श्रद्धाजंलि सभा मे उत्तराखंडियों का ‘राही परिवार’ को न्याय न मिलने पर आक्रोश

सी एम पपनैं
नई दिल्ली, । विगत चार पीढ़ियों से निरंतर उत्तराखंड के लोकगायन व लोक संगीत की परिपाठी को देश की राजधानी दिल्ली मे राष्ट्रीय स्तर पर सहेज कर रखने वाले ‘स्व.चंद्र सिंह राही परिवार’ के युवा उभरते कलाकार यमन नेगी की माह अप्रैल 10 को उत्तरप्रदेश के कन्नौज मे हुए सड़क हादसे मे हुई मृत्यु पर उत्तराखंड फिल्म कलाकार संगठन द्वारा  गढ़वाल भवन मे भावभीनि श्रद्धाजंलि सभा आयोजित की गई।यमन नेगी प्रसिद्ध लोकगायक स्व.चंद्र सिंह राही के पौत्र व लोक वादक सतीश नेगी राही के एकमात्र पुत्र थे। कन्नौज सड़क हादसे मे हुई यमन की मृत्यु पर परिजनो द्वारा अनेकों बार यूपी पुलिस से लगाई गई गुहार के बाद भी पुलिस प्रशासन के ढुलमुल रवैए व मृत्यु के सही कारण का खुलासा न होने पर राही परिवार की हताशा व निराशा पर आयोजित श्रद्धाजंलि सभा मे उत्तराखंड के जनसरोकारों से जुड़े प्रबुद्ध संगीतकारो, कलाकारों, पत्रकारो, साहित्य व समाज से जुड़े प्रबुद्ध जनो ने भारी संख्या मे उपस्थित होकर मृत आत्मा की शान्ति हेतु प्रार्थना कर भावभीनि श्रद्धाजंलि अर्पित की तथा राही परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने हेतु ढाढ़स बधाया, सांत्वना दी। यूपी पुलिस प्रशासन की कड़े शब्दो मे भर्त्सना कर न्याय की मांग की। श्रद्धाजंलि सभा मे राही परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करने वाले प्रबुद्ध वक्ताओं मे हेमपंत, रमेश घिंडियाल, रमेश कुकरेती, चंद्रमोहन पपनैं, दीपक जोशी, राजेंद्र चौहान, प्रेमा धोनी, नितिन प्रकाश (अधिवक्ता), महेशचंद्र, अनिल पंत, नरेंद्र अजनवी, संजय शर्मा (वरिष्ठ अधिवक्ता), बिशन हरियाला,  दीपक, नरेंद्र रौथाण, देवराज रंगीला, डॉ विनोद बछेती, प्रदीप वेदवाल, दिगमोहन नेगी, दिगंबर नेगी तथा विरेंद्र नेगी मुख्य थे। संवेदना स्वरूप वक्ताओं ने राही परिवार को इस दुःख की घड़ी मे आत्मिक ढाढ़स बधाया, साहस दिया। हर प्रकार की मदद का आश्वासन दिया। यूपी पुलिस के रवैए की कड़े शब्दों मे निंदा की व अंतिम न्याय मिलने तक राही परिवार के साथ खड़े रह कर मदद का संकल्प लियाl वक्ताओं ने अपने संबोधन मे व्यक्त किया, यमन नेगी अपने दादा, परदादा व परिजनों द्वारा अपार लगन व निष्ठा से पोषित उत्तराखंड की पारम्परिक समृद्ध सांस्कृतिक परिपाठी को आधुनिक रंगमंच पर विविध विधाओ मे नए व पुराने के तानेबाने को मिश्रित कर गायन व संगीत लोक परंपरा को नई दिशा व विधा का स्वरूप दे, संगीत व गायन लोकशैली विधा को प्रयोग के तौर पर नए अंदाज मे आगे बढ़ा स्मृद्ध करना चाहते थे। इस दिशा मे उन्होंने अपना पहला गाना ‘मुखड़ी’ शीर्षक से रिलीज भी कर दिया था, जिसको गाया था दीपक जोशी ने गाने के बोल थे- हाय तेरी रुमाला, गुलाबी मुखड़ी, क्य्यै भली छाजड़  छ, नाख की नथुल….। यमन नेगी के संगीत निर्देशन मे फिल्माया गया यह उनका पहला व अंतिम गीत साबित हुआ। सभागार मे पर्दे पर यह यादगार गीत प्रदर्शित भी किया गया, जिसे देख-सुन सभी भावुक हो गए। वक्ताओं ने कहा स्व. चन्द्रसिंह राही जिस समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को छोड़ गए थे उनका ओजस्वी पौत्र यमन उस परिपाठी को नए प्रयोगों के माध्यम से आगे बढ़ा रहा था। वक्ताओं ने व्यक्त किया, राही परिवार का प्रत्येक सदस्य पीढ़ियों से उत्तराखंड की लोकसंस्कृति के संरक्षण, उत्थान व उसके प्रचार-प्रसार के लिए कृत संकल्प होकर समर्पित रहा है। यही उनके परिवार के जीवन की आजीविका का माध्यम रही है। काव्य गायन द्वारा भी यमन नेगी को श्रद्धाजंलि अर्पित की गई। सुप्रशिद्ध प्रवासी उत्तराखंडी कवि रमेश घिंडियाल ने अपने भावुक कर देने वाले काव्य मे व्यक्त किया-दादू तू