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एनबीसीसी की विकास रफ्तार को नई उड़ान, 1.28 लाख करोड़ की ऑर्डर बुक बनी ताकत

वित्त वर्ष 2025-26 में समेकित राजस्व 13,195.89 करोड़ रुपये, पीएटी में 33.19 प्रतिशत की बढ़ोतरी; पुनर्विकास, रियल एस्टेट और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार पर कंपनी का फोकस

 

Amar sandesh नई दिल्ली। आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन नवरत्न सीपीएसई एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2025-26 में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के साथ विकास की अपनी गति को और तेज किया है। कंपनी की 66वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एवं अन्य ऑडियो-विजुअल माध्यमों से आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता एनबीसीसी के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. के. पी. महादेवास्वामी ने की। उन्होंने शेयरधारकों को कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, प्रमुख परियोजनाओं और भविष्य की विकास रणनीति की जानकारी दी।

एजीएम में कंपनी के निदेशक मंडल के सदस्य डॉ. सुमन कुमार, निदेशक (वाणिज्य), श्री अंजीव कुमार जैन, निदेशक (वित्त), सरकार द्वारा नामित निदेशक श्री संजीत, स्वतंत्र निदेशक श्री विशाल पुरी तथा कंपनी सचिव श्रीमती दीप्ति गंभीर सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

डॉ. महादेवास्वामी ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान एनबीसीसी ने कारोबार और वित्तीय प्रदर्शन, दोनों मोर्चों पर उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। कंपनी ने समेकित आधार पर 13,195.89 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.52 प्रतिशत अधिक है। वहीं, समेकित कर-पश्चात लाभ (पीएटी) 33.19 प्रतिशत बढ़कर 742.45 करोड़ रुपये पहुंच गया।

एकल आधार पर कंपनी की कुल आय 10,055.45 करोड़ रुपये रही, जबकि कर-पश्चात लाभ 703.29 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इसमें पिछले वर्ष की तुलना में 47.72 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष के दौरान कंपनी ने समेकित आधार पर 18,780 करोड़ रुपये मूल्य का कारोबार हासिल किया। 31 मार्च 2026 तक एनबीसीसी की समेकित ऑर्डर बुक 1,27,820 करोड़ रुपये रही, जो कंपनी के मजबूत कारोबारी आधार और भविष्य की परियोजनाओं की संभावनाओं को दर्शाती है।

अब तक का सर्वाधिक 270 करोड़ रुपये का लाभांश

एनबीसीसी ने अपने शेयरधारकों के लिए भी महत्वपूर्ण घोषणा की है। कंपनी ने अब तक का सर्वाधिक 270 करोड़ रुपये का 100 प्रतिशत लाभांश घोषित किया है। इसमें प्रत्येक 1 रुपये के पूर्णतः प्रदत्त इक्विटी शेयर पर 0.46 रुपये का अंतिम लाभांश तथा 0.21 रुपये, 0.21 रुपये और 0.12 रुपये के क्रमशः तीन अंतरिम लाभांश शामिल हैं।

आम्रपाली और सुपरटेक परियोजनाओं में बड़ी जिम्मेदारी

पुनर्विकास और रियल एस्टेट के क्षेत्र में एनबीसीसी की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। आम्रपाली परियोजनाओं के तहत कंपनी 8,598 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि वाली करीब 38,000 आवासीय इकाइयों का निर्माण कर रही है। इनमें से 32,550 से अधिक घरों का निर्माण पूरा हो चुका है और उन्हें लाभार्थियों को सौंपने की प्रक्रिया जारी है।

चरण-II में कंपनी अतिरिक्त आवास विकसित करने के साथ परियोजना की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए अप्रयुक्त एफएआर के मुद्रीकरण पर भी काम कर रही है।

वहीं, उच्चतम न्यायालय के समर्थन के बाद एनबीसीसी 16 सुपरटेक परियोजनाओं में करीब 50,000 अटकी आवासीय इकाइयों को पूरा करने की निगरानी कर रही है। इन परियोजनाओं की अनुमानित टॉपलाइन करीब 10,000 करोड़ रुपये है। कंपनी के अनुसार यह कार्य उसकी अपनी निधियों का उपयोग किए बिना स्व-संधारणीय मॉडल के तहत किया जा रहा है।

शहरी पुनर्विकास में भी बढ़ा कंपनी का दायरा

एनबीसीसी ने सात जीपीआरए पुनर्विकास परियोजनाओं, आम्रपाली परियोजनाओं और अन्य प्रमुख पुनर्विकास पहलों के माध्यम से शहरी अवसंरचना के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। कंपनी द्वारा 1,600 से अधिक सरकारी आवासीय इकाइयों और कार्यालय अवसंरचना का उद्घाटन किया गया है। इसके अलावा 6,600 से अधिक जीपीआरए फ्लैटों और भारत बिजनेस पार्क के आठ टावरों की आधारशिला रखी गई है।

कंपनी का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य आधुनिक और संधारणीय शहरी अवसंरचना तैयार करने के साथ रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना भी है।

दुबई में प्रवेश, अंतरराष्ट्रीय कारोबार को विस्तार

एनबीसीसी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी मौजूदगी का विस्तार किया है। वित्त वर्ष के दौरान कंपनी ने 211.12 करोड़ रुपये का विदेशी राजस्व अर्जित किया। इस दौरान दुबई में एनबीसीसी ओवरसीज रियल एस्टेट एलएलसी की स्थापना कंपनी की प्रमुख उपलब्धियों में रही। इसके साथ एनबीसीसी दुबई के रियल एस्टेट क्षेत्र में प्रवेश करने वाली पहली सीपीएसई बनी।

कंपनी ने ऑस्ट्रेलिया, सेशेल्स, मॉरीशस और मालदीव में भी अपनी भागीदारी को मजबूत किया है। मालदीव के हुलहुमाले में चल रही सामाजिक आवास परियोजना एनबीसीसी की अंतरराष्ट्रीय परियोजना क्षमताओं और भारत की बढ़ती वैश्विक साझेदारियों का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

‘विकसित भारत @ 2047’ के विजन में योगदान का संकल्प

डॉ. महादेवास्वामी ने कहा कि एनबीसीसी की विकास रणनीति पुनर्विकास, परियोजना प्रबंधन परामर्श, रियल एस्टेट विकास, परिसंपत्ति मुद्रीकरण, संधारणीय अवसंरचना और अंतरराष्ट्रीय विस्तार पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि मजबूत ऑर्डर बुक, सुदृढ़ परियोजना निष्पादन पाइपलाइन और रणनीतिक अवसंरचना एवं पुनर्विकास के क्षेत्र में बढ़ते अवसरों के चलते कंपनी भविष्य की विकास यात्रा के लिए मजबूत स्थिति में है।

उन्होंने कहा कि एनबीसीसी ‘विकसित भारत @ 2047’ के विजन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है और उत्कृष्टता, पारदर्शिता तथा सतत विकास के साथ देश के शहरी एवं संस्थागत अवसंरचना निर्माण में योगदान जारी रखेगी।

एजीएम के समापन पर डॉ. महादेवास्वामी ने भारत सरकार, विशेष रूप से आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, लोक उद्यम विभाग, डीआईपीएएम, सेबी और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय सहित केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न एजेंसियों, ग्राहकों, श्रमिकों, शेयरधारकों, कर्मचारियों तथा सभी हितधारकों के प्रति उनके निरंतर सहयोग और विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया।

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