे, हम कह रहे हैं ना कि 20 लाख रोजगार देंगे, आप पूछो कैसे – हम बताएंगे कैसे। हम कह रहे हैं कि 5 सालों में इन्होंने 12 लाख पद खाली छोड़े हैं, जैसे कि उत्तर प्रदेश में 12 लाख बेरोजगार बच्चे नहीं हैं क्या कि उनको भर सकते थे उन पांच सालों में। आज मंच पर खड़े होकर कह रहे हैं कि रोजगार देंगे। कांग्रेस पार्टी कह रही है कि सबसे पहले वो 12 लाख पद हम भरेंगे, उसके बाद 8 लाख रोजगार हम और पैदा करेंगे। कैसे – आपके हुनर को बढ़ाकर, आपको मौका देकर, एक नौजवान अपना बिजनेस शुरु करना चाहता है। हम उसको 5 लाख रुपए देंगे एक प्रतिशत ब्याज पर। हम कह रहे हैं कि हम आपके लिए शिक्षा के संस्थान बनाएंगे। आपको भर्ती की समस्या है, हम कह रहे हैं कि हमने उसका पूरा खाका तैयार किया है। हर भर्ती का कैलेंडर हम बनाएंगे। हर भर्ती का कैलेंडर होगा, जिसमें लिखा जाएगा कि इम्तिहान किस दिन है, परीक्षा किस दिन है, उसका रिजल्ट कब आएगा और किस दिन भर्ती होगी और वो भर्ती 6 महीनों के बाद नहीं होने देंगे हम। कैसे – कानून बनाएंगे और जो इस बात में दखल देगा, उस पर कार्यवाही करेंगे। हम ठोस बातें कर रहे हैं।
हम कहते हैं कि महिलाओं को आगे बढ़ना चाहिए। महिलाओं के ऊपर हो रहे अत्याचार को हम रोकना चाहते हैं, कैसे रोकेंगे – हम 25 प्रतिशत जो रोजगार, जो भर्तियां पुलिस में होंगी, वो महिलाओं को देंगे, ताकि महिला पुलिस स्टेशन में हो मौजूद। आपके ऊपर अत्याचार हो, आप जाएं, आपको महिला मिले, जो आपके प्रति आपकी समस्या को समझ पाए। महिलाओं की सेहत के लिए हम कह रहे हैं कि जहाँ-जहाँ पीएचसी है, वहाँ हम अलग से महिलाओं के लिए एक कमरा होगा, जहाँ पर महिला डॉक्टर मिलेंगी उनको। अपनी आंगनवाड़ी और आशा बहुओं के लिए हम कह रहे हैं कि आपका मानदेय नहीं बढ़ाया ना इन्होंने पांच सालों से। अब बढ़ाने जा रहे हैं क्योंकि चुनाव आ रहा है। हम कह रहे हैं कि हमारी सरकार लाइए, हम कह रहे हैं कि हम 10,000 रुपए देंगे हर महीने।
किसानों के लिए हम कह रहे हैं, आपने इन सालों में कितना संघर्ष किया है और आपकी कहीं सुनवाई नहीं की। आप दिल्ली में बैठे थे, पूरे साल के लिए बैठे रहे दिल्ली के बॉर्डर पर। वो प्रधानमंत्री जिनके 16,000 करोड़ के दो हवाई जहाज हैं, जो पूरी दुनिया घूमते हैं, जो हर देश में गए हैं, अमेरिका गए हैं, पाकिस्तान तक गए हैं, आपके पास नहीं आ पाए और उनका घर आपके आंदोलन से 10-12 किलोमीटर से ज्यादा दूर नहीं था। आपको क्या-क्या नाम बताए उन्होंने, क्या-क्या नहीं कहा आपको उन्होंने। हम आपको कह रहे हैं कि आपके पूरे के पूरे कर्जे माफ करेंगे। अब आप कहेंगे कि ठीक है, बहुत लोग कहते हैं हमें ऐसी बातें, आप पर क्यों भरोसा करें – क्योंकि छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार आई। मुख्यमंत्री जी ने शपथ ली, तीन घंटे बाद किसानों का कर्ज माफ करना शुरु किया। इसलिए आप भरोसा कर सकते हैं हम पर।
