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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों गबर सिंह बिष्ट को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार, पौड़ी से दिल्ली तक गूंजा उत्तराखंड का गौरव

मुस्याखांद के प्रधानाध्यापक की वर्षों की मेहनत को मिला राष्ट्रीय सम्मान, शिक्षक दिवस पर विज्ञान भवन में राष्ट्रपति ने किया सम्मानित

अमर चंद्र

नई दिल्ली। शिक्षक दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद का नाम राष्ट्रीय पटल पर गौरवान्वित हुआ। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने देशभर के उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 प्रदान किए। इसी क्रम में पौड़ी गढ़वाल के विकासखंड नैनीडांडा स्थित राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय, मुस्याखांद के प्रधानाध्यापक गबर सिंह बिष्ट को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट, निष्ठापूर्ण एवं समर्पित योगदान के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

श्री गबर सिंह बिष्ट की यह उपलब्धि केवल एक शिक्षक का व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि मुस्याखांद, नैनीडांडा, पौड़ी गढ़वाल और पूरे उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय बन गई है। उनके सम्मान की खबर मिलते ही क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई और स्थानीय लोगों, शिक्षकों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

मुस्याखांद ग्वेल भैरो मंदिर सेवा ट्रस्ट के पदाधिकारी सोहन बिशन सिंह ने अमर संदेश को श्री गबर सिंह बिष्ट के बारे में अधिक जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने और सीमित संसाधनों के बीच बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर समर्पण के साथ कार्य किया है। उन्होंने कहा कि श्री बिष्ट की उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा संविधान में निहित ‘अवसर की समानता’ के आदर्श को कार्यरूप देने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने शिक्षकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई बीच में छोड़ने की दर का नगण्य होना शिक्षकों के निरंतर प्रयासों से संभव हुआ है।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्कूली शिक्षा पूरी शिक्षा व्यवस्था की आधारशिला है। बचपन में सदाचार की शिक्षा अधिक प्रभावी होती है। प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और नैतिक विकास पर निष्ठापूर्वक ध्यान देकर शिक्षक अच्छे विद्यार्थियों के साथ-साथ कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों की भावी पीढ़ियां तैयार कर सकते हैं।

उन्होंने शिक्षकों के उस विशेष दायित्व पर भी जोर दिया, जिसके तहत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले, पहली पीढ़ी के विद्यार्थी, गांव से शहर के विद्यालयों में पहुंचने वाले, संकोची अथवा प्रतिभाशाली लेकिन आत्मविश्वास की कमी वाले बच्चों और विशेष आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों में आत्मविश्वास जगाकर उन्हें आगे बढ़ाने का कार्य किया जाता है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत को ज्ञान की महाशक्ति के साथ-साथ विश्व के कौशल-केंद्र के रूप में स्थापित करना राष्ट्रीय प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए विश्वस्तरीय शिक्षा व्यवस्था आवश्यक है और शिक्षक इस पूरी व्यवस्था में प्राण-वायु का संचार करते हैं। देश में कोई भी विद्यार्थी अच्छी शिक्षा के अवसर से वंचित न रहे, यह हम सभी का प्रयास होना चाहिए।

मुस्याखांद से राष्ट्रीय मंच तक पहुंची शिक्षा की तपस्या

ग्राम सभा मैरा, डाकघर भौन (मुस्याखांद), पट्टी इडियाकोट तल्ला, विकासखंड नैनीडांडा, जिला पौड़ी गढ़वाल निवासी श्री गबर सिंह बिष्ट ने शिक्षा के प्रति वर्षों की तपस्या, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण के माध्यम से यह राष्ट्रीय उपलब्धि हासिल की है। ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के लिए उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर मिली यह पहचान निश्चित रूप से पहाड़ के उन शिक्षकों के लिए भी प्रेरणादायी है, जो सीमित संसाधनों के बीच नई पीढ़ी का भविष्य संवारने में जुटे हैं।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर श्री मुस्याखांद ग्वेल भैरव मंदिर सेवा ट्रस्ट एवं समस्त क्षेत्रवासियों ने श्री गबर सिंह बिष्ट को हार्दिक बधाई एवं कोटि-कोटि शुभकामनाएं दी हैं। क्षेत्रवासियों ने कहा कि श्री बिष्ट का यह सम्मान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा तथा मुस्याखांद और नैनीडांडा क्षेत्र की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाई देगा।

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