Views: 0
सी एम पपनैं
नई दिल्ली। श्रीराम की लीला का मंचन उत्तराखंड के जनमानस की आस्था का सबसे बड़ा सम्बल रहा है। जिसको मंचित करना, देखना, सुनना और जीवन में उतारना उत्तराखंडी लोगों की मानसिकता का आदर्श रहा है। इसी आदर्श स्वरूप दिल्ली एनसीआर में प्रवासरत उत्तराखंड के प्रबुद्घ प्रवासियों द्वारा बड़े ही मनोयोग से गठित ‘श्री राम सेवक पर्वतीय कला मंच’ द्वारा आईटीओ स्थित प्यारे लाल ऑडिटोरियम में 17 और 18 अक्टूबर को दो दिवसीय उत्तराखंड की पारंपरिक संगीतमय, विभिन्न राग आधारित व संवाद युक्त सशक्त कालजई रामलीला का प्रभावशाली मंचन संजय जोशी, चंद्रेश पंत व राकेश जोशी के संगीत व नाट्य निर्देशन तथा चंद्र शेखर पंत, पूरन तिवारी, राजेंद्र जोशी, महेश जोशी, एल आर पंत, नीरज लोहनी, बृज मोहन पंत, सी एस पंत, देवेंद्र पंत इत्यादि इत्यादि के सानिध्य में मंचित की गई।
मानस के पद व चौपाइयों पर आधारित गेय शैली में दस रात्रियों तक क्रमशः विभिन्न रागों के गायन पर आधारित उत्तराखंड की उक्त रामलीला विश्व का सबसे बड़ा गीत नाट्य है जिसे दो दिन में मंचित करने का चुनौतीपूर्ण साहस ‘श्री राम सेवक पर्वतीय कला मंच‘ से जुड़े दर्जनों प्रतिभावान कलाकारों द्वारा निष्ठा पूर्वक प्रभावी व भव्य रूप में खचाखच भरे सभागार में मंचित की गई।
17 अक्टूबर की सायं मंचित रामलीला में विश्वामित्र दशरथ संवाद, ताड़का बध, जनक वाटिका में राम व सीता का प्रथम मिलन, सीता स्वयंवर, परशुराम-लक्ष्मण संवाद, कैकई-दशरथ संवाद, सीता हरण तक की रामलीला का मंचन तथा 18 अक्टूबर को राम-हनुमान मिलन, बाली-सुग्रीव युद्ध, मेघनाथ हनुमान युद्ध, लंका दहन, विभीषण-रावण संवाद, अंगद रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति, कुंभकरण बध, लक्ष्मण-मेघनाथ युद्ध व मेघनाथ बध, राम-रावण युद्ध तथा राज्याभिषेक तक की रामलीला का यादगार मंचन किया गया।
मंचित रामलीला श्रीगणेश से पूर्व संस्था अध्यक्ष राजेन्द्र जोशी द्वारा संस्था गठन के उद्देश्यों पर सारगर्भित प्रकाश डाला गया। आमंत्रित प्रबुद्ध अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन तथा आयोजक संस्था द्वारा सभी अतिथियों का दुपट्टा ओढ़ा कर तथा राम नाम से सुसज्जित स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत अभिनन्दन किया गया। श्रीगणेश वंदना व ‘श्री रामचंद्र कृपालु भज मन….।’ आरती से दो दिनों तक मंचित की जाने वाली श्रीराम की लीला का मनोहारी शुभारंभ किया गया।
सभागार में बैठे श्रोताओं द्वारा मंचित दो दिनी उत्तराखंड की पारंपरिक कालजई रामलीला में पात्रों द्वारा गाए गए राग आधारित गायन, अभिनय व संवादों को दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया, तालियों की गड़गड़ा कर पात्रों का उत्साह वर्धन किया गया।