किले नि दिखन दे, बीच मे छोड़ी की चली ग्य्यै…यमन किले नि सुणन्दु, सुर की गंगा कंधी लुकी ग्य्यै…अभी तो अलाप छू यो, यमन राग अधुरो रे गो। नरेंद्र रौथाण द्वारा व्यक्त काव्य-तिथ शान्ति दिया परमात्मा, हे दिवंगत आत्मा… भै बैणयू प्यार दी, माँ-बाप के दुलार दी…तभी त छाया सब साथ मा, हे दिवंगत आत्मा…। लोकगायक व वादक यमन के दादा देवराज रंगीला का भावुक स्वरों मे प्रस्तुत काव्य- नाती था यमन… कि धरती आकाश मा तू कथी गई…ये परिवार कै तू छोड़ि गए, ये बाबा तू कथै गए…। राही परिवार के अधिवक्ता नितिन प्रकाश ने अपने संबोधन मे अवगत कराया कि यूपी पुलिस तथ्य छिपा रही है। पुलिस के बयानों व दुर्घटना करने वालों के बयानों मे अंतर है। दस्तावेजो मे मिली भगत से झूठ लिख पुलिस प्रशासन ने सड़क दुर्घटना मे हुई मृत्यु का केश दबा दिया है। प्रशासन आगे कार्य करने को तैयार नही है। वरिष्ठ अधिवक्ता संजय शर्मा ने अपनी राय दे अवगत कराया, पुलिस से जांच पड़ताल हटे, अन्य उच्च अधिकारियो को जांच का जिम्मा सौपा जाय, तभी न्याय की राह देखी जा सकती है। अन्य वक्ताओं ने कहा आयोजित श्रद्धाजंलि सभा तभी सार्थक मानी जाऐगी जब हम परिवार की पीड़ा को अंतर्मन से समझ उन्हे न्याय दिलवा सके। समय आ गया है, हम सब उत्तराखंडियो को प्रतिज्ञा लेनी होगी न्याय पाने के लिये। वक्ताओं ने कहा यह घटना आज यमन नेगी के साथ हुई है, कल किसी दूसरे प्रवासी उत्तराखंडी के साथ होगी। ऐसे मे भविष्य मे हम सब उत्तराखंडियो को दिल्ली प्रवास मे एक जुट होकर आगे आना होगा, अपने समाज व लोगो को मजबूत दिशा देने होगी। यह समय की मांग है। उत्तर प्रदेश पुलिस प्रशासन के रवैये की सभी वक्ताओं ने कड़े शब्दों मे निंदा की व न्याय न मिलने तक राही परिवार के साथ खड़े रहने का संकल्प लिया। उत्तराखंड फिल्म कलाकार संगठन के महासचिव नरेंद्र रौथाण ने अपने वक्तव्य मे कहा, सरकार मे विभाग तो बने हैं परन्तु सुध लेने वाला कोई नही। संस्कृति विभाग को सुध लेनी चाहिए थी, क्यों की मृतक एक कला जगत से जुड़े परिवार का नवोदित ओजस्वी कलाकार था, भविष्य का उदीयमान रंगकर्मी बनने के उसमे लक्षण थे। वह उत्तराखंड फिल्म कलाकार संगठन से भी जुड़ा हुआ था। नरेंद्र रौथाण ने कहा हम लोगो मे जागरुकता अभाव से नतीजा सामने है। राही परिवार पुलिस प्रशासन के चक्कर काटते-काटते परेशान हो थक चुका है। इस अवसर पर उत्तराखंड फिल्म कलाकार संगठन द्वारा  मृतक के सुप्रशिद्ध ढोल व तबला वादक पिता सतीश नेगी को आयोजक संगठन के कोषाध्यक्ष खुशाल सिंह विष्ट द्वारा 25 हजार रुपयो की राशि का चेक सहायता स्वरूप भेट किया गया। संगठन के महासचिव द्वारा एक ज्ञापन उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को इस आशय के साथ प्रेषित किया गया-राही परिवार को न्याय दिलवाने मे उक्त सरकारे आर्थिक मदद करे। मृतक के मशहूर तबला व ढ़ोल वादक बेरोजगार पिता सतीश नेगी को राज्य सरकार पेंशन घोषित करे, जिससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण सम्मान जनक तरीके से कर सके। उक्त ज्ञापन सभागार मे उपस्थित जनो के मध्य संगठन महासचिव द्वारा पढ़ कर सुनाया गया। मृतक यमन के पिता सतीश नेगी ने सभी उपस्थित जनो का श्रद्धाजंलि सभा मे आने व आयोजक उत्तराखंड  फिल्म कलाकार संगठन का आर्थिक मदद व आयोजन हेतु आभार व्यक्त कर कहा, आप सब लोगो के भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या मे यहां पहुचने पर मुझे व मेरे परिवार को बल व हिम्मत हौसला मिला है। यमन नेगी की आत्मा की शान्ति के लिए खचाखच भरे सभागार मे दो मिनट का मौन रख श्रद्धाजंलि अर्पित की गई। श्रद्धाजंलि सभा का मंच संचालक सु-विख्यात समाज सेवी नीरज बवाड़ी ने बड़ी विनम्रता से किया।
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