विकसित भारत’ के लक्ष्य हेतु सतत ऊर्जा प्रणालियों पर दिल्ली में तकनीकी संगोष्ठी का आयोजन
ऊर्जा संक्रमण के दौर में भारत: सतत बिजली प्रणालियों पर दिल्ली में विशेषज्ञ सम्मेलन सम्पन्न
Amar sandesh नई दिल्ली। ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में सतत और स्वच्छ ऊर्जा को केंद्रीय आधार मानते हुए विघ्नहर्ता सेवा फाउंडेशन और उन्नत भारत सोशल वेलफेयर सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आज नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में एक दिवसीय तकनीकी संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। संगोष्ठी का मुख्य विषय “भारत में सतत ऊर्जा प्रणालियों का भविष्य” (Future of Sustainable Power Systems in India) रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर ऊर्जा, कानून और प्रशासन क्षेत्र के विशेषज्ञ मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।
संगोष्ठी के दौरान दुर्गा सिंह भंडारी (पूर्व जीएम, ONGC) ने भारत के ऊर्जा परिदृश्य पर महत्वपूर्ण डेटा साझा किया। उन्होंने बताया कि भले ही वर्तमान में भारत की ऊर्जा खपत का 75% हिस्सा जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuel) पर निर्भर है, लेकिन हमारी पावर ग्रिड की स्थापित क्षमता अब 51% से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) की ओर बढ़ चुकी है, जो एक सकारात्मक संकेत है।
इस मौके पर संबोधित करते हुए एडवोकेट संदीप पांडेय ने ऊर्जा की मांग और पर्यावरण सुरक्षा के बीच संतुलन को रेखांकित किया। ओर डॉ. राज सिंह निरंजन ने समाज के वंचित वर्गों के लिए ‘ऊर्जा के अधिकार’ (Right to Energy) की वकालत की, ताकि हर नागरिक को स्वच्छ ईंधन और बिजली मिल सके।
डॉ. अश्विनी ने वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए प्रोएक्टिव उपायों और अक्षय ऊर्जा के विकल्पों पर जोर दिया।
तकनीकी समाधान पर प्रकाश चंद्र (प्रधान सलाहकार, सौर ऊर्जा) ने ग्रिड की विश्वसनीयता और ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) जैसे तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला, जो भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिए अनिवार्य हैं। ओर आलोक पांडेय (उप निदेशक, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय) ने चर्चा का समापन करते हुए विश्वास जताया कि सतत ऊर्जा के माध्यम से ही ‘विकसित भारत’ का सपना साकार होगा।
कार्यक्रम के अंत में उन्नत भारत के संस्थापक श्री अभिषेक मिश्रा ने सभी गणमान्य अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और धन्यवाद प्रस्ताव दिया। सेमिनार में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, इंजीनियरों और बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया।