आपके पास आवारा पशु की बहुत बड़ी समस्या है, कोई बात नहीं करता उसके बारे में। कोई उस इशू को उठाना नहीं चाहता है। हम लगातार दो सालों से उठा रहे हैं, लेकिन हम कह रहे हैं कि इसका समाधान है। हमने छत्तीसगढ़ में इसको करके दिखाया है। कैसे – छत्तीसगढ़ में पूरी योजना बनी है कि किस तरह से आपको इस समस्या से छुटकारा मिले। इसमें ये भी है और हम यहाँ भी कह रहे हैं कि आवारा पशु का गोबर दो रुपए में खरीद रहे हैं लोग, तो उससे क्या होता है, सरकार खरीद रही है दो रुपए में। गोबर से फिर वर्मीकम्पोस्टिंग कर रहे हैं, जो स्वयं सहायता समूह है और क्योंकि गोबर खरीदी जा रही है, इसलिए वो आवारा पशु आवारा नहीं रह रहे हैं, लोग उनकी देखभाल कर रहे हैं, रख रहे हैं, क्योंकि उसका कुछ फायदा मिल रहा है उनसे।
तो ये सरकारें जो होती हैं, उनका काम है आपकी समस्याओं को सुलझाना, इस बात को आप समझ लीजिए। समस्या बनाने का काम नहीं है। छोटे दुकानदारों के लिए समस्या बना दी, नोटबंदी कर दी, जीएसटी कर दी, किसानों के लिए समस्या बना दी, नया कानून लाने वाले थे, जिससे जो भी आप काम करते, मेहनत कर रहे हैं आप, फूल रहे हैं, फल रहे हैं उनके बड़े-बड़े उद्योगपति दोस्त। गन्ना का बकाया आपका 14,000 करोड़ है, दो हवाई जहाज उनके 16,000 करोड़ के हैं, क्यों आपके गन्ने का बकाया क्यों नहीं दिया आपको? उन्हीं पैसों से हवाई जहाज में क्यों उड़ रहे हैं ये? तो समझ लीजिए। वो सरकार लाइए अपने प्रदेश में, जिसकी नीयत ठीक है, जिसके हित में आप हो, जो आपके लिए काम करना चाहे। जो आपको आगे बढ़ते हुए देखना चाहे। एक-दूसरे से ल़ड़ता देखना नहीं चाहती हैं। ऐसी सरकार लाइए, जो आप सबको मिलाए, आप सबको मिल-जुलकर रहने का मौका दें, ताकि आप सब आगे बढ़ पाओ।
तो ये सब बाते हैं, मैं सिर्फ आपसे एक आग्रह करना चाहती हूं कि आप सबके घोषणा पत्र पढ़िए, ऑनलाइन मिल जाएंगे। सबके भाषण सुन लीजिए और खुद तुलना करिए कि आपके लिए लड़ा कौन है, आपके लिए खड़ा कौन है, आपके लिए काम कौन करेगा, आपके लिए सही नीति कौन लाएगा, आपका विकास कौन कर रहा है और उसी को वोट दीजिए और मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि जब आप सबकी तुलना करेंगे, तो कांग्रेस पार्टी सबसे ऊपर आएगी।
संजय कपूर यहाँ से चुनाव लड़ रहे हैं, आप इनको अच्छी तरह से जानते हैं। मैं भी इनका भाषण सुन रही थी, इनकी अच्छी छवि है, ईमानदार छवि है और काम करते हैं आपके लिए, इनको मजबूत बनाइए। कांग्रेस पार्टी को जीताइए इस चुनाव में, क्योंकि हमारी जीत से आप जीतेंगे और ये जो राजनीति चल रही है, जो सिर्फ आपको गुमराह करने वाली राजनीति, बड़े-बड़े विज्ञापनें में खूब खुशहाली दिख रही है। मैं घर-घर में जाती हूं और सिर्फ गरीबी दिख रही है, सिर्फ गरीबी, सिर्फ संघर्ष, सिर्फ संकट। ये किसी के घर में नहीं जाते हैं, किसी के संकट में उनके पास नहीं जाते। ना किसानों के पास आए, ना शहीदों के घर गए, ना किसी महिला के घर गए, जिस पर अत्याचार हो रहा था, ना किसी गरीब का हाथ पकड़ कर उन्होंने पूछा कि तुम कैसे हो, तो इनको क्या मालूम। इनको तो खुशहाली ही दिख रही है, लेकिन सच्चाई आप जानते हैं। श्रीमती प्रियंका गांधी ने कहा की मैं इस सच्चाई के आधार पर आपसे वोट मांग रही हूं। इस सच्चाई के आधार पर कह रही हूं कि आप जब वोट डालने जाएंगे, तो सोच समझ कर डालिए। अपने लिए डालिए ये वोट।

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