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एसआरसीसी के शताब्दी सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का आह्वान, ऊर्जा सुरक्षा से लेकर वैश्विक उद्यमों के निर्माण तक युवाओं को दिखाई नई राह
Amar sandesh नई दिल्ली। भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए युवाओं को नवाचार, उद्यमशीलता और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ना होगा। ऊर्जा, वित्त और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में मौजूद चुनौतियों को अवसरों में बदलकर युवा देश की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में यह बात कही।
दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) की ओर से इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टाइन ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन ‘विकसित भारत की राह: शताब्दी सम्मेलन’ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने युवाओं से ऐसे भारतीय संस्थानों और उद्यमों के निर्माण का आह्वान किया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विश्वसनीयता स्थापित करने के साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था में नेतृत्व कर सकें।
सम्मेलन में शिक्षाविदों, अर्थशास्त्रियों, नीति निर्माताओं और विद्यार्थियों की भागीदारी रही। इस दौरान भारत की आर्थिक विकास यात्रा, भविष्य की नीतिगत प्राथमिकताओं और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई।
शिक्षा को व्यावहारिक बदलाव का माध्यम बनाएं युवा
एसआरसीसी के शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें समाज और अर्थव्यवस्था की वास्तविक चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए तैयार करना भी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से वाणिज्य और अर्थशास्त्र की अपनी समझ का उपयोग विवेकपूर्ण निर्णय लेने, स्थापित मान्यताओं पर सवाल उठाने और नए व्यावसायिक अवसर विकसित करने में करने का आग्रह किया। उन्होंने दार्शनिक अल्फ्रेड नॉर्थ व्हाइटहेड के विचारों का उल्लेख करते हुए कल्पनाशीलता और अनुभव के समन्वय को ज्ञान तथा सामाजिक परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण बताया।
समुद्र मंथन योजना से ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगी मजबूती
देश की ऊर्जा सुरक्षा को आर्थिक विकास का अहम आधार बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने 84,084 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली समुद्र मंथन योजना का उल्लेख किया। इस योजना का उद्देश्य भारत की अपतटीय हाइड्रोकार्बन संभावनाओं का दोहन करना, अन्वेषण कार्यों में तेजी लाना और घरेलू ऊर्जा क्षमताओं को मजबूत करना है।
योजना के तहत आधुनिक तकनीक, साझा बुनियादी ढांचे और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और तकनीकी क्षमताओं के विस्तार से देश की दीर्घकालिक ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
कचरे से ऊर्जा उत्पादन के अवसरों पर जोर
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सतत विकास के संदर्भ में गोबरधन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि अवशेषों और जैविक कचरे को ऊर्जा में बदलना आर्थिक अवसरों के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी प्रभावी माध्यम है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘अपशिष्ट से धन’ और ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ के दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि इस तरह की पहल किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और देश की ऊर्जा सुरक्षा को बेहतर बनाने में योगदान दे सकती हैं।
वैश्विक चुनौतियों के बीच ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना अहम
पश्चिम एशिया में हालिया संकटों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने तथा घरेलू क्षमताओं को मजबूत करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बदलते अंतरराष्ट्रीय हालात में देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए मजबूत और भरोसेमंद आपूर्ति व्यवस्था जरूरी है।
भारतीय कंपनियां भी बनें वैश्विक नेतृत्वकर्ता
युवाओं को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि जब भारतीय प्रतिभाएं दुनिया की प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियों का नेतृत्व कर रही हैं, तो भारतीय उद्यम वैश्विक स्तर पर नेतृत्व क्यों नहीं कर सकते। उन्होंने विद्यार्थियों से ऐसी कंपनियां और संस्थान स्थापित करने का आह्वान किया, जिनकी पहचान नवाचार, गुणवत्ता, विश्वसनीयता और अंतरराष्ट्रीय भरोसे से हो।
उन्होंने विश्वास जताया कि आज के युवा अपनी प्रतिभा और क्षमताओं के बल पर वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएंगे।
एसआरसीसी के शताब्दी सम्मेलन में आर्थिक विकास, वित्तीय समन्वय, नीतिगत प्राथमिकताओं और भारत के भविष्य से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन ने विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में शिक्षा, युवा शक्ति और उद्यमशीलता की भूमिका को रेखांकित किया।
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