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भगतदा को मिला पद्म भूषण, उत्तराखंड की मिट्टी हुई गौरवान्वित
अमर चंद्र
दिल्ली/देहरादून। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र व गोवा के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी उर्फ भगतदा के नाम पद्म भूषण सम्मान की घोषणा होते ही पूरे उत्तराखंड सहित देशभर में हर्ष और गर्व का वातावरण बन गया है। यह घोषणा न केवल एक वरिष्ठ राजनेता के सम्मान की है, बल्कि उस जीवन-दर्शन की सार्वजनिक स्वीकृति है, जिसमें सादगी, समभाव, संगठन शक्ति और राष्ट्रसेवा को सर्वोपरि रखा गया।
जनता के बीच ‘भगतदा’ के नाम से लोकप्रिय भगत सिंह कोश्यारी का संपूर्ण जीवन इस बात का उदाहरण है कि सत्ता में रहते हुए भी यदि अहंकार से दूरी और जनता से निकटता बनी रहे, तो नेता जन-जन का अपना बन जाता है। सत्ता में न रहते हुए भी आम लोगों के प्रति उनका आत्मीय भाव हमेशा बना रहा। यही कारण है कि वे उत्तराखंड में सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और साहित्यकारों के बीच समान रूप से आदरणीय माने जाते हैं।
भगतदा के व्यक्तित्व में धर्मराज युधिष्ठिर जैसा समभाव और भीष्म पितामह जैसी मर्यादा स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उनका जीवन कर्मयोग की भावना से ओतप्रोत रहा है। उन्होंने सदैव कर्म को प्राथमिकता दी और फल को ईश्वर पर छोड़ा,गीता के इसी संदेश को उन्होंने अपने आचरण में उतारा।
उत्तराखंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा संगठन को सशक्त बनाने में भगतदा की भूमिका ऐतिहासिक रही है। वे उत्तराखंड भाजपा के पहले प्रदेश अध्यक्ष रहे और बाद में भाजपा संगठन में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का भी निर्वहन किया। उनकी संगठनात्मक क्षमता, ईमानदारी और वैचारिक प्रतिबद्धता आज भी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उत्तराखंड में भाजपा की मजबूत नींव के पीछे उनके वर्षों के परिश्रम और संघर्ष की गहरी छाप स्पष्ट दिखाई देती है।
1942 में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ के वर्ष जन्मे भगत सिंह कोश्यारी ने आगरा विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में एम.ए. की शिक्षा प्राप्त की। वे चाहें तो युवावस्था में ही सरकारी सेवा में जाकर एक सुविधाजनक जीवन चुन सकते थे, लेकिन गरीबों, वंचितों और समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति संवेदनशीलता उन्हें पत्रकारिता, साहित्य, समाज सेवा और राजनीति की ओर ले आई।
‘उत्तरांचल प्रदेश क्यों’ और ‘उत्तरांचल: संघर्ष एवं समाधान’ जैसी उनकी पुस्तकें राज्य के विकास को लेकर उनकी दूरदर्शी और संतुलित सोच की सशक्त अभिव्यक्ति हैं।
महाराष्ट्र के राज्यपाल रहते हुए भगतदा ने राजभवन को लोक भवन का स्वरूप दिया। स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों को समर्पित ‘क्रांति गाथा’ दीर्घा का निर्माण, विश्वविद्यालयों का नियमित दौरा और शिक्षकों-छात्रों से संवाद उनके जनसेवक चरित्र को दर्शाता है।
पद्म भूषण सम्मान की घोषणा के बाद उत्तराखंड के युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उनके मंत्रिमंडल के कई कैबिनेट मंत्री और सांसदों ने भगतदा को सोशल मीडिया के माध्यम से तथा व्यक्तिगत रूप से फोन कर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाइयां दीं। उत्तराखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी इस घोषणा को प्रदेश के लिए गौरव का विषय बताते हुए भगत सिंह कोश्यारी को शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे उत्तराखंड के सामाजिक संगठनों और प्रवासी उत्तराखंडवासियों ने भी सरकार के इस निर्णय का स्वागत किया और भगतदा को व्यक्तिगत रूप से बधाइयां दीं। सभी ने उनके सादगीपूर्ण जीवन, संगठनात्मक क्षमता और राष्ट्र के प्रति समर्पण को इस सम्मान का वास्तविक आधार बताया।
लोकसभा सांसद अनिल बलूनी, गढ़वाल भवन दिल्ली के अध्यक्ष सूरत सिंह रावत, महासचिव पवन मैठानी, समाजसेवी एवं प्रसिद्ध जादूगर डॉ. के.सी. पांडे,CA राजेश्वर पैन्यूली, वरिष्ठ पत्रकार सी एम् पपनै, समाजसेवी चंदन डागी,उधोगपति पी सी नैनवाल, उधोगपति सुरेश चंद पांडे, समाजसेवी खुशहाल सिंह रावत, भाजपा नेता अर्जुन सिंह राणा, उदय मंमगाई राठी, श्रीमती यशोदा घिल्डियाल, दुर्गा सिंह भंडारी,गढ़वाल भवन के पूर्व अध्यक्ष अजय सिंह बिष्ट सहित सामाजिक, पत्रकारिता, फिल्म जगत और समाजसेवा से जुड़े अनेक लोगों ने भी अपने-अपने माध्यमों से शुभकामनाएं संदेश भेजे।
इस अवसर पर अमर संदेश ने भी अपनी विशेष स्टोरी के माध्यम से भगतदा को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाइयां दीं और उनके स्वस्थ, दीर्घायु एवं सक्रिय जीवन की कामना की।
जीवन के चौथे पड़ाव में भी भगतदा राष्ट्र और समाज के लिए चिंतनशील और सक्रिय हैं। देवभूमि उत्तराखंड उनके जैसे सरल, कर्मनिष्ठ और विचारशील नेता पर गर्व करती है। भगवान बदरी-केदार से प्रार्थना है कि उनका मार्गदर्शन आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देता रहे।
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