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बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध योगदान के लिए मिली वैश्विक पहचान, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए कर रही हैं महत्वपूर्ण कार्य
Amar sandesh दिल्ली/नोएडा, अक्टूबर 2026। एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, एमिटी यूनिवर्सिटी उत्तर प्रदेश, नोएडा की प्रोफेसर (डॉ.) अर्चना तिवारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उन्हें वर्ष 2025 और 2026 में लगातार दूसरे वर्ष विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में स्थान मिला है। यह पहचान स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के सहयोग से प्रकाशक एल्सेवियर द्वारा तैयार प्रतिष्ठित वैश्विक वैज्ञानिक रैंकिंग डेटाबेस के आधार पर दी गई है।
दो दशकों से अधिक का शैक्षणिक और शोध अनुभव
प्रो. अर्चना तिवारी को अकादमिक क्षेत्र और अनुसंधान में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एल्गल बायोटेक्नोलॉजी में पीएचडी की है। उनका शोध मुख्य रूप से डायटम बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोएल्गी बायोरिफाइनरी और पर्यावरणीय स्थिरता पर केंद्रित है।
वर्ष 2018 में उन्होंने भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग से प्राप्त वित्तीय सहयोग के माध्यम से डायटम रिसर्च प्रयोगशाला की स्थापना की। इस प्रयोगशाला में सूक्ष्म शैवाल के जरिए उपयोगी जैव-अणुओं, टिकाऊ जैव-उत्पादों के विकास और कार्बन डाइऑक्साइड के प्रभाव को कम करने की संभावनाओं पर शोध किया जा रहा है।
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं में योगदान
प्रो. तिवारी विभिन्न सरकारी एवं औद्योगिक संस्थानों द्वारा वित्तपोषित शोध परियोजनाओं से जुड़ी रही हैं। उनकी वर्तमान शोध गतिविधियों में डीएस ग्रुप द्वारा वित्तपोषित उद्योग-अकादमिक परियोजना, अंतरराष्ट्रीय आसियान-भारत सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास परियोजना, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रभाग के अंतर्गत ब्रिक्स परियोजना तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की परियोजना शामिल हैं।
उन्होंने जापान, इटली, फ्रांस, ब्राजील, अर्जेंटीना, वियतनाम, मलेशिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका और यूनाइटेड किंगडम की प्रतिष्ठित प्रयोगशालाओं के साथ अंतरराष्ट्रीय शोध सहयोग भी स्थापित किया है। इन सहयोगों से वैज्ञानिक अनुसंधान और नई तकनीकों के विकास को बढ़ावा मिला है।
211 प्रकाशन और छह पेटेंट दर्ज
प्रो. अर्चना तिवारी का शोध योगदान उनके अकादमिक कार्यों में भी दिखाई देता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनके नाम 211 प्रकाशन दर्ज हैं, जिनमें 130 शोध पत्र, 15 पुस्तकें और 66 पुस्तक अध्याय शामिल हैं। उन्होंने छह पेटेंट दाखिल किए हैं। उनके मार्गदर्शन में 12 शोधार्थी पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं, जबकि चार शोधार्थी वर्तमान में उनके निर्देशन में डॉक्टरेट स्तर पर शोध कर रहे हैं।
पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान में बायोटेक्नोलॉजी की अहम भूमिका
लगातार दूसरे वर्ष विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में स्थान प्राप्त करना प्रो. तिवारी की शोध यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उनका अनुसंधान सूक्ष्म शैवाल की उपयोगिता, पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ जैव-उत्पादों और कार्बन उत्सर्जन से जुड़ी चुनौतियों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण संभावनाएं प्रस्तुत करता है।
उनकी यह उपलब्धि उच्च शिक्षा, वैज्ञानिक नवाचार और शोध मार्गदर्शन के क्षेत्र में निरंतर योगदान को रेखांकित करती है। साथ ही, यह पर्यावरणीय स्थिरता और सतत विकास के लिए बायोटेक्नोलॉजी के बढ़ते महत्व को भी उजागर करती है।
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