दिल्लीराष्ट्रीय

डिजिटल नवाचार और समावेशिता: प्रोफेसर नंदिनी साहू ने राष्ट्रीय सम्मेलन में शिक्षा के भविष्य का खाका खींचा

-डॉक्टर के सी पांडेय

कोलकाता, 25 फरवरी 2026। राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (NITTTR), कोलकाता द्वारा आयोजित ‘राष्ट्रीय शिक्षा और नेतृत्व सम्मेलन–2026’ में हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल की कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू ने ‘भविष्य के लिए तैयार शिक्षा प्रणालियों के निर्माण हेतु डिजिटल नवाचार का उपयोग’ विषय पर एक अत्यंत प्रेरक और दूरदर्शी मुख्य भाषण दिया। अपने संबोधन में उन्होंने तेजी से बदलते तकनीकी परिवेश और वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप शिक्षा प्रणाली को ढालने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया और अनुशासनिक ज्ञान के साथ-साथ 21वीं सदी के कौशल विकास को अनिवार्य बताया।

युवा सशक्तिकरण के लिए उद्यमिता, नवाचार और स्टार्ट-अप संस्कृति की वकालत करते हुए उन्होंने ‘प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण’ (Training the Trainers) और आत्मनिर्भरता के महत्व को रेखांकित किया। समावेशी शिक्षा पर विशेष ध्यान देते हुए प्रोफेसर साहू ने कहा कि हाशिए पर रहने वाले समुदायों को डिजिटल भविष्य में केवल प्राप्तकर्ता नहीं बल्कि सक्रिय हितधारक बनना चाहिए, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सीखने के निजीकरण और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े शिक्षकों व छात्रों के सशक्तिकरण में क्रांतिकारी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने भविष्य के लिए तैयार शिक्षाविदों, पाठ्यक्रम सुधारों और अंतर-विषयक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर भी विस्तार से चर्चा की, जो युवाओं के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी आजीवन सीखने और पुनर्कौशल (reskilling) के अवसर सुनिश्चित करे।

मुख्य संबोधन सत्र संवादात्मक था, जिसमें प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से चर्चा में भाग लिया और गहन प्रश्न पूछे। प्रो. साहू के विचार, उनकी सोच की स्पष्टता और समावेशी और नवाचारपूर्ण शिक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की व्यापक रूप से प्रशंसा की गई। इस व्याख्यान को प्रतिभागियों द्वारा प्रेरणादायक, विचारोत्तेजक और समयानुसार बताया गया।

सम्मेलन के दौरान उन्होंने हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल द्वारा राज्य में गुणवत्तापूर्ण और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) आधारित शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे महत्वपूर्ण योगदानों और संकाय सदस्यों व छात्रों की सक्रिय भागीदारी का भी उल्लेख किया। प्रोफेसर साहू के इस विचारोत्तेजक संबोधन और समावेशी शिक्षा के प्रति उनकी स्पष्ट दृष्टि की उपस्थित शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं ने व्यापक सराहना की, जिससे इस राष्ट्रीय सम्मेलन को एक नई बौद्धिक दिशा मिली।

Share This Post:-

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *