जनसरोकारों के लिए प्रतिबद्ध ‘सार्वभौमिक’ ट्रस्ट ने मनाया स्थापना दिवस

सी एम पपनैं
नई दिल्ली। उत्तराखंड के सुदूर तथा पिछड़े इलाकों मे विषम परिस्थितियों मे जीवन यापन कर रहे नोनिहालो के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध ‘सार्वभौमिक’ ट्रस्ट द्वारा पहला भव्य स्थापना दिवस 10 अगस्त गढ़वाल भवन के  खचाखच भरे सभागार मे प्रबुद्ध प्रवासी बन्धुओ व उत्तराखंड के सुदूर क्षेत्रो से आए लोगो की उपस्थिति मे मनाया गया।
आयोजन का शुभारंभ ट्रस्ट अध्यक्ष अजय सिंह बिष्ट, महासचिव शर्मीला अमोला, सचिव हिमानी बिष्ट, कोषाध्यक्ष वीरेंद्र अमोला व अन्य सदस्यों कुसुम बिष्ट, गीता गुसाई नेगी, लक्ष्मी रावत पटेल, रमेश ठण्डरियाल, राकेश गुसाई, रमेश ठंडरियाल, वीरेंद्र सिंह नेगी, रमेश चंद्र घिंडियाल, रोशनी चमोली, सुशील बद्री, सोनू रौथाण, मीना कंडवाल, रवींद्र गुड़ियाल व ममता गुनियाल इत्यादि द्वारा गढ़वाल भवन के प्रांगण मे बीरबाला वीरांगना तीलू रौतेली की 358वी जयंती पर पूजा अर्चना व वीरांगना के चित्र पर माल्यार्पण के साथ किया गया।
श्रोताओं से भरे सभागार के मंच से महिला सशक्तिकरण विषय पर हिमानी बिष्ट ने अपने व्याख्यान मे पश्चिमी सभ्यता को भारतीय समाज के लोगो द्वारा स्वीकार किए जाने व शिक्षा के स्तर पर आ रही गिरावट व देश के कई भागों मे महिलाओं के शिक्षा प्रतिशत मे आ रही गिरावट पर चिंता व्यक्त की। कहा राष्ट्र की अर्थव्यवस्था उन्नति मे पुरुष व महिलाओं की बराबरी का योगदान है, तो हक भी बराबरी का होना चाहिए। व्यवस्थापको व नियोजकों को महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कर उन्हे समान हक दिलवाना चाहिए।
उत्तराखंड के पुरुषो व महिलाओं के शिक्षा प्रतिशत पर भी व्याख्यान मे प्रकाश डाला गया। देश के समस्त राज्यो मे केरल व उत्तराखंड की महिलाओं की उच्च शिक्षा प्रतिशत व उनकी निम्न आर्थिकी के बावजूद भी अवगत कराया गया। विभिन्न क्षेत्रो मे उत्तराखंड की अनेकों वीरांगनाओ की राष्ट्रव्यापी स्तर पर निभाई गई भूमिका का भी व्याख्यान मे बखान किया गया।  उत्तराखंड के सीमान्त व दूरदराज के क्षेत्रो मे ‘सार्वभौमिक’ ट्रस्ट द्वारा नोनिहालो के शिक्षा के क्षेत्र मे लाई जा रही जागरुकता के प्रयास की सराहना व्याख्यान मे की गई।
परिवार मे महिलाओ की भूमिका व उनके महत्व के बावजूद अवगत कराया गया। व्यक्त किया गया, घर से ही सु-संस्कृत संस्कार व शिक्षा की जागरूकता का क्रम आरम्भ होता है। घर परिवारों से ही हमे इन सुविचारों को प्राथमिकता देनी होगी।तालियों की गड़गड़ाहट के मध्य हिमानी बिष्ट का व्याख्यान समाप्त हुआ।
