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इंडिया की CSR पहल से 1,050 बच्चों को नई जिंदगी, 2 लाख से ज्यादा बच्चोंकोल की हृदय जांच

जी किशन रेड्डी बोले CSR से स्वास्थ्य, शिक्षा और सामुदायिक विकास को मिल रहा नयाआयाम

थैलेसीमिया बाल सेवा योजना और ‘नन्हा सा दिल’ की उपलब्धियों का जश्न, कोयला क्षेत्र के लिए पहली व्यापक CSR रूपरेखा भी जारी

Amar sandesh नई दिल्ली। कोयला मंत्रालय और कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) ने अपनी प्रमुख कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहलों के जरिए स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (टीबीएसवाई) और ‘नन्हा सा दिल’ पहल की उपलब्धियों को सामने रखा गया। इसी अवसर पर भारतीय कोयला कंपनियों के लिए पहली व्यापक क्षेत्र-विशिष्ट CSR रूपरेखा भी जारी की गई।

कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त सहित वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक, कार्यान्वयन एजेंसियों के प्रतिनिधि और लाभार्थी परिवार मौजूद रहे।

मंत्री जी. किशन रेड्डी बोलेबच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए मिलकर करना होगा काम

जी. किशन रेड्डी ने कहा कि कोल इंडिया पिछले एक दशक से स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में लगातार CSR गतिविधियां चला रहा है। उन्होंने थैलेसीमिया बाल सेवा योजना, ‘नन्हा सा दिल’ और एसईसीएल की ‘सुश्रुत’ जैसी पहलों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि थैलेसीमिया और जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के हित में केंद्र और राज्य सरकारों, चिकित्सा संस्थानों, कार्यान्वयन एजेंसियों तथा अभिभावक संगठनों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने उपचार प्राप्त कर रहे बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए उनकी शैक्षिक जरूरतों में सहयोग का भी भरोसा दिलाया।

1,050 से ज्यादा बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट

थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे गंभीर आनुवंशिक रक्त विकारों से जूझ रहे बच्चों के लिए शुरू की गई थैलेसीमिया बाल सेवा योजना ने देशभर में अपनी पहुंच का विस्तार किया है। शुरुआती चार अस्पतालों के नेटवर्क से बढ़कर अब योजना में 21 अस्पताल सूचीबद्ध हैं।

योजना के तहत चार चरणों में कुल 130 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बोन मैरो ट्रांसप्लांट (BMT) के लिए प्रति मरीज 10 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता सीधे सूचीबद्ध अस्पतालों को दी जाती है। अब तक 1,050 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं।

‘नन्हा सा दिल’ ने बदली बच्चों की जिंदगी

जन्मजात हृदय दोष (CHD) से पीड़ित बच्चों के लिए शुरू की गई ‘नन्हा सा दिल’ पहल के तहत भी उल्लेखनीय काम हुआ है। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के जरिए अब तक 2 लाख से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जबकि 1,500 से ज्यादा सुधारात्मक हृदय सर्जरी की गई हैं।

बच्चों के परिवारों के लिए उपचार पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है। इसमें इलाज के साथ यात्रा और अस्पताल में भर्ती होने का खर्च भी शामिल है।

कोयला क्षेत्र के लिए पहली क्षेत्र-विशिष्ट CSR रूपरेखा

कार्यक्रम में कोयला क्षेत्र की कंपनियों के लिए व्यापक CSR रूपरेखा भी जारी की गई। कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत वैधानिक CSR व्यवस्था लागू होने के बाद इसे कोयला क्षेत्र के लिए पहली क्षेत्र-विशिष्ट रूपरेखा बताया गया है।

भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (IICA) द्वारा तैयार यह रूपरेखा कोयला खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की जरूरतों के अनुरूप CSR योजनाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने में मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगी।

‘CSR का असली मतलब जिंदगी बदलना’

कोयला मंत्रालय की अपर सचिव रुपिंदर बरार ने कहा कि CSR की वास्तविक भावना लोगों के जीवन को बेहतर बनाने, समुदायों को सशक्त करने और जरूरतमंदों के लिए अवसर पैदा करने में है।

कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि हर बच्चे को बेहतर इलाज, जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों और उनके परिवारों के लिए सीआईएल की CSR पहल को महत्वपूर्ण बताया।

कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि इन योजनाओं ने जरूरतमंद बच्चों और उनके परिवारों तक जीवनरक्षक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

लाभार्थियों की आंखों में दिखी नई उम्मीद

कार्यक्रम में उपचार प्राप्त कर चुके बच्चों और उनके परिवारों ने अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कोल इंडिया, कोयला मंत्रालय, डॉक्टरों, अस्पतालों और सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार जताया।

बच्चों ने बताया कि समय पर मिले उपचार ने उन्हें नई जिंदगी के साथ पढ़ाई, भविष्य और अपने सपनों को लेकर नया आत्मविश्वास दिया।

कार्यक्रम में टीबीएसवाई पर पुस्तक का विमोचन, स्वास्थ्य क्षेत्र में सीआईएल की CSR पहलों पर लघु फिल्मों का प्रदर्शन, डॉक्टरों और विशिष्ट अतिथियों का सम्मान तथा लाभार्थी परिवारों के साथ संवाद भी हुआ।

CSR की इन पहलों ने यह साबित किया है कि सही दिशा में किया गया सामाजिक निवेश केवल आंकड़े नहीं बढ़ाता, बल्कि जरूरतमंद परिवारों की जिंदगी और भविष्य दोनों बदल सकता है।

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