सत्संग से ही समाज में बदलाव संभव–माता मंगला

नई दिल्ली। द हंस फाउंडेशन की प्रेरणा स्रोत माता श्री मंगला जी के पावन जन्मोत्सव के‌ उपलक्ष्य में श्री हंसलोक जनकल्याण समिति द्वारा श्री हंसलोक आश्रम, छतरपुर नयी दिल्ली‌ में विशाल सत्संग समारोह का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में सरकार द्वारा कोरोना महामारी से बचाव के लिए बनाए गए नियमों- जैसे मुंह पर मास्क, हाथों को बार-बार सैनिटाइज करना तथा शारीरिक दूरी बनाए रखना आदि का पालन किया गया। कार्यक्रम में अनेक धार्मिक, सामाजिक तथा राजनैतिक संगठनों से जुड़े लोगों ने माता श्री मंगला जी को उनके जन्मदिन पर उत्तम स्वास्थ्य, यशस्वी एवं‌ दीर्घजीवी होने ‌की शुभकामनाएं दीं।

इस मौके पर परमपूज्य श्री भोले महाराज एवं माताश्री मंगला जी ने देश के विभिन्न भागों से आए संत-महातमाओ एवं श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वे ध्यान से सत्संग का श्रवण कर उस पर मनन भी करें। उन्होंने कहा कि सत्संग के माध्यम से ही समाज में रचनात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

श्री भोले जी महाराज ने पंडाल में उपस्थित लोगों को–तेरो जन्म-मरण मिट जाये, हरि का नाम सुमरि प्यारे तथा अब तो भजन कर भाई रे, तेरी बीती उमरिया‌ आदि चेतावनी देने वाले भजन गाकर उन्हें मनुष्य जीवन का ध्येय समझाया और भगवान का भजन करने के लिए प्रेरित किया।

माता श्री मंगला जी ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण काफी दिनों के बाद सत्संग का यह आयोजन हुआ, जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार था। उन्होंने कहा कि इस महामारी में कितनों ने अपनों को खो दिया, कितनों के घर उजड़ गए। बहुत ही ‌भयावह त्रासदी थी, जिसने सभी को झकझोर दिया। उस समय धन-दौलत, नाम और प्रसिद्धि कुछ भी काम नहीं आई। उन्होंने कहा कि हमें दिनचर्या के सभी जरूरी कार्यों को करते हुए भगवान के सच्चे नाम का सुमिरन और जरूरतमंद लोगों की सेवा भी अवश्य करनी चाहिए, तभी हमारा मनुष्य जीवन सफल होगा।

माता श्री मंगला जी ने बताया कि उन्होंने जन्मदिन के उपलक्ष्य में देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में उत्तराखंड के लिए 14 डायलेसिस सेंटर, 13 मोबाइल वैन तथा दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए 1 लाख पुस्तकें भेंट की।

कार्यक्रम में भजन गायिका नेहा खंखरियाल ने बधाई गीत एवं भजन प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस मौके पर श्री हंसलोक जनकल्याण समिति के सभी महात्मा-बाईगण, श्रद्धालु-भकत तथा गणमान्य लोग शामिल हुए।

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