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उत्तराखंड के प्रख्यात प्रबुद्धजनो द्वारा दिवंगत सुपरिचित रंगकर्मी गंगा दत्त भट्ट को दी गई भावभीनि श्रद्धांजलि

सी एम पपनैं

नई दिल्ली। दिल्ली महानगर मे प्रवासरत उत्तराखंड के प्रवासियो द्वारा 1987 मे गठित सांस्कृतिक संस्था ‘पर्वतीय लोक कला मंच’ संस्थापक अध्यक्ष, सुपरिचित रंगकर्मी व रंगमंच निर्देशक स्व. गंगा दत्त भट्ट को भावभीनि श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए दीन दयाल उपाध्याय मार्ग (आईटीओ) स्थित एन डी तिवारी सभागार मे उत्तराखंड अंचल की विभिन्न संस्थाओ, विधाओ व क्रिया कलापो से जुडे शीर्ष पदाधिकारियों, कलाकारों, प्रबुद्ध समाज सेवियो की उपस्थिति मे 9 जुलाई की सांय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन ‘पर्वतीय लोक कला मंच’ संचालकों द्वारा आयोजित किया गया।

विगत माह 17 जून हरिद्वार मे दिवंगत गंगा दत्त भट्ट के चित्र पर सभागार में उपस्थित प्रबुद्ध जनो द्वारा गुलाब की पंखुड़ियां अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। संगीतकार व लोकगायक विरेन्द्र नेगी ‘राही’ द्वारा वादक अनुराग नेगी के सानिध्य में निर्गुण भजन गाए गऐ। दिवंगत गंगा दत्त भट्ट की छह दशको की रंगमंच व आंचलिक फिल्मों से जुडी प्रभावशाली यादगार यात्रा की झलकियां व अंशों को स्क्रीन पर दिखाया गया।

श्रद्धांजलि सभा के इस अवसर पर दिल्ली एनसीआर मे स्थापित उत्तराखंड की विभिन्न प्रवासी सांस्कृतिक, सामाजिक व अन्य विधाओ व कार्यो से जुडे संस्थाओ व संस्थानों के प्रमुख प्रबुद्ध जनो मे प्रमुख रमेश कांडपाल, मयंक भट्ट, कमल कर्नाटक, चंद्र मोहन पपनैं, डाॅ विनोद बछेती, के एन पांडे ‘खिमदा’, मनोज चंदोला, हरि सेमवाल, दिनेश फुलारा, डाॅ हरिसुमन बिष्ट, सुरेश पांडे, कुम्मू जोशी भटनागर, चारु तिवारी, गोपाल उप्रेती, संजय जोशी, के सी पांडे, टी सी उप्रेती, ख्यालीराम पंत इत्यादि इत्यादि द्वारा उत्तराखंड की लोककला व संस्कृति के प्रति छह दशकों तक समर्पित रहे सुपरिचित दिवंगत गंगा दत्त भट्ट को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए व्यक्त किया गया, दिल्ली महानगर मे सांस्कृतिक चेतना के महत्वपूर्ण स्तंभ गंगा दत्त भट्ट का निधन उत्तराखंड की सांस्कृतिक और रंगमंचीय सरोकारों की उस पीढी का अवसान है जो बहुत संघर्षो और संसाधनो के बिना अपनी थाती को बचाने और उसके विस्तार में लगे हुए थे।

 

व्यक्त किया गया, गंगा दत्त भट्ट का जीवन संघर्षमय रहा। रंगकर्म की ओर बाल्यकाल से ही उनका रुझान रहा। उत्तराखंड के द्वाराहाट स्थित अपने गांव से दिल्ली पलायन कर शुरुआती दौर से ही वे गुमान सिंह रावत व दिनेश पांडे के सांस्कृतिक दल व एंड्रियुजगंज पुलिस कलोनी प्रवासी रामलीला मंडली के साथ-साथ अन्य अनेको अन्य रामलीला मंडलियो से जुड़ गये थे।

