Amar sandesh नई दिल्ली।संसद का बजट सत्र बुधवार से औपचारिक रूप से आरंभ हो गया। सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधन से हुई। अपने प्रेरक और दूरदर्शी संबोधन में राष्ट्रपति ने राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक उपलब्धियों, सुरक्षा संकल्पों और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करना उनके लिए प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने बीते वर्ष को भारत की तीव्र प्रगति और गौरवशाली विरासत के उत्सव के रूप में याद किया। राष्ट्रपति ने बताया कि देशभर में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाया जा रहा है और इस अवसर पर राष्ट्रकवि बंकिम चंद्र चटर्जी को श्रद्धांजलि दी जा रही है। उन्होंने इस विषय पर संसद में हुई विशेष चर्चा के लिए सभी सांसदों की सराहना की।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष, भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती, सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती तथा भारत रत्न भूपेन हजारिका की जयंती से जुड़े आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन देश की एकता, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण की भावना को सुदृढ़ करते हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि जब राष्ट्र अपने महापुरुषों और पूर्वजों के योगदान को स्मरण करता है, तो इससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है और ‘विकसित भारत’ की दिशा में देश की यात्रा को नई गति मिलती है।
देश की सुरक्षा पर स्पष्ट और सशक्त संदेश देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षा “न भय कहूं को देत, न भय मानत आन”भारत की आत्मा में निहित साहस और आत्मबल का प्रतीक है। इसी भावना के साथ भारत अपनी सुरक्षा नीति को आगे बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत ने यह सिद्ध किया है कि शक्ति का प्रयोग विवेक और जिम्मेदारी के साथ किया जा सकता है। ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता और क्षमता को विश्व ने देखा है। भारत ने अपने संसाधनों के बल पर आतंकवाद के ठिकानों को नष्ट किया है और किसी भी हमले का जवाब सशक्त और निर्णायक होगा।
राष्ट्रपति ने बताया कि आतंकवाद के विरुद्ध रणनीति के तहत सिंधु जल संधि को स्थगित रखा गया है तथा देश की रक्षा तैयारियों को और मजबूत करने के लिए मिशन सुदर्शन चक्र पर कार्य प्रगति पर है।
उधर, बजट सत्र की पूर्व संध्या पर मंगलवार को सरकार ने सर्वदलीय बैठक आयोजित की, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। बैठक में 39 राजनीतिक दलों के 51 नेताओं ने भाग लिया। सरकार ने विपक्ष से सदन के सुचारु संचालन में सहयोग की अपील की। हालांकि VB-G RAM G एक्ट और SIR प्रक्रिया पर पुनः चर्चा की मांग को सरकार ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि “हम गियर को रिवर्स नहीं कर सकते।”
बजट सत्र के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण गुरुवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करेंगी, जबकि 1 फरवरी (रविवार) को केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया जाएगा। राजनीतिक हलकों में सत्र के हंगामेदार रहने के आसार भी जताए जा रहे हैं।
राष्ट्रपति का यह संबोधन न केवल राष्ट्र की गौरवशाली विरासत और वीरता को प्रतिबिंबित करता है, बल्कि एक सशक्त, सुरक्षित और विकसित भारत के प्रति सरकार के अटूट संकल्प को भी स्पष्ट करता है।