मंचित रामलीला में बाल राम की भूमिका में अवि लोहनी, बाल लक्ष्मण देवांश जोशी, राम महेश जोशी, लक्ष्मण नितिन जोशी, सीता नीमा गुसाई, भरत सार्थक पंत, शत्रुघ्न अवि लोहनी, दशरथ एल आर पंत, कैकई दीपिका पांडे, कौशल्या पुष्पा भट्ट, परशुराम राकेश जोशी, विश्वामित्र पूरन तिवारी, ताड़का विक्की तिवारी, रावण रमेश जोशी, जनक नीरज लोहनी, वशिष्ठ वसंत जोशी, सुमंत गौरव नेगी, बन्दी जन नवीन भट्ट व विवेक तिवारी, राजा जनक दरवारी गिरजा जोशी, आशीष चौहान, बसंत जोशी व सार्थक, केवट उमेश पंत, गिरजा जोशी, नट करण पांडे, नटी उषा ओली, जोगी रावण पूरन तिवारी, सुर्पनखा दीपिका पांडे, शबरी प्रतिभा पंत, हनुमान गौरव नेगी, बाली आशीष चौहान, सुग्रीव सार्थक जोशी, मेघनाद नवीन भट्ट, अंगद विवेक तिवारी, विभीषण पुष्करानन्द पांडे, सुषेण वैद्य आनंद मल्ल द्वारा किरदार निभाए गए। कोरस गायन में किरण पंत, नीतू पंत, प्रतिभा पंत के कर्णप्रिय गायन ने श्रोताओं को प्रभावित किया। प्रतिभावान सभी कलाकारों द्वारा निष्ठा पूर्वक निभाए गए अभिनय, गायन और व्यक्त संवादों ने श्रोताओं को गदगद किया, उनके जेहन में यादगार छाप छोड़ी।
मंचित की गई दो दिनी श्रीराम की सम्पूर्ण रामलीला मंचन का चुनौती भरा व प्रेरणा जनक कार्य आयोजक संस्था द्वारा किया गया। मंचित रामलीला गाथा सार का स-विस्तार वर्णन कर सभागार में उपस्थित श्रोताओं का ध्यान आकर्षित कर मंत्रमुग्ध किया गया।
दस दिनी उत्तराखंडी भीमताली शैली की रामलीला की सशक्त गायन शैली व रागों की महत्ता को देखते हुए, जो प्रत्येक उत्तराखंडी में आत्मसात रहती है इस पारंपरिक शैली की रामलीला को दो दिनों में मंचित करना किसी चुनौती से कम नहीं कहा जा सकता है। ‘श्री राम सेवक पर्वतीय कला मंच’ द्वारा मंचित रामलीला में करीब पैंतीस-चालीस कलाकारों द्वारा विभिन्न पात्रों की भूमिका का निर्वाह कर मात्र दो दिन में अंचल की इस सुविख्यात पारंपरिक रामलीला को मंचित करने का चुनौतीपूर्ण प्रयास किया गया जो सफल और सराहनीय प्रयास कहा जा सकता है
मंचित रामलीला में मानस की चौपाइयों व दोहों के गायन के साथ-साथ संवाद व संगीत की प्रधानता रही। श्रोताओं को रामलीला के पात्रों खास कर राम, लक्ष्मण, सीता, दशरथ, परशुराम, रावण, ताड़का, कैकई, शूर्पणखा, बाली, सुग्रीव, हनुमान व अंगद के लय बद्ध गायन, अभिनय व व्यक्त संवादों ने श्रोताओं को भाव विभोर किया। उक्त पात्रों द्वारा श्रोताओं के मध्य यादगार छाप छोड़ी गई। पात्रों की वस्त्र सज्जा, आभूषण व श्रृंगार रामकथा के अनुकूल व प्रभावशाली थी। स्क्रीन पर दृश्य दृश्यांकन रामकथा के अनुकूल थे। मंचित रामलीला का निर्देशन प्रभावी था। 
हारमोनियम तथा तबला पर की गई प्रभावशाली संगत तथा मंच पीछे पार्श्व गायक-गायिकाओ के कर्णप्रिय गायन ने श्रोताओं के मध्य राग आधारित गायन की यादगार छाप छोड़ी। मंच संचालन भी बखूबी निभाया गया।
दस दिन की रामलीला को दो दिन में सम्पन्न करने का चुनौती पूर्ण कार्य ‘श्री राम सेवक पर्वतीय कला मंच’ द्वारा संस्था मार्गदर्शक चन्द्र शेखर पंत व पूरन तिवारी के सानिध्य में प्रभावी रूप में निभा कर अंचल की पारंपरिक रामलीला को एक नया आयाम देने का प्रभावशाली प्रयास किया गया जो अति प्रशंसनीय है।
Related