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बा और बापू विश्व धरोहर हैं: दयानंद वत्स

रुपचंद इंस्टीट्यूट ऑफ फाइन आर्ट अशोक विहार दिल्ली के तत्वावधान. में  बा कस्तूरबा व बापू महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आज अशोक.विहार स्थित रुपचंद इंस्टीट्यूट आफ फाइन आर्ट् परिसर में संस्थान के कलाकारों ने  कस्तूरबा और महात्मा गांधी की यादों को समेटने, उनके व्यक्तित्व को आम लोगों तक पहुंचाने का एक प्रयास रंगों के माध्यम से किया है। ‘बा-बापू 150’ शीर्षक से लगाई गयी  इस प्रदर्शनी का उदघाटन मुख्य अतिथि प्रसिद्ध चित्रकार एवं गाँधी स्मृति एवं दर्शन समिति, संस्कृति मन्त्रालय भारत सरकार में क्यूरेटर पद पर रहीं श्रीमती हेना चक्रबर्ती व प्रसिद्ध शिक्षाविद् दि आर्ट ऑफ गिविंग फाउंडेशन ट्रस्ट के चेयरमेन एवं अखिल भारतीय स्वतन्त्र पत्रकार एंव लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव  दयानंद वत्स के करकमलों द्वारा किया गया। अपने संबोधन में विशिष्ठ अतिथि दयानंद वत्स ने कहा कि महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी दोनों के ही इस वर्ष 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। बा की बापू के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका थी। बा और बापू विश्व धरोहर हैं।
‘बा-बापू 150’ शीर्षक से लगाई गयी प्रदर्शनी में दिल्ली के 18 चित्रकारों  दीपक शर्मा, हरिओम, हर्षवर्धन आर्य, हेना चक्रबर्ती, जय सेठिया, कोमल, महेश कुमार, नीतू गुप्ता, नीलू खन्ना, नीलम बंसल, निधि जैन, राहुल वाही, रूपचन्द, शिवानी गुप्ता, सुनील दत्त ममगाईं, सुनील कुमार, थौकोम थौबा, तृषा डंग के चित्र शामिल हैं ! उल्लेखनीय है कि यह सभी कलाकृतियाँ किंग्सवे केम्प स्थित गाँधी आश्रम में कस्तूरबा गाँधी की 75वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यशाला में बनाई गई थी ! प्रदर्शनी के क्यूरेटर व जानेमाने चित्रकार रूपचन्द ने बताया कि सभी कलाकारों ने रंगों के माध्यम से बा और बापू को अपनी कल्पना शक्ति व रंगों के माध्यम से बखूबी उकेरा है और आमजन को भी गाँधी जी के जीवन की सीख जन जन तक पहुंचे इसी मकसद से इन चित्रों का निर्माण किया है ! यह प्रदर्शनी रूप चन्द इंस्टीट्यूट ऑफ फाईन आर्ट, 23 दीप सेन्ट्रल मार्किट, अशोक विहार, दिल्ली की कला दीर्घा में 30 अक्टूबर 2019 तक देखी जा सकेगी।
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