ट्रस्ट महासचिव शर्मीला अमोला, अध्यक्ष अजय सिंह बिष्ट ने अपने संबोधन मे मंचित होने जा रहे कार्यक्रमो की रूपरेखा तथा ट्रस्ट के भावी कार्ययोजनाओं के बावजूद अवगत कराया। उत्तराखंड के दुर्गम परिस्थितियों मे जो बच्चे जीवनयापन कर रहे हैं, जिनमें बदलाव लाया जा सकता है, ट्रस्ट उनके विद्यालयो मे जाकर कार्य कर रहा है। अवगत कराया गया कुछ बच्चों का दल दिल्ली दर्शन हेतु लाया गया है, उन्हे ऐतिहासिक स्थानों के दर्शन करा कर आज ट्रस्ट के स्थापना दिवस पर सम्मानित भी किया जा रहा है। व्यक्त किया गया, नोनिहालो के व्यवहार, शैक्षिक माहौल के परिवर्तन पर ट्रस्ट कार्य कर रहा है। बालिकाओं के समग्र विकास के लिए कार्य करना ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य है। विद्यालयों मे बालिकाओं के लिए कैरियर काउंसलिंग एवं महिलाओं के लिए प्रतिभा सम्मान का आयोजन भी ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। तीलू रौतेली से प्रेरणा लेकर कार्यो को आगे अग्रसर किया जा रहा है। इसी प्रेरणा से नोनिहाल भविष्य मे उत्तराखंड व देश का पुनर्जागरण करेंगे! ट्रस्ट को विश्वास है।
स्वास्थ कर्म से जुडी ट्रस्ट महासचिव सुश्री शर्मिला अमोला ने हेपेटाइटिस रोग पर लीवर से जुडी बीमारी के बारे विस्तार पूर्वक जानकारी दे, श्रोताओं को जागरूक किया। ए बी सी डी ई हैपेटाइटस बीमारी के पांच प्रकारों पर सारगर्भित प्रकाश डाल अवगत कराया। कहा हैपेटाइटस ‘बी’ का टीका जरूर लगवाए। दैनिक जीवन चर्या व खानपान का ख्याल रखे।
गणमान्य अतिथियो हरिदत्त भट्ट, के सी पांडे, गीता गैरोला, संजय शर्मा दरमोडा अधिवक्ता उच्चतम न्यायालय, अखिल भारतीय काग्रेस कमेटी सयुंक्त सचिव हरपाल रावत, राज यादव, देवेन्द्र जोशी, पूरन चंद्र कांडपाल, रचना जोशी, मधु बेरिया, प्रताप घुघुतियाल, चंद्रमोहन पपनैं, सुनील नेगी, प्रदीप वेदवाल इत्यादि द्वारा दीप प्रज्वलन की रश्म अदायगी व मीरा गैरोला की वंदना-
प्रणम्य शिरशा देव…न गुरगेधिकम त्व्व…कैलाशा थल वासिनी भगवती, नन्दा जगत वासिनी…।
ममता उनियाल निर्देशित तथा हर्षिता शर्मा कनक नेगी इत्यादि के गायन स्वरों मे-
बाबा केदार नाथ…जै शम्भूनाथ म्यारा…गंगा की धारा शिव की जटा मे…।
नृत्य-वंदना की मनमोहक प्रस्तुति ने श्रोताओं को गदगद किया।
ट्रस्ट आयोजको द्वारा आमंत्रित गणमान्य अतिथियो मे विशिष्ट अतिथि के सी पांडे (उद्योगपति) सपत्नीक, संजय शर्मा, सुश्री राज यादव के साथ-साथ अन्य अतिथियो मे देवेन्द्र जोशी, हर्षिता बहुगुणा, हेम पंत, चंद्रमोहन पपनैं, कर्नल पटवाल, आरुषि ‘निशंक’, सुश्री द्रोपदी (तीलू रौतेली परिवार से संबद्ध), हरिपाल रावत, अर्जुन राणा, प्रताप घुघुतियाल, मोब्बत सिंह राणा, डॉ पवन मैठाणी, मीना भंडारी (पार्षद) इत्यादि को पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया गया। बेटी को परिभाषित करती स्मारिका ‘नौनी’ का लोकार्पण प्रबुद्ध पत्रकारो, साहित्यकारो, समाज सेवियों व संस्कृति कर्मियों के हाथों किया गया।
