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समुद्र में फंसी 228 जिंदगियों को बचाने का दिखा दम, भारतीय तटरक्षक बल का SAREX-2026 सफल

Amar sandesh दिल्ली/पारादीप। भारतीय तटरक्षक बल ने ओडिशा के पारादीप तट के पास 12वें राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव अभ्यास SAREX-2026 का सफल आयोजन किया। राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड (NMSARB) के तत्वावधान में आयोजित इस अभ्यास का मुख्य विषय “तकनीक के माध्यम से खोज एवं बचाव की तैयारियों और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना” रहा। अभ्यास में समुद्र में बड़े पैमाने पर राहत एवं बचाव अभियान के दौरान विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल, तकनीकी क्षमता और त्वरित प्रतिक्रिया का प्रदर्शन किया गया।

अभ्यास की समीक्षा भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि, AVSM, PTM, TM ने की। इस दौरान 30 देशों के 32 पर्यवेक्षकों ने भी अभ्यास को देखा। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की मौजूदगी ने समुद्री खोज एवं बचाव के क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका तथा अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूती देने का संदेश दिया।

अभ्यास में भारतीय तटरक्षक बल, भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना, शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया, महानिदेशालय नौवहन, मत्स्य विभाग, सीमा शुल्क, मरीन पुलिस, पारादीप पोर्ट अथॉरिटी और ओडिशा प्रशासन सहित विभिन्न एजेंसियों ने हिस्सा लिया। अभियान में तटरक्षक बल के 15 पोत, तीन डोर्नियर विमान, तीन एएलएच हेलीकॉप्टर, एक चेतक हेलीकॉप्टर, भारतीय वायुसेना के C-130J और Mi-17 विमान, भारतीय नौसेना के दो पोत तथा अन्य नागरिक एवं राज्य संसाधनों को शामिल किया गया।

विमान के समुद्र में गिरने का बनाया गया वास्तविक जैसा परिदृश्य

अभ्यास के दौरान एक बड़े समुद्री हादसे का काल्पनिक लेकिन वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित परिदृश्य तैयार किया गया। इसमें 228 यात्रियों को लेकर जा रहे एक यात्री विमान के पारादीप बंदरगाह के निकट समुद्र में दुर्घटनाग्रस्त होने तथा उसके ढांचे के कंटेनर जहाज एमवी जुंबा से टकराने और आग लगने की स्थिति बनाई गई।

हादसे की सूचना मिलते ही विभिन्न एजेंसियों ने समन्वित तरीके से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। इसमें घटना कमांड पोस्ट की स्थापना, आग बुझाने की कार्रवाई, हेलीकॉप्टर से लोगों को निकालना, लाइफ राफ्ट एवं एयर-ड्रॉपेबल लाइफ राफ्ट तैनात करना, जेसन क्रैडल और जेमिनी के माध्यम से बचाव, रेस्क्यू बास्केट तथा स्क्रैम्बल नेट से लोगों को निकालने और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) की क्षमता का प्रदर्शन किया गया।

तकनीक और त्वरित सूचना साझा करने पर जोर

SAREX-2026 ने समुद्री आपदा के दौरान तकनीक आधारित खोज एवं बचाव व्यवस्था की अहमियत को रेखांकित किया। अभ्यास में वास्तविक समय में सूचनाओं के आदान-प्रदान, समुद्री क्षेत्र की बेहतर निगरानी और संसाधनों की तेज तैनाती पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) को परखा गया और अभियान के दौरान सामने आने वाली संभावित कमियों की पहचान कर भविष्य की तैयारियों में सुधार के लिए अनुभवों को शामिल करने का अवसर मिला।

4,390 SAR अभियानों में बचाई 11,897 जिंदगियां

भारत के समुद्री खोज एवं बचाव तंत्र ने पिछले वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत के 2001 में अंतरराष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव सम्मेलन, 1979 से जुड़ने और 2002 में राष्ट्रीय समुद्री खोज एवं बचाव बोर्ड के गठन के बाद व्यवस्था को लगातार मजबूत किया गया है।

भारतीय तटरक्षक बल के अनुसार, पिछले पांच दशकों में 4,390 खोज एवं बचाव अभियानों के दौरान 11,897 लोगों की जान बचाई गई, जबकि 530 लोगों को चिकित्सा निकासी की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

SAREX-2026 ने भारत और उसके अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के साझा संकल्प को एक बार फिर मजबूत किया कि समुद्र में किसी भी आपात स्थिति के दौरान हर संकट संदेश पर समन्वित प्रतिक्रिया हो और लोगों की जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाए। यह अभ्यास SAGAR और MAHASAGAR की भावना के अनुरूप तेज, तकनीक-सक्षम और बेहतर समन्वित समुद्री खोज एवं बचाव व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहा।

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