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Amar sandesh नई दिल्ली।देश में सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पेंशन और बीमा कवर के विस्तार से करोड़ों नागरिकों को भविष्य की सुरक्षा का भरोसा मिला है। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक समीक्षा 2025–26 पेश करते हुए यह जानकारी दी। समीक्षा के अनुसार, बीमा और पेंशन नियामक संस्थाओं आईआरडीएआई और पीएफआरडीए ने वित्तीय समावेशन को मज़बूत करने और वंचित वर्गों तक सुरक्षा पहुंचाने के लिए कई अहम सुधार किए हैं।
आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि देश की पेंशन व्यवस्था अब एक मज़बूत और बहु-स्तरीय ढांचे में विकसित हो चुकी है। इसमें नेशनल पेंशन सिस्टम (एनपीएस), सरकार समर्थित यूनिफाइड पेंशन स्कीम, कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और अटल पेंशन योजना (एपीवाई) जैसी योजनाएं शामिल हैं।
31 दिसंबर 2025 तक एनपीएस के ग्राहकों की संख्या बढ़कर 211.7 लाख हो गई है। पिछले दस वर्षों में एनपीएस ग्राहकों की संख्या में 9.5 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इसमें जमा धनराशि (एयूएम) में 37 प्रतिशत से अधिक की तेज़ बढ़ोतरी हुई है। वहीं, अटल पेंशन योजना ने भी शानदार प्रदर्शन किया है और इसमें शामिल लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
अनौपचारिक क्षेत्र के करोड़ों कामगारों को जोड़ने के लिए एनपीएस ई-श्रमिक मॉडल शुरू किया गया है, जिससे गिग वर्कर्स, किसान, स्वयं सहायता समूह और छोटे व्यवसायों से जुड़े लोग पेंशन की मुख्यधारा में आ सकें। डिजिटल केवाईसी, ई-एनपीएस, लचीला योगदान और जागरूकता अभियानों से अब ग्रामीण और कम आय वाले परिवारों तक भी पेंशन योजनाएं पहुंचने लगी हैं।
आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि भारतीय बीमा क्षेत्र अब “2047 तक सभी के लिए बीमा” के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। बीमा नियामक आईआरडीएआई ने नियमों को सरल बनाकर नवाचार और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा दिया है।
‘गैर-जीवन’ बीमा क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। स्वास्थ्य बीमा अब कुल बीमा प्रीमियम का 41 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है और यह सबसे बड़ा बीमा खंड बन गया है। वहीं, जीवन बीमा क्षेत्र भी मज़बूत बना हुआ है, जिसने वित्त वर्ष 2025 में 6.3 लाख करोड़ रुपये से अधिक के लाभों का भुगतान किया।
देश में फिलहाल 26 जीवन बीमा कंपनियां, 26 गैर-जीवन बीमा कंपनियां, सात स्वास्थ्य बीमा कंपनियां और दो विशेषज्ञ बीमा कंपनियां काम कर रही हैं। इनके पास 22,076 कार्यालयों और 83 लाख से अधिक वितरकों का विशाल नेटवर्क है, जिससे बीमा सेवाएं दूर-दराज़ तक पहुंच रही हैं।
जीवन बीमा और व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पर जीएसटी में छूट से पॉलिसीधारकों को सीधी राहत मिली है और बीमा अब ज़्यादा किफायती हो गया है। साथ ही, ‘सबका बीमा, सबकी सुरक्षा अधिनियम, 2025’ और एफडीआई सीमा को 100 प्रतिशत तक बढ़ाने जैसे फैसलों से बीमा क्षेत्र में बड़े सुधारों का रास्ता खुला है।
हालांकि समीक्षा में यह भी कहा गया है कि बीमा क्षेत्र अभी भी कम पहुंच और ज़्यादा लागत की चुनौती से जूझ रहा है। इसके समाधान के लिए बीमा कंपनियों को डिजिटल वितरण को बढ़ावा देकर खर्च कम करने और पॉलिसीधारकों को उनके पैसों का पूरा लाभ दिलाने पर ज़ोर देना होगा।
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