मंचित सांस्कृतिक कार्यक्रम में विविधता प्रदान करते हुए राकेश गौण लिखित लघु नाटक ‘बूढ़े मा बाप का दर्द’ लक्ष्मी रावत के निर्देशन मे मंचित किया गया। उत्तराखंड के पलायन की मार से विरान हो चुके गांवो मे निवासरत बड़े-बूढो के जीवन के दुःख दर्द को मार्मिक तौर पर मंचित किया गया। नाटक मे पिरोया गया गीत-
जीरे जागि रये, तू सुखी राजी रये, तू जी रे… देखी पूजी जांदी…त्यारा हाथ खुटुमा कांट कभे नि चुभो…।
गाने के बोल ने दर्शको को बहुत भावुक किया।
दूसरा लघु नाटक ‘अब क्ये होल’। वीरान पड़े गांवो के भूतिया होने की व्यथा पर मंचित किया गया। मंचित लघु नाटकों की पृष्ठ भूमि ने सभागार मे बैठै प्रबुद्ध प्रवासी श्रोताओं को झकझोर कर रख डाला। सभी पात्रो की भूमिका व नाटकों का संदेश सटीक था। नाटक स्थानीय कुमाउनी-गढ़वाली संवादो मे मंचित करना प्रभावशाली प्रयोग रहा।
स्थापना समारोह के इस अवसर पर ट्रस्ट द्वारा शिक्षा के क्षेत्र मे गरीब बच्चों की शिक्षा-दिक्षा मे दिए जा रहे योगदान पर देहरादून की सुश्री रचना जोशी को वर्ष 2019 के ‘सार्वभौमिक’ सम्मान से नवाजा गया।
सम्मानित सुश्री रचना जोशी ने अपने वक्तव्य मे शिक्षा के क्षेत्र मे किए जा रहे कार्यो से व मिल रही सफलता से श्रोताओं को अवगत कराया।ट्रस्ट जिस तरह से नोनिहालो के स्वास्थ, शिक्षा व सांस्कृतिक उत्थान के लिए कार्य कर रहा है सराहना की। मिले सम्मान हेतु सार्वभौमिक का आभार व्यक्त करने के साथ ट्रस्ट से जुड़ने की इच्छया भी जाहिर की।
इस अवसर पर उत्तराखंड के राजकीय इंटर कालेज पौड़ीखाल, देवप्रयाग ब्लाक, टिहरी गढ़वाल से दिल्ली समारोह मे उपस्थित 6 छात्राओं अंजलि, दीपिका, सुष्मिता पवार कक्षा 10 तथा प्रियंका, अमिषा, अंजू कक्षा12 को शिक्षा मे अव्वल स्थान पाने तथा दो छात्रो मनीष व अनुज कुमार को गीत-संगीत साधना के क्षेत्र मे सम्मानित किया गया। सम्मानित इन बच्चो ने वाद्य यंत्र ढोलक की थाप व हारमोनियम मे गीत-
ज्युनो की ज्युनाली…चंद्रमा सूरज….।
प्रस्तुत कर अपना प्रभावशाली हुनर दिखा दर्शको की तालियां बटोरी।
