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संस्कार, संगीत और सफलता की मिसाल: हर दिल में बसते वीरेंद्र सिंह नेगी ‘राही’

देवभूमि का चमकता सितारा: ग़ज़ल, भजन और लोकसंगीत में गूंज रहा नाम – वीरेंद्र सिंह नेगी ‘राही’

 

अमरचंद

देवभूमि उत्तराखंड के लोगों की पहचान केवल उनकी कर्मठता से ही नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति और जड़ों से अटूट जुड़ाव से भी होती है। देश-विदेश में रहकर भी यहां के लोग अपनी परंपराओं, लोकगीतों और लोकसंगीत को जीवंत बनाए रखते हैं।

इसी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले एक प्रतिष्ठित परिवार का नाम आज हर जुबान पर है। प्रसिद्ध लोक गायक स्व. चंद्र सिंह राही की यह विरासत आज और भी ऊंचाइयों को छू रही है, जिसे आगे बढ़ा रहे हैं उनके सुपुत्र वीरेंद्र सिंह नेगी, जिन्हें लोग स्नेहपूर्वक ‘राही’ के नाम से भी जानते हैं।

उत्तराखंड के वरिष्ठ संगीतकार के रूप में अपनी पहचान बना चुके वीरेंद्र सिंह नेगी ‘राही’ का संगीत केवल लोकगीतों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी मधुरता ग़ज़लों और भजनों में भी समान रूप से झलकती है। उनकी आवाज और संगीत में एक ऐसा आत्मीय स्पर्श है, जो सीधे दिल तक पहुंचता है।

वे उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध संगीतकारों में शुमार हैं, जिन्होंने अपने सुरों से न केवल पहाड़ की संस्कृति को जीवित रखा, बल्कि उसे नई पीढ़ी तक भी प्रभावी ढंग से पहुंचाया है। उनके गीतों में जहां एक ओर लोक संस्कृति की गहराई है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक संगीत का संतुलित समावेश भी देखने को मिलता है।

उनका स्वभाव अत्यंत सरल, विनम्र और मिलनसार है। आमजन से उनका जुड़ाव और पारिवारिक व्यवहार उन्हें एक विशिष्ट व्यक्तित्व बनाता है। उनकी नेतृत्व क्षमता, समर्पण और संगीत के प्रति निष्ठा ने उन्हें समाज में एक अलग स्थान दिलाया है।

आपके संगीत को धुन देश-विदेश में छठा बिखेर रही है।

आज उनके गीत केवल सुने ही नहीं जाते, बल्कि महसूस किए जाते हैं। हर शब्द, हर सुर में उत्तराखंड की मिट्टी की खुशबू और संस्कृति की आत्मा समाहित होती है, जो श्रोताओं के मन में गूंजती रहती है। ऐसे महान कलाकारों की वजह से ही उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर आज भी जीवंत है और निरंतर आगे बढ़ रही है। ज्ञात उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध संगीतकार वीरेंद्र सिंह राही लंदन की भूमि पर उत्तराखंड की लोकसंगीत पहुंचा रहे।

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