 

1987 मे रंगकर्मी हेमपंत व के एन पांडे ‘खिमदा’ के सानिध्य मे ‘पर्वतीय लोक कला मंच’ की स्थापना कर उत्तराखंड की पृष्ठभूमि पर आधारित अनेको नाटकों व गीत-संगीत व नृत्य के कार्यक्रमो का मंचन कर उत्तराखंड के प्रवासियो के मध्य एक नया मुकाम हासिल किया। विभिन्न पात्रों का जीवंत अभिनय व किसी भी चरित्र को अपनी भाव भंगिमाओ के साथ जीवंत कर, कई ऐतिहासिक और लोकआख्यानों मे वर्णित चरित्रों पर बनी नृत्य नाटिकाओ मे उनका नृत्य देखने वाला होता था, जो वर्षो तक याद किया जाता रहेगा। व्यक्त किया गया, अंचल के नृत्यों को बडी संजीदगी से मंच पर उतार कर उन्होंने अपनी रंगमंचीय पहचान को विस्तृत किया था। एक कुशल पहाडी नृत्यकार व रंगकर्मी होने के नाते उत्तराखंडी बोली-भाषा की अनेको फिल्मों के साथ-साथ अन्य अनेको राज्यो की बोली-भाषा की फिल्मों में भी दिवंगत गंगा दत्त भट्ट को काम करने का अवसर मिला था। रंगमंच व फिल्मों मे अपनी अभिनय कला का लोहा मनवा कर वे निरंतर ख्याति के पथ पर अग्रसर होते चले गए थे। वे कई सम्मानों से भी नवाजे गए थे।

 

श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए प्रबुद्ध वक्ताओ द्वारा व्यक्त किया गया, साहित्य व कला से जुडे हुए लोग कभी मरते नहीं हैं। दिवंगत गंगा दत्त भट्ट बचपन से ही सामाजिक कार्यो के साथ-साथ एक अद्भुत कला के श्रोत थे। नेतृत्व के गुण उनमे कूट-कूट कर भरे हुए थे। एक लोक कलाकार के जीवन को जी कर अभिनय करते थे। एक विरल व सरल व्यक्तित्व व अद्भुत कला के प्रेरणादायी सख्शियत थे। उनके व्यक्तित्व मे पूरा हिमालय दिखता था। अंचल के गांव-देहात की कला उनमे समायी हुई थी। व्यक्त किया गया, 1970 के बाद आरंभ हुए नए नाटकों के दौर में दिवंगत गंगा दत्त भट्ट का विभिन्न क्षेत्रों में बड़ा योगदान रहा। उनकी अभिनय कला का कोई सानी नहीं था।

 

व्यक्त किया गया, लोक संस्कृति से जुडे लोग सदा प्रेरणादायी होते हैं। समाज के लिए जो करता है उसे लम्बे समय तक याद रखा जाता है। ऐसे प्रेरणादायी लोगों के कार्यो को सदा आगे बढ़ाना चाहिए। नई पीढी के युवाओ को ऐसे प्रेरणादायी लोगों से प्रेरणा लेकर अपने अंचल की धरोहर का संरक्षण व संवर्धन करने हेतु आगे आना चाहिए।

 

‘पर्वतीय लोक कला मंच’ द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा का मंच संचालन प्रख्यात मंच संचालक हेमपंत द्वारा अत्यधिक भावुक होकर किया गया। दिवंगत गंगा दत्त भट्ट के साथ रंगकर्म के क्षेत्र मे बिताए दिनों व संस्मरणो को याद कर सभागार में बैठे प्रबुद्ध जनो को भाव विभोर किया। श्रद्धांजलि सभा समापन भट्ट परिवार के परम मित्र ख्यालीराम पंत द्वारा सभागार में उपस्थित सभी प्रबुद्ध जनो का आभार व्यक्त कर किया गया।

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