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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में रेल अवसंरचना में नया अध्याय
Amar sandesh नई दिल्ली।भारतीय रेलवे ने पिछले ग्यारह वर्षों में निरंतर निवेश और सुनियोजित क्रियान्वयन के माध्यम से अपनी पटरी अवसंरचना को सुदृढ़ करने तथा सुरक्षा मानकों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में उल्लेखनीय प्रगति की है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप देश भर में रेल संचालन आज पहले से कहीं अधिक सुरक्षित, तेज और विश्वसनीय हो गया है।
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारतीय रेलवे ने 6,851 किलोमीटर से अधिक पटरियों का नवीनीकरण सफलतापूर्वक किया। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 7,500 किलोमीटर से अधिक पटरियों के नवीनीकरण का कार्य प्रगति पर है, जबकि वर्ष 2026-27 में 7,900 किलोमीटर पटरियों के नवीनीकरण की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की गई है। यह रेलवे परिसंपत्तियों की विश्वसनीयता और यात्रियों की सुरक्षा के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
रेलगाड़ियों की सुचारू और सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए विस्तारित रेल मार्गों के नवीनीकरण में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गई हैं। वर्ष 2024-25 में 7,161 थिक वेब स्विच और 1,704 वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग स्थापित किए गए। वहीं 2025-26 में 8,000 से अधिक थिक वेब स्विच तथा 3,000 से अधिक वेल्डेबल सीएमएस क्रॉसिंग स्थापित किए जा रहे हैं।
पटरी की स्थिरता बनाए रखने और यात्रियों को आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करने के उद्देश्य से गिट्टी की मशीनीकृत गहन जांच को लगातार गति दी जा रही है। वर्ष 2024-25 में 7,442 किलोमीटर पटरी की गहन जांच पूरी की गई, जबकि 2025-26 में 7,500 किलोमीटर से अधिक पटरी की जांच का कार्य जारी है।
यंत्रीकृत रखरखाव से बढ़ी कार्यकुशलता
रेलवे ने ट्रैक के रखरखाव को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के लिए अपने ट्रैक मशीन बेड़े का व्यापक विस्तार किया है। वर्ष 2014 से अब तक 1,100 से अधिक आधुनिक ट्रैक मशीनें खरीदी जा चुकी हैं, जिससे रखरखाव कार्य तेज, सटीक और अधिक कुशल हो पाया है।
मवेशियों के कुचले जाने और पटरियों पर अनधिकृत प्रवेश की घटनाओं को रोकने के लिए रेलवे द्वारा पटरी किनारे सुरक्षा बाड़ लगाने का कार्य प्राथमिकता पर किया जा रहा है। अब तक लगभग 15,000 किलोमीटर रेल पटरियों पर बाड़ लगाई जा चुकी है, विशेषकर उन खंडों पर जहां ट्रेनें 110 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से संचालित होती हैं।
उच्च गति क्षमता वाली पटरियों में दोगुना विस्तार
इन निरंतर प्रयासों का प्रतिफल यह है कि 110 किमी प्रति घंटे और उससे अधिक गति क्षमता वाली पटरियों की लंबाई वर्ष 2014 में 31,445 किलोमीटर (लगभग 40 प्रतिशत नेटवर्क) से बढ़कर वर्तमान में 84,244 किलोमीटर (लगभग 80 प्रतिशत नेटवर्क) तक पहुंच गई है। इससे ट्रेनों का संचालन न केवल तेज हुआ है, बल्कि समयबद्धता और दक्षता में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
भारतीय रेल, जो देश की धड़कन और आम जनमानस की पसंदीदा यात्रासवारी है, आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के दूरदर्शी नेतृत्व में निरंतर विकास की ओर अग्रसर है। रेलवे क्षेत्र में लिखे जा रहे ये नए इतिहास आम नागरिकों के लिए यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और भरोसेमंद बना रहे हैं।
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