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हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल में ‘प्रशिक्षण, प्लेसमेंट एवं छात्र कल्याण प्रकोष्ठ’ का शुभारंभ

डिग्री के साथ कौशल विकास और सॉफ्ट स्किल्स आज के समय की अनिवार्य मांग: प्रो. अनुप्रिया पांडे

डॉ. के सी पांडेय, हावड़ा/कोलकाता। पश्चिम बंगाल स्थित हिंदी विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और भविष्य की चुनौतियों के लिए उन्हें तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय परिसर में विद्यार्थियों के करियर मार्गदर्शन और रोजगारपरक शिक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ‘प्रशिक्षण, प्लेसमेंट एवं छात्र कल्याण प्रकोष्ठ’ (TPSWC) की औपचारिक स्थापना की गई।

इस अवसर पर आयोजित विशेष उद्घाटन व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में इग्नू (IGNOU), नई दिल्ली की प्रोफेसर अनुप्रिया पांडेय नई प्रस्तुति दी।

प्रोफेसर पांडेय ने अपने संबोधन में वैश्विक परिदृश्य का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी युग में केवल शैक्षणिक डिग्री सफलता की गारंटी नहीं है। उन्होंने सॉफ्ट स्किल्स को रोजगार की रीढ़ बताते हुए विद्यार्थियों से कहा, “आज के समय में संप्रेषण कौशल (Communication), व्यक्तित्व विकास, समय प्रबंधन और भावनात्मक बुद्धिमत्ता जैसे गुण अनिवार्य हैं।” उन्होंने छात्रों को इंटर्नशिप और प्रोजेक्ट-आधारित सीखने की प्रक्रिया से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।

विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय का दायित्व केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि सक्षम नागरिक गढ़ना है। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका पर बल देते हुए “ट्रेनिंग द ट्रेनर्स” की अवधारणा पेश की।

“जब शिक्षक स्वयं प्रशिक्षित और अद्यतन (Updated) होंगे, तभी वे विद्यार्थियों को कक्षा की चारदीवारी से बाहर की दुनिया के लिए तैयार कर पाएंगे।” प्रो. नंदिनी साहू, कुलपति उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों और तकनीक के नैतिक उपयोग को अकादमिक जीवन का अभिन्न अंग बताया।

प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट अधिकारी डॉ. इंद्रजीत यादव द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में भविष्य की रूपरेखा भी साझा की गई। विश्वविद्यालय आने वाले समय में जिन सत्रों का आयोजित करेगा उसमें शामिल है-

रिज़्यूमे लेखन और साक्षात्कार (Interview) कौशल,प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और उद्यमिता (Entrepreneurship) विकास,मानसिक स्वास्थ्य और छात्र कल्याण सत्र तथाउद्योग जगत के साथ समन्वय कर इंटर्नशिप और प्लेसमेंट के अवसर।

कुलपति ने घोषणा की कि यह प्रकोष्ठ ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से कार्य करेगा ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थी भी इसका लाभ उठा सकें। यह पहल हिंदी विश्वविद्यालय को एक छात्र-केंद्रित और नवाचारोन्मुख संस्थान बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

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