ट्रस्ट से जुड़े संगीतकारो, गायकों व नर्तकों द्वारा डॉ सतीश कालेश्वरी द्वारा रचित  उत्तराखंड लोक सांस्कृतिक  यात्रा ‘आदि से अनंत’ जिसे तीन कालखंडों मे बाटा गया है पर नायाम गीत-संगीत व नृत्य का कार्यक्रम मंचित किया। लोकगायन व संगीत की 1920 से 1970 के कालखंड मे जीत सिंह नेगी, मोहन सिंह रीठागाड़ी, मोहन उप्रेती, नईमा खान उप्रेती, केशब अनुरागी, रतन सिंह जौनसारी, चंद्र सिंह राही व कबूतरी देवी इत्यादि के लोकगायन व संगीत आधारित लोकगीतों को पहले कालखंड मे स्थान दिया है।
दूसरा कालखंड 1971 से 2000 जिसे उत्तराखंड के लोकसंगीत का स्वर्णकाल भी कहा गया मे नरेंद्र सिंह नेगी, हीरासिंह राणा, जगदीश बकरोला, सुनीता बेलवाल,सत्येन्द्र फंडरियाल, रेखा धस्माना, मधु बेरिया, शिवदत्त पंत, बसन्ती बिष्ट इत्यादि के लोकगायन व रचनाओं को स्थान दिया गया है, तथा 2001 से वर्तमान तक मे विभक्त किया गया कालखंड इसमे अमित सागर, पप्पू कार्की, फौजी ललित जोशी, आशा नेगी, दीपा जोशी, गोपाल मठपाल इत्यादि के गायन व रचनाओं के नामो को प्रमुखता दी गई है।
आयोजन के अंतिम मुकाम पर लोकगायन पर आधारित लोकगीत, संगीत को संगीतकार राकेश गुसाई के संगीत निर्देशन मे तथा लक्ष्मी रावत पटेल के नृत्य निर्देशन मे निराले आकर्षण अंदाज मे मंचित किया गया। दर्शको के लिए गीत-संगीत व नृत्यो के मंचन का यह एक नया आयाम रहा।
लोकगायन मे सत्येन्द्र फंडरियाल, धनेश्वरी नैथानी, राकेश गुसाई, मानसी बहुगुणा, नरेंद्र अजनबी इत्यादि ने अपनी मधुर कंठी गायन विधा से दर्शको को झूमने को मजबूर किया।
सामूहिक व एकल नृत्यो मे लक्ष्मी रावत पटेल, पुष्पा जोशी, गीता गुसाईं, राकेश गौड़, रमेश ठगरियाल  इत्यादि ने अपने सु-प्रसिद्ध उत्तराखंडी पारम्परिक नृत्यो के जादूई प्रभाव से श्रोताओं को आत्मविभोर किया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण मे मुख्य अतिथि पौड़ी सांसद तीरथ सिंह रावत का सभागार मे आगमन हुआ। ट्रस्ट पदाधिकारियों द्वारा सांसद महोदय का सम्मान पुष्प गुच्छ, शॉल व स्मृति चिन्ह भेट कर किया गया। प्रकाशित ट्रस्ट की स्मारिका भेट की। सांसद महोदय ने ट्रस्ट के द्वारा किए जा रहे कार्यो की सराहना की। वीरांगना तीलू रौतेली के संघर्ष व बलिदान पर दिए संबोधन मे उत्तराखंड के सभागार मे बैठै प्रबुद्ध लोगो को प्रवास मे अपनी लोकसंस्कृति, आचार विचार व खानपान की पहचान बनाए रखने का आह्वान किया।
राकेश गुसाई के गीत-संगीत की धुन मे सभी कलाकार, ट्रस्ट पदाधिकारी, मुख्य अतिथि सांसद तीरथ सिंह रावत तथा उत्साहित श्रोतागण नाचते-गाते मंच पर इक्कठे हुए। स्थापना दिवस का समापन हुआ। छः घन्टे तक निरंतर मंचित हुए स्थापना दिवस कार्यक्रम का मंच संचालन ट्रस्ट अध्यक्ष अजय सिंह बिष्ट ने बखूबी बेहद प्रभावशाली अंदाज मे संचालित किया।
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